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शौचालय का सच: पहले एमआईएस करा दो, शौचालय बनवाते रहना
Updated Thu, 06 Sep 2018 10:04 PM IST
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ख्ाराब श्ााौचालय
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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एटा। केंद्र और प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को पूरा करने में जिला प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। 30 सितंबर तक लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगाया जा रहा है। मगर इसमें मानकों और नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जिले को आंकड़ों में ओडीएफ करने के लिए प्रशासन नया खेल रचा है। पहले शौचालयों की एमआईएस फीडिंग कराई जा रही है। जबकि निर्माण हुआ ही नहीं है। फीडिंग के लिए सचिवों पर दबाव भी बनाया जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की स्थिति पर गौर करें तो आंकड़ों में जिले में महज 21670 शौचालयों का निर्माण शेष है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। आंकड़ों की बाजीगरी के जरिये शासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए जिला प्रशासन ने नई रणनीति तैयार की है। प्रशासन ने सबसे पहले सभी पंचायत सचिवों से अपने-अपने गांव में शौचालय के पात्रों की सूची मांगकर उनकी एमआईएस फीडिंग करानी शुरू कर दी है। ताकि आंकड़ों में शौचालयों का निर्माण पूरा दिखे। जबकि शौचालय का निर्माण पूरा होने के बाद एमआईएस फीडिंग की जाती है। इसके अलावा प्रशासन ने रिपोर्ट में 359 गांव ओडीएफ कर दिए हैं। जबकि हकीकत में 100 गांव भी ओडीएफ नहीं हुए हैं। एक सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शौचालय का निर्माण कराने से पहले सूची मांग ली गई हैं। उनको फीड कराया जा रहा है। जबकि ग्राम निधि खाते में पैसा नहीं आया है। अगर शौचालय नहीं बन पाते हैं, जो पंचायत सचिव पर कार्रवाई कर दी जाएगी। तमाम पंचायत सचिव विभाग के इस खेल से परेशान हैं।
मंडलीय सत्यापन खोलेगा पोल
जिले के ओडीएफ घोषित होने के बाद मंडलीय सत्यापन में पोल खुलेगी। सत्यापन में गांव में शौचालय का निर्माण नहीं मिलने पर गांव को ओडीएफ नहीं माना जाएगा।
अधिकारियों ने साधा मौन
ओडीएफ को लेकर हो रही फर्जी आंकड़ेबाजी को लेकर अधिकारियों ने मौन साध लिया है। अधिकारी मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की स्थिति पर गौर करें तो आंकड़ों में जिले में महज 21670 शौचालयों का निर्माण शेष है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। आंकड़ों की बाजीगरी के जरिये शासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए जिला प्रशासन ने नई रणनीति तैयार की है। प्रशासन ने सबसे पहले सभी पंचायत सचिवों से अपने-अपने गांव में शौचालय के पात्रों की सूची मांगकर उनकी एमआईएस फीडिंग करानी शुरू कर दी है। ताकि आंकड़ों में शौचालयों का निर्माण पूरा दिखे। जबकि शौचालय का निर्माण पूरा होने के बाद एमआईएस फीडिंग की जाती है। इसके अलावा प्रशासन ने रिपोर्ट में 359 गांव ओडीएफ कर दिए हैं। जबकि हकीकत में 100 गांव भी ओडीएफ नहीं हुए हैं। एक सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शौचालय का निर्माण कराने से पहले सूची मांग ली गई हैं। उनको फीड कराया जा रहा है। जबकि ग्राम निधि खाते में पैसा नहीं आया है। अगर शौचालय नहीं बन पाते हैं, जो पंचायत सचिव पर कार्रवाई कर दी जाएगी। तमाम पंचायत सचिव विभाग के इस खेल से परेशान हैं।
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मंडलीय सत्यापन खोलेगा पोल
जिले के ओडीएफ घोषित होने के बाद मंडलीय सत्यापन में पोल खुलेगी। सत्यापन में गांव में शौचालय का निर्माण नहीं मिलने पर गांव को ओडीएफ नहीं माना जाएगा।
अधिकारियों ने साधा मौन
ओडीएफ को लेकर हो रही फर्जी आंकड़ेबाजी को लेकर अधिकारियों ने मौन साध लिया है। अधिकारी मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।