{"_id":"59bd60914f1c1b2f688b4e52","slug":"201505583249-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लावारिश नवजात बालिका को मिलेगा मां बाप का प्यार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लावारिश नवजात बालिका को मिलेगा मां बाप का प्यार
Updated Sat, 16 Sep 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
Baby
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज।
कहावत है जाको राखे साईयां मार सके ने कोय। यह कहावत सिकंदरपुर वैश्य के ग्राम लखापुर में एक नवजात बालिका के मामले में सही साबित हुई। उसको जन्म देने वाली मां उसे भगवान भरोसे छोड़कर चली गई। बालिका किस्मत की धनी निकली। उसे गांव के ही एक दंपत्ति ने अपना लिया। अब उसे अपनाने वाले माता पिता का प्यार और दुलार मिल जाएगा।
गांव में खेत में एक नवजात बालिका को उसको जन्म देने वाली मां छोड़कर चली गई। गनीमत यह रही कि बालिका पर किसी जंगली जानवर की नजर नहीं पड़ी, जिससे वह सुरक्षित बच गई। जब खेत की ओर से कुछ राहगीर गुजर रहे थे तो किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। राहगीर बच्चे की आवाज की दिशा में चले गए। खेत में एक बालिका को रोते देखा। यह बात गांव में तेजी से फैल गई। काफी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए लोग तरह तरह की चर्चाएं करने लगे। इसी बीच गांव के ही निवासी अशोक बालिका के लिए देवदूत बनकर आए। उन्होंने बालिका को उठा लिया। उनकी गोद में आते ही बालिका चुप हो गई। उन्होंने गांव वालों के सामने ही उसे अपनी बेटी के रूप में अपना लिया। अशोक के पास पहले से दो बेटे हैं। कोई बेटी न होने से यह कमी भी पूरी हो गई।
विज्ञापन
कहावत है जाको राखे साईयां मार सके ने कोय। यह कहावत सिकंदरपुर वैश्य के ग्राम लखापुर में एक नवजात बालिका के मामले में सही साबित हुई। उसको जन्म देने वाली मां उसे भगवान भरोसे छोड़कर चली गई। बालिका किस्मत की धनी निकली। उसे गांव के ही एक दंपत्ति ने अपना लिया। अब उसे अपनाने वाले माता पिता का प्यार और दुलार मिल जाएगा।
गांव में खेत में एक नवजात बालिका को उसको जन्म देने वाली मां छोड़कर चली गई। गनीमत यह रही कि बालिका पर किसी जंगली जानवर की नजर नहीं पड़ी, जिससे वह सुरक्षित बच गई। जब खेत की ओर से कुछ राहगीर गुजर रहे थे तो किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। राहगीर बच्चे की आवाज की दिशा में चले गए। खेत में एक बालिका को रोते देखा। यह बात गांव में तेजी से फैल गई। काफी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए लोग तरह तरह की चर्चाएं करने लगे। इसी बीच गांव के ही निवासी अशोक बालिका के लिए देवदूत बनकर आए। उन्होंने बालिका को उठा लिया। उनकी गोद में आते ही बालिका चुप हो गई। उन्होंने गांव वालों के सामने ही उसे अपनी बेटी के रूप में अपना लिया। अशोक के पास पहले से दो बेटे हैं। कोई बेटी न होने से यह कमी भी पूरी हो गई।
विज्ञापन