{"_id":"62e7873a4d073c2fdf116ddb","slug":"19-percent-women-did-not-breastfeeding-to-newborn-baby-the-first-hour-after-delivery","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"स्तनपान सप्ताह : जन्म के बाद मां ने शिशुओं का नहीं पिलाया 'पीला अमृत', कमजोर हो गए मासूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्तनपान सप्ताह : जन्म के बाद मां ने शिशुओं का नहीं पिलाया 'पीला अमृत', कमजोर हो गए मासूम
Mon, 01 Aug 2022 01:28 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 01 Aug 2022 01:28 PM IST
सार
आगरा जिले में 81.5 फीसदी महिलाओं ने प्रसव होने के बाद नवजात को अपना पीला दूध नहीं पिलाया। चिकित्सकों के मुताबिक मां का पीला दूध बच्चों के लिए अमृत है। यह तमाम बीमारियों से बचाता है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रसव के बाद पहले घंटे में मां का पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए अमृत है। ये बीमारियों से बचाता है, तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क भी विकसित होता है। इसके बावजूद महज 19.5 फीसदी महिलाएं ही पहले घंटे में स्तनपान करा रही हैं। 81.5 फीसदी इसका महत्व नहीं समझ रहीं। इसमें सास-दादी की पुरानी सोच बाधा बनी है। ऐसे में कोलोस्ट्रम न पी पाने वाले बच्चे अन्य की अपेक्षा ज्यादा बीमार पड़ते हैं और कमजोर होते हैं।
विज्ञापन
यूनीसेफ के डॉ. अमृतांशु ने बताया कि आगरा जिले में 3.45 लाख प्रसूताएं हैं। इनका प्रसव अस्पताल में ही हुआ, लेकिन 19.5 फीसदी ने ही पहले घंटे में नवजात को स्तनपान कराया। चिकित्सक और स्टाफ के कहने पर भी बाकी ने ऐसा नहीं किया। सास और दादी ने पुरानी रीतिरिवाज का हवाला देकर उन्हें इससे रोक दिया।
विज्ञापन
इससे इन शिशुओं के शरीर में कोलोस्ट्रम नहीं पहुंच पाया। 43 फीसदी महिलाएं ही शिशु को छह माह तक स्तनपान कराती हैं, अन्य ने दूध न आने समेत अन्य वजह बताईं। 10.70 फीसदी महिलाएं दो साल की आयु तक शिशु को स्तनपान के साथ खाद्य सामग्री भी खिला रही हैं।
विज्ञापन
स्तन कैंसर और अधिक रक्तस्राव से भी बचाव
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि कोलोस्ट्रम गर्भवती के आखिरी महीनों में बनना शुरू होता है। प्रसव बाद आने वाला पीला गाढ़ा दूध बेहद ही पौष्टिक होता है। इसे पिलाने से प्रसूताओं में स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। अधिक रक्तस्राव से भी बचाता है। गर्भधारण के दौरान बढ़ा वजन भी कम होता है।कोलोस्ट्रम न पीने वाले ज्यादा पड़ते बीमार
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कात्याल ने बताया कि कोलोस्ट्रम पीने वाले बच्चों में तेजी से एंटीबॉडी बनती हैं। इसके पीने से पेट रोग, सांस रोग समेत कई बीमारियों से बचाव होता है। ओपीडी में आने वाले बच्चों की माता से पता चला कि जिन बच्चों ने कोलोस्ट्रम नहीं पीया, वह जल्दी-जल्दी बीमार पड़े और इसको पीने वाले बच्चे ज्यादा तंदुरुस्त मिले।पीले गाढ़े दूध के ये हैं फायदे
- शिशु को पीलिया होने से बचाता है।
- सांस, निमोनिया और पेट के संक्रमण से बचाता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होती है।
- तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है, संक्रमण से भी बचाव।
- प्रसव बाद नवजात के मल त्याग में सहायक।
- जिंक, कैल्शियम, विटामिन ए, बी-6 की भरपूर मात्रा।
- शिशु का शारीरिक, मानसिक विकास भी तेजी से होता।