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अंडरपास के निर्माण में पेंच फंसने से लोग परेशान
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:27 PM IST
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अंडरपास के निर्माण में पेंच फंसने से लोग परेशान
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। नदरई रेलवे पुल का काम रेलवे की जिद में उलझा हुआ है। प्रस्ताव के बाद रेलवे ने पांच करोड़ रुपये भी ले लिए और अंडर पास का काम भी शुरू नहीं कराया। रेल अधिकारी यहां ओवरब्रिज की जिद पर अड़े हुए हैं, हालांकि सिक्सलेन के संकेत मिलने से रेलवे को राहत मिली है। रेलवे का मानना है कि सिक्सलेन बना तो फिर से प्रस्ताव तैयार होगा और अब ओवरब्रिज की ही सहमति दी जाएगी।
जिले से जिले को जोड़ने की योजना के तहत कासगंज एटा के बीच 320 करोड़ रुपये की लागत से काम शुरू हुआ। 30 किलोमीटर के दायरे में होने वाले काम में बांकनेर और नदरई रेलपुल पर रेलवे से सहमति मांगी गई। पहले तो रेलवे ने दोनों पुलों पर अंडरपास की सहमति दे दी बाद में ओवरब्रिज की जिद पर अड़ गया। लोक निर्माण विभाग अंडरपास के लिए एस्टिमेट तैयार कर सरकार से स्वीकृति ले चुका था और 5 करोड़ रुपये रेलवे को भी दे दिए थे। लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में बांकनेर पर अंडरपास को हरी झंडी मिल गई, लेकिन रेलवे का मानना था कि यदि नदरई पर अंडरपास का कार्य कराया गया तो कासगंज-मथुरा रेल लाइन काफी दिनों तक बंद रहेगी और राजस्व हानि होगी जो भी रहा रेलवे ने काम शुरू नहीं कराया। फिर संकेत मिले की अब फोरलेन नहीं बल्कि इस मार्ग पर एनएचएआई काम कराएगी और यह सिक्सलेन होगा। ऐसे में रेलवे ने राहत ली। अधिकारियों ने माना है कि जब सिक्सलेन बनेगा तो एनएचएआई नए सिरे से प्रस्ताव मांगेगी फिर सिर्फ ओवरब्रिज की सहमति दी जाएगी। विवाद और चौड़ीकरण के बीच नदरई रेलपुल पर ओवरब्रिज और अंडरपास का काम लटका हुआ है।
लोगों की बात
यदि रेलवे अपनी जिद पर अड़ा रहा और ओवरब्रिज बनाया गया तो नदरई का विकास ठहर जाएगा। तमाम लोगों के आशियाने उजड़ जाएंगे यहां अंडरपास बनना चाहिए- सुनील कुमार।
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अंडरपास से लोगों को समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। ओवरब्रिज बड़ा दायरा घेरेगा। ओवरब्रिज से विकास पर विराम लगना तय है- केशव।
- रेलवे नदरई पुल पर अंडरपास नहीं बना सकती क्योंकि वहां रेल लाइन ब्लॉक करनी होगी। यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और रेलवे को राजस्व हानि होगी। सिक्सलेन बनेगा तो रेलवे ओवरब्रिज की सहमति देगा। राजेंद्र सिंह, पीआरओ।
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जिले से जिले को जोड़ने की योजना के तहत कासगंज एटा के बीच 320 करोड़ रुपये की लागत से काम शुरू हुआ। 30 किलोमीटर के दायरे में होने वाले काम में बांकनेर और नदरई रेलपुल पर रेलवे से सहमति मांगी गई। पहले तो रेलवे ने दोनों पुलों पर अंडरपास की सहमति दे दी बाद में ओवरब्रिज की जिद पर अड़ गया। लोक निर्माण विभाग अंडरपास के लिए एस्टिमेट तैयार कर सरकार से स्वीकृति ले चुका था और 5 करोड़ रुपये रेलवे को भी दे दिए थे। लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में बांकनेर पर अंडरपास को हरी झंडी मिल गई, लेकिन रेलवे का मानना था कि यदि नदरई पर अंडरपास का कार्य कराया गया तो कासगंज-मथुरा रेल लाइन काफी दिनों तक बंद रहेगी और राजस्व हानि होगी जो भी रहा रेलवे ने काम शुरू नहीं कराया। फिर संकेत मिले की अब फोरलेन नहीं बल्कि इस मार्ग पर एनएचएआई काम कराएगी और यह सिक्सलेन होगा। ऐसे में रेलवे ने राहत ली। अधिकारियों ने माना है कि जब सिक्सलेन बनेगा तो एनएचएआई नए सिरे से प्रस्ताव मांगेगी फिर सिर्फ ओवरब्रिज की सहमति दी जाएगी। विवाद और चौड़ीकरण के बीच नदरई रेलपुल पर ओवरब्रिज और अंडरपास का काम लटका हुआ है।
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लोगों की बात
यदि रेलवे अपनी जिद पर अड़ा रहा और ओवरब्रिज बनाया गया तो नदरई का विकास ठहर जाएगा। तमाम लोगों के आशियाने उजड़ जाएंगे यहां अंडरपास बनना चाहिए- सुनील कुमार।
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अंडरपास से लोगों को समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। ओवरब्रिज बड़ा दायरा घेरेगा। ओवरब्रिज से विकास पर विराम लगना तय है- केशव।
- रेलवे नदरई पुल पर अंडरपास नहीं बना सकती क्योंकि वहां रेल लाइन ब्लॉक करनी होगी। यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और रेलवे को राजस्व हानि होगी। सिक्सलेन बनेगा तो रेलवे ओवरब्रिज की सहमति देगा। राजेंद्र सिंह, पीआरओ।