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अब अपने लाडलों को टीबी से बचाएं

Wed, 18 Apr 2018 11:07 PM IST
Updated Wed, 18 Apr 2018 11:07 PM IST
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अब अपने लाडलों को टीबी से बचाएं
होम्योपैथी दवाएं
एटा। सावधान! आपके लाडले टीबी की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, यह रोग लाइलाज नहीं है, लेकिन थोड़ी सी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। टीबी रोग नवजात शिशुओं से लेकर किशोरों तक अपना पैर पसार रहा है। जिले में सबसे अधिक शीतलपुर ब्लॉक में टीबी के रोगी मिले हैं।
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उप क्षय रोग अधिकरी डॉ. गौरव यादव का कहना है कि बड़ों के साथ-साथ बच्चों में टीबी रोग काफी पनप रहा है। जनवरी में जब सरकार को आंकड़े भेजे गए तो वह काफी चौंकाने वाला था। इसे देखने के बाद फरवरी में एक्टिव केस फाइल (एसीएफ) अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसे लेकर 25 फरवरी से 10 मार्च तक अभियान चलाया गया, जिसमें 198 नए केस सामने आए। हैरानीजनक यह रहा कि इनमें बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा थी।
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टीबी रोगी से बच्चों को दूर रखें
चिकित्सकों का कहना है कि टीबी से ग्रसित व्यक्ति से बच्चों को दूर रखना चाहिए। टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) को तपेदिक या क्षय रोग भी कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बच्चों पर सीधे हमला करती है। बच्चों के टीबी मरीज के संपर्क में आने से उनमें तपेदिक का संक्रमण तेजी से फैलता है। फेफड़ों व सांस लेने में परेशानी होने लगती है। दूसरी ओर, बच्चों के अंग बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए टीबी का प्रभाव उन पर जल्दी हो जाता है।
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दो लाख में 198 टीबी मरीज मिले
जिले में कुल जनसंख्या के 20 फीसदी यानी दो लाख लोगों को अभियान में शामिल किया गया। इनमें 198 लोग टीबी से ग्रसित मिले थे, जिसमें 160 पल्मोनरी फेफड़ों से संबंधित टीबी के केस और 38 एक्स्ट्रा पल्मोनरी के केस पाए गए। बच्चों को टीबी रोग से बचाव के लिए आईएनएच टैबलेट उपलब्ध कराई गई है।

महत्वपूर्ण बाक्स...............
10 साल तक के बच्चों में 5 तरह की टीबी
उप क्षय रोग अधिकारी डॉ. गौरव यादव ने बताया कि नवजात शिशुओं व 10 वर्ष तक के बच्चों में पांच तरह की टीबी पाई जाती है, जिसमें प्राइमरी कांप्लेक्स, बाल टीबी, प्रोग्रेसिव प्राइमरी टीबी, मिलियरी टीबी (गंभीर किस्म) दिमाग की टीबी और हड्डी टीबी शामिल हैं।

- बच्चों में टीबी के लक्षण
चिकित्सकों का कहना है कि बार-बार खांसी आना, लंबे समय तक खांसी बने रहना, बुखार आने के बाद लंबे समय रहना, वजन कम होना, बच्चा आलसी व सुस्त रहना, त्वचा में बार-बार परिवर्तन होना मुख्य रूप से बच्चों में टीबी रोग के लक्षण हैं।
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फिर बढ़ा मरीजों को ग्राफ
साल 2016 व 2017 के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग को जरूर राहत पहुंचाई है, लेकिन 2018 के तिमाही आंकड़ों पर नजर डालें तो तीन महीनों में ही 210 मरीजों की संख्या वर्ष 2016 और 2017 से ज्यादा है। इससे साफ है कि टीबी मरीजों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

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आंकड़ों पर नजर
साल मरीज
2016 2468 टीबी रोगी
2017 2377 टीबी रोगी
2018 प्रथम तिमाही में 786
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रोगी ब्लॉक
524 शीतलपुर
495 अलीगंज
303 जैथरा
243 मारहरा
236 जलेसर
207 निधौली कलां
201 सकीट
164 अवागढ़
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वर्जन
पिछले दिनों टीबी मरीजों को चिन्हित किए जाने के लिए अभियान चलाया गया था। इसमें मिले 198 मरीजों में से बच्चों की संख्या सबसे अधिक पाई गई। टीबी मरीजों के पास बच्चों के अधिक समय तक रहने की वजह से अब बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में रहे हैं। जरूरी है कि समय से दवा खाकर टीबी का इलाज कराएं।
-डॉ. गौरव यादव, उप क्षय रोग अधिकरी
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