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सुप्रीम कोर्ट से भी ब्लाक प्रमुख को लगा झटका
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:34 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। ब्लाक प्रमुख घिरोर सरिता यादव को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। हाईकोर्ट से हुए आदेश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने खारिज कर दी है। अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान की गणना पारदर्शिता के साथ पूरी कराने का आदेश डीएम को दिया है।
घिरोर ब्लाक प्रमुख सरिता यादव के खिलाफ 63 बीडीसी सदस्यों ने बीडीसी सदस्य सत्यपाल सिंह यादव के नेतृत्व में नौ अगस्त 2017 को शपथपत्रों सहित प्रार्थनापत्र देकर अविश्वास जताते हुए क्षेत्र पंचायत समिति की बैठक बुलाने की मांग की थी। तत्कालीन डीएम यशवंत राव ने बैठक बुलाने तथा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए चार सितंबर 2017 की तिथि निर्धारित की। चार सितंबर को हुए मतदान में क्षेत्र पंचायत समिति के 86 सदस्यों में से 63 सदस्यों ने ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास जताते हुए मतदान किया। मतदान प्रक्रिया में धांधली बरते जाने का आरोप लगाते हुए ब्लाक प्रमुख ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। इसके बाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख सरिता यादव ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मतदान प्रक्रिया को चुनौती दी।
सर्वोच्च न्यायालय ने नौ जनवरी 2018 की तिथि अंतिम सुनवाई के लिए तय करके जिला जज के न्यायालय में 14 दिसंबर को सभी बीडीसी सदस्यों की मौजूदगी में उनके हस्ताक्षर, पहचान पत्र के साथ मतदान प्रक्रिया की पुष्टि कराने के निर्देश दिए थे। 14 दिसंबर को ब्लाक क्षेत्र पंचायत घिरोर के 86 सदस्यों ने कड़ी सुरक्षा में जिला जज नंदलाल के न्यायालय में मतदान प्रक्रिया की पुष्टि की। जिला जज ने पूरी पत्रावली सर्वोच्च न्यायालय में भेज दी।
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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर एक में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस चंद्रचूड तथा जस्टिस खान बिलेकर की पीठ ने ब्लाक प्रमुख सरिता यादव की याचिका खारिज कर दी है। अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान की गणना पूरी पारदर्शिता के साथ वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर करने के निर्देश डीएम को दिए हैं।
घिरोर ब्लाक प्रमुख सरिता यादव के खिलाफ 63 बीडीसी सदस्यों ने बीडीसी सदस्य सत्यपाल सिंह यादव के नेतृत्व में नौ अगस्त 2017 को शपथपत्रों सहित प्रार्थनापत्र देकर अविश्वास जताते हुए क्षेत्र पंचायत समिति की बैठक बुलाने की मांग की थी। तत्कालीन डीएम यशवंत राव ने बैठक बुलाने तथा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए चार सितंबर 2017 की तिथि निर्धारित की। चार सितंबर को हुए मतदान में क्षेत्र पंचायत समिति के 86 सदस्यों में से 63 सदस्यों ने ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास जताते हुए मतदान किया। मतदान प्रक्रिया में धांधली बरते जाने का आरोप लगाते हुए ब्लाक प्रमुख ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। इसके बाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख सरिता यादव ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मतदान प्रक्रिया को चुनौती दी।
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सर्वोच्च न्यायालय ने नौ जनवरी 2018 की तिथि अंतिम सुनवाई के लिए तय करके जिला जज के न्यायालय में 14 दिसंबर को सभी बीडीसी सदस्यों की मौजूदगी में उनके हस्ताक्षर, पहचान पत्र के साथ मतदान प्रक्रिया की पुष्टि कराने के निर्देश दिए थे। 14 दिसंबर को ब्लाक क्षेत्र पंचायत घिरोर के 86 सदस्यों ने कड़ी सुरक्षा में जिला जज नंदलाल के न्यायालय में मतदान प्रक्रिया की पुष्टि की। जिला जज ने पूरी पत्रावली सर्वोच्च न्यायालय में भेज दी।
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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर एक में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस चंद्रचूड तथा जस्टिस खान बिलेकर की पीठ ने ब्लाक प्रमुख सरिता यादव की याचिका खारिज कर दी है। अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान की गणना पूरी पारदर्शिता के साथ वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर करने के निर्देश डीएम को दिए हैं।