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किसी की शादी रद्द तो किसी की पत्नी गई मायके
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:30 PM IST
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शिक्षामित्र
- फोटो : amar ujala
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एक फैसले ने उनके जीवन मेें परेशानियां बढ़ा दीं। किसी की शादी टूट गई, तो किसी का घर-आंगन सूना हो गया। साथ ही बैंक से लिया कर्ज चुकाने की मुश्किल ने शिक्षामित्रों को तनाव में कर दिया है। एक ओर जहां धरना-प्रदर्शन से शिक्षामित्र नौकरी बचाने की जुगत लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर फैसले के बाद उनके रिश्ते और सपने टूटते जा रहे हैं।
अलीगंज क्षेत्र में कार्यरत एक शिक्षामित्र की शादी मैनपुरी में तय हो गई थी। सगाई का कार्यक्रम भी पिछले महीने ही संपन्न हुआ था और नवंबर में शादी की तारीख तय करने की चर्चा चल रही थी। जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, तो अरमान टूट गए। आलम यह है कि अब लड़के वाले फोन ही नहीं उठा रहे हैं।
जैथरा क्षेत्र में एक शिक्षामित्र का कोर्ट का फैसला आने के बाद पत्नी से तकरार हुई। शिक्षामित्र ने बहुत समझाया, कि जल्द ही सब सही हो जाएगा, लेकिन पत्नी मायके चली गई। अब फोन कर रहे हैं, तो पत्नी फोन नहीं उठा रही।
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जिले के शिक्षामित्र संगठन के प्रमुख नेता का किस्सा भी अलग है। शिक्षामित्र ने समायोजन के बाद घर बनवाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। प्लाट बनवाकर नींव भरवा दी। मकान का निर्माण शुरू कराने की तैयारी थी, लेकिन कोर्ट के फैसले ने सब अरमान चूर कर दिए।
अब कैसे चुकाएंगे कर्ज
समायोजन के बाद सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों के आगे सबसे बड़ी समस्या बैंक कर्ज चुकाने की है। दरअसल, कई शिक्षामित्रों ने विभिन्न कार्यों के लिए बैंक से कर्ज लिया था। अब कर्ज चुकाना उनके लिए मुसीबत बन रहा है।
शिक्षामित्र नेता राजेश गुप्ता कहते हैं कि कुछ प्रधानाध्यापक शिक्षामित्रों पर स्कूल आने के लिए दबाव बना रहे हैं। मगर शिक्षामित्र किस मुंह से विद्यालय जाएं? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सहायक अध्यापक नहीं मानता और हाइकोर्ट शिक्षामित्र। सरकार इस संबंध में आदेश जारी करे।
ये हैं आंकड़े
1700 शिक्षामित्र हुए हैं प्रभावित
1492 बन चुके हैं सहायक अध्यापक
208 शिक्षामित्र हैं असमायोजित
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एक फैसले ने उनके जीवन मेें परेशानियां बढ़ा दीं। किसी की शादी टूट गई, तो किसी का घर-आंगन सूना हो गया। साथ ही बैंक से लिया कर्ज चुकाने की मुश्किल ने शिक्षामित्रों को तनाव में कर दिया है। एक ओर जहां धरना-प्रदर्शन से शिक्षामित्र नौकरी बचाने की जुगत लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर फैसले के बाद उनके रिश्ते और सपने टूटते जा रहे हैं।
अलीगंज क्षेत्र में कार्यरत एक शिक्षामित्र की शादी मैनपुरी में तय हो गई थी। सगाई का कार्यक्रम भी पिछले महीने ही संपन्न हुआ था और नवंबर में शादी की तारीख तय करने की चर्चा चल रही थी। जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, तो अरमान टूट गए। आलम यह है कि अब लड़के वाले फोन ही नहीं उठा रहे हैं।
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जैथरा क्षेत्र में एक शिक्षामित्र का कोर्ट का फैसला आने के बाद पत्नी से तकरार हुई। शिक्षामित्र ने बहुत समझाया, कि जल्द ही सब सही हो जाएगा, लेकिन पत्नी मायके चली गई। अब फोन कर रहे हैं, तो पत्नी फोन नहीं उठा रही।
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जिले के शिक्षामित्र संगठन के प्रमुख नेता का किस्सा भी अलग है। शिक्षामित्र ने समायोजन के बाद घर बनवाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। प्लाट बनवाकर नींव भरवा दी। मकान का निर्माण शुरू कराने की तैयारी थी, लेकिन कोर्ट के फैसले ने सब अरमान चूर कर दिए।
अब कैसे चुकाएंगे कर्ज
समायोजन के बाद सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों के आगे सबसे बड़ी समस्या बैंक कर्ज चुकाने की है। दरअसल, कई शिक्षामित्रों ने विभिन्न कार्यों के लिए बैंक से कर्ज लिया था। अब कर्ज चुकाना उनके लिए मुसीबत बन रहा है।
शिक्षामित्र नेता राजेश गुप्ता कहते हैं कि कुछ प्रधानाध्यापक शिक्षामित्रों पर स्कूल आने के लिए दबाव बना रहे हैं। मगर शिक्षामित्र किस मुंह से विद्यालय जाएं? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सहायक अध्यापक नहीं मानता और हाइकोर्ट शिक्षामित्र। सरकार इस संबंध में आदेश जारी करे।
ये हैं आंकड़े
1700 शिक्षामित्र हुए हैं प्रभावित
1492 बन चुके हैं सहायक अध्यापक
208 शिक्षामित्र हैं असमायोजित