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मेयर और पार्षदों का कार्यकाल बढ़ा
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:32 PM IST
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आगरा। प्रदेश सरकार ने मेयर और पार्षदों के कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब उनका कार्यकाल शपथ ग्रहण के बाद पहली बैठक होने तक रहेगा। इस आधार पर आगरा नगर निगम के पार्षदों और मेयर को करीब पांच अगस्त तक पद पर बने रहने का अधिकार मिल गया है।
स्थानीय निकाय के चुनाव न हो पाने और वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने पर शासन ने निकायों के कार्यों के प्रबंधन के लिए व्यवस्था तय की है। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश की ओर जारी निर्देशों के मुताबिक निकायों की कार्यावधि की गणना उनके गठन के बाद शपथ ग्रहण की तारीख के बाद पहली बैठक की तिथि से की जाएगी।
इस आधार पर आगरा नगर निगम में के पार्षद और मेयर की शपथ ग्रहण 16 जुलाई को हुई थी। सदन की पहली बैठक पांच अगस्त को बुलाई थी। शासन की ओर से जारी निर्देशों को मुताबिक उनका कार्यकाल पांच अगस्त को समाप्त होगा। शासन ने यह भी कहा कि कार्य अवधि समाप्त होेने के पश्चात नगर आयुक्त को नगर निगम और अधिशासी अधिकारी को नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों दायित्व सौंप दिया जाएगा।
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निकाय की कार्यकारिणी समिति बहुमत के आधार पर नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को परामर्श दे सकेगी। यह समिति नागरिकों को दी जाने वाली नागरिक सुविधाओं को पर्यवेक्षण भी करेगी। ऐसा करने पर कार्यकारिणी के सदस्यों को पारिश्रमिक, वेतन या भत्ता देय नहीं होगा।
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स्थानीय निकाय के चुनाव न हो पाने और वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने पर शासन ने निकायों के कार्यों के प्रबंधन के लिए व्यवस्था तय की है। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश की ओर जारी निर्देशों के मुताबिक निकायों की कार्यावधि की गणना उनके गठन के बाद शपथ ग्रहण की तारीख के बाद पहली बैठक की तिथि से की जाएगी।
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इस आधार पर आगरा नगर निगम में के पार्षद और मेयर की शपथ ग्रहण 16 जुलाई को हुई थी। सदन की पहली बैठक पांच अगस्त को बुलाई थी। शासन की ओर से जारी निर्देशों को मुताबिक उनका कार्यकाल पांच अगस्त को समाप्त होगा। शासन ने यह भी कहा कि कार्य अवधि समाप्त होेने के पश्चात नगर आयुक्त को नगर निगम और अधिशासी अधिकारी को नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों दायित्व सौंप दिया जाएगा।
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निकाय की कार्यकारिणी समिति बहुमत के आधार पर नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को परामर्श दे सकेगी। यह समिति नागरिकों को दी जाने वाली नागरिक सुविधाओं को पर्यवेक्षण भी करेगी। ऐसा करने पर कार्यकारिणी के सदस्यों को पारिश्रमिक, वेतन या भत्ता देय नहीं होगा।