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दुकानों पर ताले, राशन के पड़े लाले
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:15 PM IST
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दुकानों पर ताले, राशन के पड़े लाले
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिले में राशन वितरण प्रणाली खतरे में है। दुकानों पर ताले पड़े हैं, तो गरीब राशन के लिए भटक रहे हैं। राशन नहीं मिलने से गरीबों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। वहीं राशन वितरण में हो रही धांधली को लेकर आए दिन शिकायतें सामने आ रही हैं, मगर जिला प्रशासन डीलरों की मनमानी पर अंकुश लगाने में नाकाम है। आलम यह हो चला है कि गांवों में राशन के लिए लोग भटक रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
जिले में कुल 790 राशन दुकानें हैं। जिनमें से 75 दुकानें नगर क्षेत्र और 715 दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती हैं। इन दुकानों पर हर महीने गरीबों को सरकारी दर पर सस्ता राशन उपलब्ध कराने का दावा सरकार करती है, लेकिन असल में यह राशन गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है। आलम यह हो चला है कि राशन की दुकानों पर अधिकांश समय ताले लटके रहते हैं और कार्ड धारक मायूस होकर लौट जाते हैं। राशन को सही ढंग से वितरण कराने के लिए पूर्ति विभाग ने 10-10 दुकानों पर पर्यवेक्षण अधिकारियों की तैनाती की है, लेकिन किसी भी दुकान पर पर्यवेक्षण अधिकारी मौजूद नजर नहीं आते।
बायोमीट्रिक मशीन भी गायब
जिले में पूर्ति विभाग ने हर दुकान पर बायोमीट्रिक मशीन लगाने का दावा किया है। लेकिन तमाम दुकानों पर बायोमीट्रिक मशीनें नजर नहीं आतीं। ऐसे में राशन में गोलमाल होता है।
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जलेसर क्षेत्र का हाल खराब
जिले में जलेसर क्षेत्र का हाल सबसे ज्यादा खराब है। नगर में राशन को लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है, लेकिन स्थिति सुधर नहीं पा रही है। आलम यह है कि नगर में अधिकांश दुकानें बंद ही रहती हैं। इसे लेकर लोगों में आक्रोश है।
84 फीसदी आधार हो चुके फीड
जिले में इन दिनों राशन यूनिटों को आधार से लिंक किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि 84 फीसदी यूनिटों को आधार से लिंक किया जा चुका है। जिले में 1080078 राशन यूनिटों के सापेक्ष 915653 यूनिट आधार से लिंक हो चुकी हैं।
लोग कहते हैं
हमारी ग्राम पंचायत में राशन की दुकान कभी खुलती ही नहीं है। डीलर मनमानी करते हैं। कई बार विवाद भी हो चुका है।
दिनेश
राशन की दुकानों का जिले में बुरा हाल है। आधार कार्ड देने के लिए दुकान पर गए थे, मगर ताला लटका था।
विनोद
राशन की दुकान से राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन राशन दुकान से मायूस लौटना पड़ता है।
सुनील कुमार
राशन की तो पूछो ही मत। दुकान खुलती नहीं है। डीलर मनमानी करते हैं। प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता।
होरीलाल
जिले में सरकारी गेहूं और चावल मिलना सपने जैसा है। दुकानों पर ताले रहते हैं। पता नहीं राशन जाता कहां है?
गुड्डी देवी
राशन की दुकान से गेहूं मिलता है, मगर वह भी इत्तिफाक है। अक्सर दुकान बंद ही रहती है।
श्रीकांति
दुकान पर आज तक वितरण तिथि का जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में जब भी जाते हैं दुकान पर ताला लगा मिलता है।
सुशीला देवी
पिछले साल थोड़ा बहुत राशन मिला भी था, लेकिन इस बार तो दुकान खुलती देखी ही नहीं है।
ब्रजपाल
इनका कहना है
साप्ताहिक बंदी के अलावा जिले में राशन दुकानों को प्रतिदिन खोलने के आदेश हैं। अगर दुकानें नहीं खुल रही हैं, तो कार्ड धारक शिकायत करें, सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर गरीब को राशन दिया जाएगा।
आरके मिश्रा, डीएसओ
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जिले में कुल 790 राशन दुकानें हैं। जिनमें से 75 दुकानें नगर क्षेत्र और 715 दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती हैं। इन दुकानों पर हर महीने गरीबों को सरकारी दर पर सस्ता राशन उपलब्ध कराने का दावा सरकार करती है, लेकिन असल में यह राशन गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है। आलम यह हो चला है कि राशन की दुकानों पर अधिकांश समय ताले लटके रहते हैं और कार्ड धारक मायूस होकर लौट जाते हैं। राशन को सही ढंग से वितरण कराने के लिए पूर्ति विभाग ने 10-10 दुकानों पर पर्यवेक्षण अधिकारियों की तैनाती की है, लेकिन किसी भी दुकान पर पर्यवेक्षण अधिकारी मौजूद नजर नहीं आते।
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बायोमीट्रिक मशीन भी गायब
जिले में पूर्ति विभाग ने हर दुकान पर बायोमीट्रिक मशीन लगाने का दावा किया है। लेकिन तमाम दुकानों पर बायोमीट्रिक मशीनें नजर नहीं आतीं। ऐसे में राशन में गोलमाल होता है।
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जलेसर क्षेत्र का हाल खराब
जिले में जलेसर क्षेत्र का हाल सबसे ज्यादा खराब है। नगर में राशन को लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है, लेकिन स्थिति सुधर नहीं पा रही है। आलम यह है कि नगर में अधिकांश दुकानें बंद ही रहती हैं। इसे लेकर लोगों में आक्रोश है।
84 फीसदी आधार हो चुके फीड
जिले में इन दिनों राशन यूनिटों को आधार से लिंक किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि 84 फीसदी यूनिटों को आधार से लिंक किया जा चुका है। जिले में 1080078 राशन यूनिटों के सापेक्ष 915653 यूनिट आधार से लिंक हो चुकी हैं।
लोग कहते हैं
हमारी ग्राम पंचायत में राशन की दुकान कभी खुलती ही नहीं है। डीलर मनमानी करते हैं। कई बार विवाद भी हो चुका है।
दिनेश
राशन की दुकानों का जिले में बुरा हाल है। आधार कार्ड देने के लिए दुकान पर गए थे, मगर ताला लटका था।
विनोद
राशन की दुकान से राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन राशन दुकान से मायूस लौटना पड़ता है।
सुनील कुमार
राशन की तो पूछो ही मत। दुकान खुलती नहीं है। डीलर मनमानी करते हैं। प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता।
होरीलाल
जिले में सरकारी गेहूं और चावल मिलना सपने जैसा है। दुकानों पर ताले रहते हैं। पता नहीं राशन जाता कहां है?
गुड्डी देवी
राशन की दुकान से गेहूं मिलता है, मगर वह भी इत्तिफाक है। अक्सर दुकान बंद ही रहती है।
श्रीकांति
दुकान पर आज तक वितरण तिथि का जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में जब भी जाते हैं दुकान पर ताला लगा मिलता है।
सुशीला देवी
पिछले साल थोड़ा बहुत राशन मिला भी था, लेकिन इस बार तो दुकान खुलती देखी ही नहीं है।
ब्रजपाल
इनका कहना है
साप्ताहिक बंदी के अलावा जिले में राशन दुकानों को प्रतिदिन खोलने के आदेश हैं। अगर दुकानें नहीं खुल रही हैं, तो कार्ड धारक शिकायत करें, सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर गरीब को राशन दिया जाएगा।
आरके मिश्रा, डीएसओ