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गुस्साएं परिजनों ने ढाई घंटे रखा अलीगंज मार्ग जाम
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:10 AM IST
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गुस्साएं परिजनों ने ढाई घंटे रखा अलीगंज मार्ग जाम
- फोटो : etah news
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एटा।
बलात्कार व हत्या के आरोपी को सरेआम चौराहे पर फांसी देने की मांग को लेकर पीड़िता के परिजनों ने एटा-अलीगंज मार्ग पर बच्ची का शव रखकर जाम लगा दिया। गुस्साई भीड़ को समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी व नेताओं ने काफी प्रयास किया, लेकिन सब विफल रहे। ढाई घंटे जाम के बाद मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी अमित किशोर ने लिखित रुप से पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने के आश्वासन पर परिजन माने। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतार लग गई।
कोतवाली देहात क्षेत्र में आठ वर्षीय मासूम के साथ बलात्कार व हत्या किये जाने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। बच्ची के साथ हुई दरिदंगी की खबर पाते ही पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस के आला अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी रात में ही पहुंच गए। बच्ची की लाश का पंचनामा की कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल लाकर सुबह साढ़े नौ बजे शव परिजनों को सौंप दिया था।
सैकड़ों की भीड़ के साथ परिजन शव को दफनाने के लिए ले जा रहे थे। इस दौरान भारी पुलिस बल व एसडीएम सदर/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर भी मौजूद थे। अचानक परिजनों में गुस्सा भड़क गया और उन्होंने मंगलवार सुबह 10 बजे अलीगंज रोड पर जाम लगा गया। भीड़ की मांग थी कि हत्यारे को चौराहे पर लाकर फांसी दी जाए या उसे गोली मार दी जाए।
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सीओ सदर गुरमीत सिंह व एसडीएम सदर ने परिजनों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने दो घंटे तक अपनी मांग को लेकर जाम लगाए रखा। इस बीच भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश वरिष्ठ, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, सदर विधायक विपिन डेविड वर्मा की पत्नी प्रेमलता वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौब सिंह धनगर ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई बात नहीं बनी। मगर परिजनों का एक ही कहना था कि पहले हत्यारे को लाओ और फांसी पर लटकाओ तभी कोई बात होगी।
दोपहर करीब 12 बजे पीड़ित परिवार को सरकार से मुआवजा दिलाने की बात शुरू हुई तो एसडीएम सदर ने डीएम व शासन स्तर पर बात करने के बाद पहले सात लाख रुपये मुआवजा के रूप में दिलाने का आश्वासन दिया। इतनी रकम मुआवजे के रूप में लेने को पीड़ित परिवार तैयार नहीं हुआ तो फिर डीएम से बात की गई। इस पर परिजन डीएम को मौके पर आने व मुआवजा राशि 10 रूपये देने की बात पर अड़ गए।
आपको बता दें कि डीएम व एसएसपी बच्ची के पोस्टमार्टम के बाद अलीगंज में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में चले गए थे। जब जाम नहीं खुला तो डीएम और एसएसपी करीब 12.15 बजे जाम स्थल पर पहुंचे और बच्ची के पिता से बात करने के बाद लिखित में 10 लाख का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने जाम खोला।
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बलात्कार व हत्या के आरोपी को सरेआम चौराहे पर फांसी देने की मांग को लेकर पीड़िता के परिजनों ने एटा-अलीगंज मार्ग पर बच्ची का शव रखकर जाम लगा दिया। गुस्साई भीड़ को समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी व नेताओं ने काफी प्रयास किया, लेकिन सब विफल रहे। ढाई घंटे जाम के बाद मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी अमित किशोर ने लिखित रुप से पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने के आश्वासन पर परिजन माने। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतार लग गई।
कोतवाली देहात क्षेत्र में आठ वर्षीय मासूम के साथ बलात्कार व हत्या किये जाने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। बच्ची के साथ हुई दरिदंगी की खबर पाते ही पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस के आला अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी रात में ही पहुंच गए। बच्ची की लाश का पंचनामा की कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल लाकर सुबह साढ़े नौ बजे शव परिजनों को सौंप दिया था।
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सैकड़ों की भीड़ के साथ परिजन शव को दफनाने के लिए ले जा रहे थे। इस दौरान भारी पुलिस बल व एसडीएम सदर/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर भी मौजूद थे। अचानक परिजनों में गुस्सा भड़क गया और उन्होंने मंगलवार सुबह 10 बजे अलीगंज रोड पर जाम लगा गया। भीड़ की मांग थी कि हत्यारे को चौराहे पर लाकर फांसी दी जाए या उसे गोली मार दी जाए।
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सीओ सदर गुरमीत सिंह व एसडीएम सदर ने परिजनों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने दो घंटे तक अपनी मांग को लेकर जाम लगाए रखा। इस बीच भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश वरिष्ठ, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, सदर विधायक विपिन डेविड वर्मा की पत्नी प्रेमलता वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौब सिंह धनगर ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई बात नहीं बनी। मगर परिजनों का एक ही कहना था कि पहले हत्यारे को लाओ और फांसी पर लटकाओ तभी कोई बात होगी।
दोपहर करीब 12 बजे पीड़ित परिवार को सरकार से मुआवजा दिलाने की बात शुरू हुई तो एसडीएम सदर ने डीएम व शासन स्तर पर बात करने के बाद पहले सात लाख रुपये मुआवजा के रूप में दिलाने का आश्वासन दिया। इतनी रकम मुआवजे के रूप में लेने को पीड़ित परिवार तैयार नहीं हुआ तो फिर डीएम से बात की गई। इस पर परिजन डीएम को मौके पर आने व मुआवजा राशि 10 रूपये देने की बात पर अड़ गए।
आपको बता दें कि डीएम व एसएसपी बच्ची के पोस्टमार्टम के बाद अलीगंज में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में चले गए थे। जब जाम नहीं खुला तो डीएम और एसएसपी करीब 12.15 बजे जाम स्थल पर पहुंचे और बच्ची के पिता से बात करने के बाद लिखित में 10 लाख का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने जाम खोला।