{"_id":"5aafb7a14f1c1bc4758b6365","slug":"171521465249-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रचार-प्रसार के नाम पर लाखों खर्च, नहीं बदले हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रचार-प्रसार के नाम पर लाखों खर्च, नहीं बदले हालात
Updated Mon, 19 Mar 2018 07:01 PM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। शासन द्वारा पर्यावरण की रक्षा के लिए बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन योजना का शुभारंभ किया गया है। इसके प्रचार-प्रसार पर ही लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। योजना को प्रभावी बनाने के लिए हर माह स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी इस व्यवस्था पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इससे शासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आता है।
पर्यावरण में प्रदूषण समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहा है। पर्यावरण को प्रदूषित करने में अस्पताल सबसे बड़ी दिक्कत हैं। अस्पतालों से निकलने वाला बायोमेडिकल कचरा समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस खतरे से निपटने के लिए ही विभाग ने बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन योजना का शुभारंभ किया है। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्टेज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में लाल, पीले व काले बैग तथा डिब्बे रखवाए गए हैं।
इन डिब्बों में अलग-अलग प्रकार कार कचरा डालने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कचरा को अलग-अलग नहंी डाल रहे हैं। डिब्बे व थैले में कचरा डालने के लिए हर माह प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण में लाखो रुपये खाने और कार्यक्रम के नाम पर खर्च होत हैं। विभागीय लापरवाही के कारण शासन की मंशा पूरी होती नजर नहीं आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पर्यावरण में प्रदूषण समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहा है। पर्यावरण को प्रदूषित करने में अस्पताल सबसे बड़ी दिक्कत हैं। अस्पतालों से निकलने वाला बायोमेडिकल कचरा समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस खतरे से निपटने के लिए ही विभाग ने बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन योजना का शुभारंभ किया है। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्टेज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में लाल, पीले व काले बैग तथा डिब्बे रखवाए गए हैं।
विज्ञापन
इन डिब्बों में अलग-अलग प्रकार कार कचरा डालने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कचरा को अलग-अलग नहंी डाल रहे हैं। डिब्बे व थैले में कचरा डालने के लिए हर माह प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण में लाखो रुपये खाने और कार्यक्रम के नाम पर खर्च होत हैं। विभागीय लापरवाही के कारण शासन की मंशा पूरी होती नजर नहीं आ रही है।
विज्ञापन