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निजी ट्रीटमेंट प्लांट लगा रहे उद्यमी
Updated Thu, 05 Oct 2017 08:11 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र
- फोटो : demo
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मथुरा। करीब दो दशक पहले औद्योगिक क्षेत्र में लगाए गए कॉमन इफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट से अब कारोबारी तौबा करने लगने है। भारी भरकम खर्चा उठाने में असहज उद्यमियों ने अपने निजी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की अनुमति मांगी है। वर्ष 1998 में यमुना कार्ययोजना के तहत इंडस्ट्रियल एरिया में कॉमन इफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था। इसमें 30 उद्योगों ने जुड़ने की सहमति जताई। वर्तमान में इस सीईटीपी से मात्र 11 उद्योग ही जुड़े है। शेष ने अपने अलग-अलग इटीपी लगा लिए। अब ये 11 उद्योग कॉमन इफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ने में असमर्थता जता रहे हैं। इनसे से करीब दस उद्यमियों ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में अपने निजी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की अनुमति मांगी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया उद्यमी ईटीपी लगाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
इसलिए हो रहा मोह भंग
मथुरा। 1998 में सीईटीपी की स्थापना हुई थी। तब इससे इंडस्ट्रियल एरिया के 30 उद्योग जुड़े हुए थे। जो घटकर अब 11 रह गए है। सीईटीपी संचालन का खर्चा अब ये ही उद्योग उठा रहे है जो महंगा साबित हो रहा है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने सीईटीपी पर पार्क विकसित करने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में उद्यमी अब सीईटीपी छोड़ अपने निजी ईटीपी लगाना चाह रहे हैं।
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इसलिए हो रहा मोह भंग
मथुरा। 1998 में सीईटीपी की स्थापना हुई थी। तब इससे इंडस्ट्रियल एरिया के 30 उद्योग जुड़े हुए थे। जो घटकर अब 11 रह गए है। सीईटीपी संचालन का खर्चा अब ये ही उद्योग उठा रहे है जो महंगा साबित हो रहा है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने सीईटीपी पर पार्क विकसित करने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में उद्यमी अब सीईटीपी छोड़ अपने निजी ईटीपी लगाना चाह रहे हैं।
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