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आस् था का प्रतीक है सोमेश्वर ना थ मंदिर
Updated Sun, 23 Jul 2017 11:55 PM IST
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भोगांव (मैनपुरी)। नगर का सोमेश्वर नाथ मंदिर बस्ती के दक्षिण में मोहल्ला कबीरगंज में स्थित है। मान्यता है कि यह मंदिर अति प्राचीन एवं सिद्ध स्थान है। इसकी प्राचीनता के विषय में अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं। यही कारण है कि सावन के अलावा सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
लोकोक्तियों के अनुसार एक बार एक राजा रथ में विशाल शिवलिंग को रखकर सेना के साथ सोमनाथ मंदिर के मार्ग से होकर जा रहे था। अचानक उसका रथ सोमनाथ मंदिर के निकट अटक गया। बहुत प्रयत्न करने पर भी रथ नहीं निकल सका। उलटे रथ के टूटने से शिवंलिग धरती पर गिर गया। ज्यों-ज्यों उसे उठाने का प्रयास किया वह स्वयं ही धरती में धंसता गया। कहा जाता है कि जब शिवलिंग के निकट की धरती को खोदकर जंजीरों से बांधकर चार हाथियों से खींचा गया तो जंजीरें टूट गईं और हाथी लहूलुहान हो गए किंतु शिवलिंग नहीं हट सका। तभी से वहां पर शिवलिंग स्थित है।
लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वत: ही कुछ समय पूर्व धरती से ऊपर आ गया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व समय में भोगांव नगर का नाम ही सोमनगर था। अंग्रेजों ने इसका नाम बदलकर भोगांव रख दिया। एक लोकोक्ति के अनुसार भोगांव का नाम यहां के तत्कालीन राजा भूमिपाल के नाम पर है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को सपने में देखा था। उसने उक्त स्थान पर मिट्टी हटाकर देखा तो सोमनाथ मंदिर निकला।
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सोमनाथ मंदिर नगर का सबसे प्राचीन व आस्था का केंद्र है। वर्ष भर मंदिर में आयोजन होते रहते हैं। नगर की प्रसिद्ध रामलीला का मंचन भी इसी मंदिर में होता है। वर्तमान सोमनाथ मंदिर परिसर में जगमोहन और दोनों ओर हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, श्रीराम दरबार, श्रीकृष्ण दरबार आदि स्थित हैं। वर्तमान में इसके सर्वराकार आयुर्वेदाचार्य ब्राह्मदत्त के पुत्र रामदत्त चतुर्वेदी हैं।
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लोकोक्तियों के अनुसार एक बार एक राजा रथ में विशाल शिवलिंग को रखकर सेना के साथ सोमनाथ मंदिर के मार्ग से होकर जा रहे था। अचानक उसका रथ सोमनाथ मंदिर के निकट अटक गया। बहुत प्रयत्न करने पर भी रथ नहीं निकल सका। उलटे रथ के टूटने से शिवंलिग धरती पर गिर गया। ज्यों-ज्यों उसे उठाने का प्रयास किया वह स्वयं ही धरती में धंसता गया। कहा जाता है कि जब शिवलिंग के निकट की धरती को खोदकर जंजीरों से बांधकर चार हाथियों से खींचा गया तो जंजीरें टूट गईं और हाथी लहूलुहान हो गए किंतु शिवलिंग नहीं हट सका। तभी से वहां पर शिवलिंग स्थित है।
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लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वत: ही कुछ समय पूर्व धरती से ऊपर आ गया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व समय में भोगांव नगर का नाम ही सोमनगर था। अंग्रेजों ने इसका नाम बदलकर भोगांव रख दिया। एक लोकोक्ति के अनुसार भोगांव का नाम यहां के तत्कालीन राजा भूमिपाल के नाम पर है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को सपने में देखा था। उसने उक्त स्थान पर मिट्टी हटाकर देखा तो सोमनाथ मंदिर निकला।
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सोमनाथ मंदिर नगर का सबसे प्राचीन व आस्था का केंद्र है। वर्ष भर मंदिर में आयोजन होते रहते हैं। नगर की प्रसिद्ध रामलीला का मंचन भी इसी मंदिर में होता है। वर्तमान सोमनाथ मंदिर परिसर में जगमोहन और दोनों ओर हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, श्रीराम दरबार, श्रीकृष्ण दरबार आदि स्थित हैं। वर्तमान में इसके सर्वराकार आयुर्वेदाचार्य ब्राह्मदत्त के पुत्र रामदत्त चतुर्वेदी हैं।