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पाली, पॉडल, नीमगांव, पानी नांय तीन गांव..
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पानी लेकर आती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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गोवर्धन (मथुरा)। कस्बा से सटे तीन किमी दूर आठ हजार की आबादी वाले गांव नीमगांव में आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं हुआ है। पुरानी कहावत पाली, पॉडल, नीमगांव पानी नांय तीन गांव आज के समय में पूूरी तरह चरितार्थ हो रही है। गांव की महिलाएं परेशान हैं। महिलाओं का कहना है कि पानी के संकट को देखते हुए पूरा जीवन निकल रहा है।
इन गांवों में महिलाएं डेढ़ किमी दूर से पीने का पानी लाती हैं। लोगों ने घरों में टैंक बनवा रखे हैं। टैंकों में 300 रुपये खर्च कर पानी की पूर्ति की जाती है। शासन-प्रशासन ने आज तक कोई इंतजाम नहीं किए हैं। ग्रामीण राजू शर्मा का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व पेयजल योजना की स्वीकृति हुई थी, लेकिन कागजों में ही दब कर रह गई। प्रधान योगेंद्र सिंह का कहना है कि दो वर्ष पूर्व पेयजल के लिए 2.67 करोड़ की योजना स्वीकृति हुई, जिसमें काम होना था, लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हुई।
पूरी जिंदगी पानी ढोने में निकल गई
गोवर्धन। नीमगांव की महिलाओं का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी पानी ढोने में ही निकल गई। गायत्री देवी का कहना है कि गर्मी में तीन से चार बार पानी लाना पड़ता है। मीना कहना है कि नेताओं को तो बस वोट की चिंता है। राधा ने कहा कि गांव का पानी खारी है। बंबे के किनारे हैंडपंप से पानी लाते हैं। सुनीता का कहना है कि वह 30 वर्ष से देख रही है कि अब पानी सरकार देगी, लेकिन कोई नहीं देता है।
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तीनों गांवों की ओर ध्यान नहीं है
गोवर्धन। विधानसभा क्षेत्र के नीमगांव, पॉडल एवं पाली तीन गांवों की ओर पेयजल को लेकर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं हैं। इन गांवों में पानी खारी है। पाली के जीआर शर्मा ने बताया कि फिलहाल टंकी का निर्माण चल रहा है। ट्यूबवेल से पानी पहुंच रहा है, जबकि पॉडल के जितेंद्र काला ने बताया कि स्वजल धारा योजना में लगी टंकी शोपीस बनी हुई हैं। नीमगांव में किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है।
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इन गांवों में महिलाएं डेढ़ किमी दूर से पीने का पानी लाती हैं। लोगों ने घरों में टैंक बनवा रखे हैं। टैंकों में 300 रुपये खर्च कर पानी की पूर्ति की जाती है। शासन-प्रशासन ने आज तक कोई इंतजाम नहीं किए हैं। ग्रामीण राजू शर्मा का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व पेयजल योजना की स्वीकृति हुई थी, लेकिन कागजों में ही दब कर रह गई। प्रधान योगेंद्र सिंह का कहना है कि दो वर्ष पूर्व पेयजल के लिए 2.67 करोड़ की योजना स्वीकृति हुई, जिसमें काम होना था, लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हुई।
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पूरी जिंदगी पानी ढोने में निकल गई
गोवर्धन। नीमगांव की महिलाओं का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी पानी ढोने में ही निकल गई। गायत्री देवी का कहना है कि गर्मी में तीन से चार बार पानी लाना पड़ता है। मीना कहना है कि नेताओं को तो बस वोट की चिंता है। राधा ने कहा कि गांव का पानी खारी है। बंबे के किनारे हैंडपंप से पानी लाते हैं। सुनीता का कहना है कि वह 30 वर्ष से देख रही है कि अब पानी सरकार देगी, लेकिन कोई नहीं देता है।
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