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डीएम ने 22 अधिकारियों का नवंबर माह का वेतन रोका
Updated Sat, 24 Nov 2018 10:47 PM IST
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एटा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाले जनसुनवाई पोर्टल की जिले के अफसरों ने धज्जियां उड़ा दी हैं। जिले में शिकायतों के निस्तारण की स्थिति पर शासन ने नाराजगी जताई है। शिकायतों के निस्तारण में डीपीआरओ सबसे पिछड़े हैं। डीएम ने शिकायतों का निस्तारण नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 22 अधिकारियों का नवंबर महीने का वेतन रोक दिया है।
प्रदेश सरकार ने जनता की समस्याओं को सुनने के लिए जनसुनवाई पोर्टल बनाया है। पोर्टल पर जिले से आए दिन दर्जनों की संख्या में शिकायतें पहुंचती हैं। इन्हें जिम्मेदार अधिकारियों को तय समय सीमा में निस्तारित करना होता है लेकिन जिले में जनसुनवाई पोर्टल महज दिखावा बनकर रह गया है। शिकायतों के निस्तारण को लेकर अधिकारी संजीदा नजर नहीं आते। इसके चलते बड़ी संख्या में शिकायतें समय सीमा से भी अधिक समय से लंबित हैं। शासन स्तर से नाराजगी जताने के बाद डीएम के निर्देश पर 22 अधिकारियों का वेतन रोका गया है। इनमें सबसे अधिक खराब स्थिति जिला पंचायत राज अधिकारी की है। एडीएम प्रशासन ने मामले में आदेश जारी कर सभी 22 अधिकारियों का वेतन रोकने की संस्तुति की है। जिस पर डीएम आईपी पांडेय ने मुहर लगा दी है।
डीपीआरओ नहीं देखते पोर्टल
जनसुनवाई को लेकर डीपीआरओ की स्थिति बेहद खराब है। इनके पास नौ शिकायतें आनलाइन और नौ शिकायत डीएम स्तर की लंबित पड़ी हैं। इससे साफ है कि डीपीआरओ को पोर्टल देखने का भी समय नहीं है।
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इनके रुके वेतन और लंबित शिकायतें
डीपीआरओ- 18, तहसीलदार अलीगंज 4, एआईजी स्टांप 2, जिला कृषि अधिकारी 2, सीएमएस 2, सहायक निबंधन आयुक्त 2, प्रभारी चिकित्साधिकारी अवागढ़ 2, एसडीएम अलीगंज, समाज कल्याण अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, ईओ नगर पालिका एटा, बीडीओ निधौलीकलां, प्रभारी चिकित्साधिकारी मारहरा, उप कृषि निदेशक, एक्सईएन सिंचाई, कृषि रक्षा अधिकारी, एडीओ अवागढ़, एडीओ जलेसर, एडीओ मारहरा, एडीओ सकीट, प्रभारी चिकित्साधिकारी निधौलीकलां, उपनिदेशक मंडी परिषद की एक-एक शिकायत शामिल है।
आईजीआरएस पर दर्ज शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाना है। आईजीआरएस को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायत निस्तारण में उदासीनता बरतने वालों का वेतन रोक दिया गया है।
आईपी पांडेय, जिलाधिकारी
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प्रदेश सरकार ने जनता की समस्याओं को सुनने के लिए जनसुनवाई पोर्टल बनाया है। पोर्टल पर जिले से आए दिन दर्जनों की संख्या में शिकायतें पहुंचती हैं। इन्हें जिम्मेदार अधिकारियों को तय समय सीमा में निस्तारित करना होता है लेकिन जिले में जनसुनवाई पोर्टल महज दिखावा बनकर रह गया है। शिकायतों के निस्तारण को लेकर अधिकारी संजीदा नजर नहीं आते। इसके चलते बड़ी संख्या में शिकायतें समय सीमा से भी अधिक समय से लंबित हैं। शासन स्तर से नाराजगी जताने के बाद डीएम के निर्देश पर 22 अधिकारियों का वेतन रोका गया है। इनमें सबसे अधिक खराब स्थिति जिला पंचायत राज अधिकारी की है। एडीएम प्रशासन ने मामले में आदेश जारी कर सभी 22 अधिकारियों का वेतन रोकने की संस्तुति की है। जिस पर डीएम आईपी पांडेय ने मुहर लगा दी है।
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डीपीआरओ नहीं देखते पोर्टल
जनसुनवाई को लेकर डीपीआरओ की स्थिति बेहद खराब है। इनके पास नौ शिकायतें आनलाइन और नौ शिकायत डीएम स्तर की लंबित पड़ी हैं। इससे साफ है कि डीपीआरओ को पोर्टल देखने का भी समय नहीं है।
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इनके रुके वेतन और लंबित शिकायतें
डीपीआरओ- 18, तहसीलदार अलीगंज 4, एआईजी स्टांप 2, जिला कृषि अधिकारी 2, सीएमएस 2, सहायक निबंधन आयुक्त 2, प्रभारी चिकित्साधिकारी अवागढ़ 2, एसडीएम अलीगंज, समाज कल्याण अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, ईओ नगर पालिका एटा, बीडीओ निधौलीकलां, प्रभारी चिकित्साधिकारी मारहरा, उप कृषि निदेशक, एक्सईएन सिंचाई, कृषि रक्षा अधिकारी, एडीओ अवागढ़, एडीओ जलेसर, एडीओ मारहरा, एडीओ सकीट, प्रभारी चिकित्साधिकारी निधौलीकलां, उपनिदेशक मंडी परिषद की एक-एक शिकायत शामिल है।
आईजीआरएस पर दर्ज शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाना है। आईजीआरएस को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायत निस्तारण में उदासीनता बरतने वालों का वेतन रोक दिया गया है।
आईपी पांडेय, जिलाधिकारी