फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   आलू घोंट रहा अन्नदाता का गला

आलू घोंट रहा अन्नदाता का गला

Tue, 27 Mar 2018 11:20 PM IST
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:20 PM IST
विज्ञापन
आलू घोंट रहा अन्नदाता का गला
आलू की फसल में घाटे से क्षुब्ध किसान ने दी जान फोटो - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
राजा घोंट रहा अन्नदाता का गला
एटा। सब्जियों का राजा अन्नदाताओं की जिंदगी छीन रहा है। जिले में आलू की फसल बर्बादी से लगातार किसान आत्महत्या कर रहे हैं। पहले भी किसान आलू फसल के घाटे के चलते आत्महत्या कर चुके हैं। आलम यह है कि सरकारें और रवायतें किसानों को उत्थान को लेकर कोई कदम नहीं उठातीं। ऐसे में किसान आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हैं।
जिले में आलू फसल में लगातार तीन साल से किसानों को घाटा झेलना पड़ रहा है। आलम यह है कि मेहनत और लगन से बोई गई फसल का सही दाम नहीं मिलता और मेहनतकश किसान कर्ज और आर्थिक समस्याओं के पैरों तले खुद को सूली पर चढ़ा देता है। आलम यह है कि लगातार हो रहीं किसानों की मौतों के बाद अब तक शासन और प्रशासन की आंखें खुली नहीं हैं। किसानों के उत्थान का दावा करने वालीं रवायतें मौत को लेकर चुप्पी साध जाती हैं। जमीनी हकीकत को टटोलें तो साफ नजर आता है कि बीती 19 फरवरी को राजा का रामपुर में किसान वीर बहादुर ने आलू की फसल बर्बाद होने के बाद खुद को खत्म कर लिया। इससे पहले जलेसर क्षेत्र में 21 जनवरी को आलू किसान ओमप्रताप सिंह की मौत हुई थी। भाकियू नेता ने भी फसल बर्बादी के बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
विज्ञापन

हर बार किसानों की मौत के बाद खूब आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन इसके बाद कोई किसान के परिवार की सुध लेने कोई नहीं पहुंचता। किसानों की मौत पर सियासत होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर किसानों को मिलती है तो बस फसल की बर्बादी, कर्ज का बोझ और मौत। सरकारें कर्जमाफी कर रही हैं, लेकिन किसान फिर क्यों कर्ज के बोझ से दबकर मर रहे हैं? सवाल उठते हैं और दफन हो जाते हैं, लेकिन अन्नदाता की दुर्दशा पर कोई भी पहल करता नजर नहीं आता।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये है कारण
किसान अधिकतर कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या को मजबूर होते हैं। पूरी लगन से फसल को बोने के लिए किसान हर संभव प्रयास करते हैं, मगर जब प्रकृति की मार या किस्मत से फसल बर्बाद होती है, तो किसान के पास बस एक ही चारा बचता है मौत। ऐसे में जरूरी है कि सरकारों को कर्जमाफी करने की बजाय किसानों की जमीनी स्तर पर मदद करने की जरूरत है।

समर्थन मूल्य भी दिखावटी
सरकार वादा करती है कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिया जाएगा, मगर सरकारी खरीद शुरू होती है, तो समर्थन मूल्य इतना होता है कि किसान की लागत भी नहीं निकलती।


बीमा योजनाएं भी फेल
कहने को जिले में प्रधानमंत्री कृषि सुरक्षा बीमा योजना चल रही है, लेकिन जिले में योजना का हाल बदहाल है। अब तक महज 10 हजार किसानों ने बीमा योजना में पंजीकरण कराया, लेकिन महज चार हजार किसानों को लाभ मिल सका है। जिसमें किसानों को फसल बर्बादी के बाद महज सैकड़ाभर मुआवजा दिया गया है।

कहते हैं आंकड़े
253000 कुल किसान जिले में
139000 किसान पंजीकृत
42617 किसानों को मिला ऋणमोचन का लाभ
285.43 करोड़ रुपये का किया गया कर्ज माफ
10 हजार किसान बीमा योजना में पंजीकृत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed