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बाढ़ ने बंद किए रास्ते , अब नाव ही सहारा
Updated Fri, 11 Aug 2017 11:08 PM IST
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बाढ़ की तबाही जारी, आवागमन के लिए नाव ही सहारा
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में इन दिनों ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। गांव में बाढ़ के प्रकोप से निजात नहीं मिल पा रही। खेतों में जलमग्न फसलें गलने लगीं हैं। वहीं ग्रामीणों के कच्चे मकान धराशाही होने की कगार पर हैं। ग्रामीण अब बाढ़ के विदा लेने की गंगा से मनौती मांग रहे हैं।
गौरतलब है कि नरौरा से गुरुवार को 1.73 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया था। यह शुक्रवार को 4 हजार बढ़कर 1.77 लाख क्यूसेक हो गया। कछला पर गेज में 5 सेंटीमीटर की कमी आई है। शुक्रवार को कछला पर जलस्तर 163.65 के निशान पर था, लेकिन गेज पर जलस्तर कम होने का कोई प्रभाव बाढ़ वाले इलाकों में नहीं हैैं। गंगा का पानी पहले ही ग्रामीण क्षेत्र और खादर में अपना रास्ता बना चुका है।
जिले के दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। लोगों हर समय गंगा के पानी के बढ़ने का खतरा सता रहा है। ग्रामीण पानी को रोकने के लिए जुगाड़ करने में लगे हैं। कोई आबादी में भरे पानी को खाली स्थान की तरफ निकालने का रास्ता बना रहा है, तो कोई मिट्टी की ढाए लगाकर पानी रोकने की कवायद कर रहा है। प्रभावित इलाकों में लोगों को रात में भी जाग रहे हैं। न जाने कब क्या हो जाए? अजीत नगर इलाके में कटी सड़क से लगातार पानी दूसरी ओर निकल रहा है। जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।
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लक्ष्मण नगला में तो पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण नाव के सहारे ही आवागमन कर रहे हैं। बेहरोजपुर गांव के चारों तरफ पानी भरने से लोग बेहद परेशान हैं। नगला मूंता भी बाढ़ की चपेट में है। किलौनी ,किसौल, देवकली, नगला जय किशन, नगला हंशी, सनौड़ी सिहिमन, नरदौली, राजेपुर कुर्रा, मेहोला, कादरगंज, सुन्नगढ़ी, नगला टिकुड़ी, नगला मेहरी, गठैरा, नगला खिमाई, पनसोती, जिझौल, हिम्मतनगर, बझेरा समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इन इलाकों में प्रशासन ने बिजली तो काट दी, लेकिन अभी केरोसिन आदि भी वितरित नहीं किया है। लहरा एवं कछला गंगाघाट पर भी बढ़ा जलस्तर घाट के दुकानदार और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के सहायक बाढ़ प्रभारी एके सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 4 हजार क्यूसेक नरौरा से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा है। शनिवार को और बढ़ने की आशंका है। सभी बांध सुरक्षित हैं। जिनकी निगरानी निरंतर की जा रही है।
जिलाधिकारी आरपी सिंह ने का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राजस्व टीमें पूरी तरह से सक्रिय हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से निरंतर संपर्क किया जा रहा है। सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। बाढ़ उतर जाने के बाद इलाके में क्षति का आकलन किया जाएगा।
डिस्चार्ज पानी-
नरौरा से 177274 क्यूसेक
बिजनौर से 133588 क्यूसेक
हरिद्वार से 76244 क्यूसेक
कछला गेज 163.65
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में इन दिनों ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। गांव में बाढ़ के प्रकोप से निजात नहीं मिल पा रही। खेतों में जलमग्न फसलें गलने लगीं हैं। वहीं ग्रामीणों के कच्चे मकान धराशाही होने की कगार पर हैं। ग्रामीण अब बाढ़ के विदा लेने की गंगा से मनौती मांग रहे हैं।
गौरतलब है कि नरौरा से गुरुवार को 1.73 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया था। यह शुक्रवार को 4 हजार बढ़कर 1.77 लाख क्यूसेक हो गया। कछला पर गेज में 5 सेंटीमीटर की कमी आई है। शुक्रवार को कछला पर जलस्तर 163.65 के निशान पर था, लेकिन गेज पर जलस्तर कम होने का कोई प्रभाव बाढ़ वाले इलाकों में नहीं हैैं। गंगा का पानी पहले ही ग्रामीण क्षेत्र और खादर में अपना रास्ता बना चुका है।
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जिले के दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। लोगों हर समय गंगा के पानी के बढ़ने का खतरा सता रहा है। ग्रामीण पानी को रोकने के लिए जुगाड़ करने में लगे हैं। कोई आबादी में भरे पानी को खाली स्थान की तरफ निकालने का रास्ता बना रहा है, तो कोई मिट्टी की ढाए लगाकर पानी रोकने की कवायद कर रहा है। प्रभावित इलाकों में लोगों को रात में भी जाग रहे हैं। न जाने कब क्या हो जाए? अजीत नगर इलाके में कटी सड़क से लगातार पानी दूसरी ओर निकल रहा है। जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।
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लक्ष्मण नगला में तो पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण नाव के सहारे ही आवागमन कर रहे हैं। बेहरोजपुर गांव के चारों तरफ पानी भरने से लोग बेहद परेशान हैं। नगला मूंता भी बाढ़ की चपेट में है। किलौनी ,किसौल, देवकली, नगला जय किशन, नगला हंशी, सनौड़ी सिहिमन, नरदौली, राजेपुर कुर्रा, मेहोला, कादरगंज, सुन्नगढ़ी, नगला टिकुड़ी, नगला मेहरी, गठैरा, नगला खिमाई, पनसोती, जिझौल, हिम्मतनगर, बझेरा समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इन इलाकों में प्रशासन ने बिजली तो काट दी, लेकिन अभी केरोसिन आदि भी वितरित नहीं किया है। लहरा एवं कछला गंगाघाट पर भी बढ़ा जलस्तर घाट के दुकानदार और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के सहायक बाढ़ प्रभारी एके सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 4 हजार क्यूसेक नरौरा से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा है। शनिवार को और बढ़ने की आशंका है। सभी बांध सुरक्षित हैं। जिनकी निगरानी निरंतर की जा रही है।
जिलाधिकारी आरपी सिंह ने का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राजस्व टीमें पूरी तरह से सक्रिय हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से निरंतर संपर्क किया जा रहा है। सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। बाढ़ उतर जाने के बाद इलाके में क्षति का आकलन किया जाएगा।
डिस्चार्ज पानी-
नरौरा से 177274 क्यूसेक
बिजनौर से 133588 क्यूसेक
हरिद्वार से 76244 क्यूसेक
कछला गेज 163.65