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न्याय व्यवस्था की प्राथमिकता झगड़े को समाप्त करने की हो: प्रशासनिक न्यायमूर्ति
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:18 PM IST
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हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति
- फोटो : Google
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न्याय व्यवस्था की पहली प्राथमिकता दो पक्षों के बीच होने वाले झगड़े को समाप्त करने की होनी चाहिए। मुकदमाबाजी आखिरी विकल्प होना चाहिए। इससे धन व समय की बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आयोजित हो रही हैं। यह बातें प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर कहीं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष जिला जज ओपी त्रिपाठी के साथ दीप प्रज्वलित किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1134 वादों का निस्तारण किया गया और 146890 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। बैंक संबंधी 44 मामले निस्तारित किए गए। बीएसएनएल के 76 मामले निस्तारित हुए। जिला जज ओपी त्रिपाठी ने 11 वाद निस्तारित करके 5500 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज रविंद्र कुमार ने 4 वाद निस्तारित कर 1500 रुपये अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज अनीता राज ने 4 वाद निस्तारित कर 3400 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज हरविंदर सिंह ने 10 वाद निस्तारित कर 4500 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज धीरेंद्र सिंह ने 282 वाद निस्तारित करते हुए 3000 रुपये का अर्थदंड वसूला। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदरलाल ने 300 वाद निस्तारित करते हुए 41000 का अर्थदंड वसूला। सिविल जज सीनियर डिवीजन नेत्रपाल सिंह ने 16 वाद निस्तारित करते हुए 8800 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव कुमार ने 297 वाद निस्तारित कर 62740 रुपये का अर्थदंड बसूला। सिविल जज सीनियर डिवीजन हरींद्र कुमार ओझा ने नौ, सिविल जज जूनियर डिवीजन अंकुर गर्ग ने 98, न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्चना सिंह ने 70, सिविल जज जूनियर डिवीजन सुनील कुमार सिंह ने 29, राजस्व अधिकारियों ने 342 वाद निस्तारित किए। लोक अदालत में मोटर दुर्घटना का प्रतिकर भी दिया गया। वहीं उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी जारी किए गए।
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न्याय व्यवस्था की पहली प्राथमिकता दो पक्षों के बीच होने वाले झगड़े को समाप्त करने की होनी चाहिए। मुकदमाबाजी आखिरी विकल्प होना चाहिए। इससे धन व समय की बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आयोजित हो रही हैं। यह बातें प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर कहीं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष जिला जज ओपी त्रिपाठी के साथ दीप प्रज्वलित किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1134 वादों का निस्तारण किया गया और 146890 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। बैंक संबंधी 44 मामले निस्तारित किए गए। बीएसएनएल के 76 मामले निस्तारित हुए। जिला जज ओपी त्रिपाठी ने 11 वाद निस्तारित करके 5500 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज रविंद्र कुमार ने 4 वाद निस्तारित कर 1500 रुपये अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज अनीता राज ने 4 वाद निस्तारित कर 3400 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज हरविंदर सिंह ने 10 वाद निस्तारित कर 4500 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर जिला जज धीरेंद्र सिंह ने 282 वाद निस्तारित करते हुए 3000 रुपये का अर्थदंड वसूला। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदरलाल ने 300 वाद निस्तारित करते हुए 41000 का अर्थदंड वसूला। सिविल जज सीनियर डिवीजन नेत्रपाल सिंह ने 16 वाद निस्तारित करते हुए 8800 रुपये का अर्थदंड वसूला। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव कुमार ने 297 वाद निस्तारित कर 62740 रुपये का अर्थदंड बसूला। सिविल जज सीनियर डिवीजन हरींद्र कुमार ओझा ने नौ, सिविल जज जूनियर डिवीजन अंकुर गर्ग ने 98, न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्चना सिंह ने 70, सिविल जज जूनियर डिवीजन सुनील कुमार सिंह ने 29, राजस्व अधिकारियों ने 342 वाद निस्तारित किए। लोक अदालत में मोटर दुर्घटना का प्रतिकर भी दिया गया। वहीं उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी जारी किए गए।
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