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हिंदी, कंप्यूटर में फील गुड, संस्कृत में छूटा पसीना
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हिंदी, कंप्यूटर में फील गुड, संस्कृत में छूटा पसीना
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। कंप्यूटर परीक्षा के साथ ही तीन दिवसीय डीएलएड परीक्षा का समापन हो गया। तीसरे दिन की परीक्षा में भी 36 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। हिंदी, कंप्यूटर प्रश्रपत्र से खुश रहे परीक्षार्थी संस्कृत के पेपर से चकरा गए।
भीषण गर्मी में शुरू हुई डीएलएड परीक्षाएं परीक्षार्थियों के लिए परेशानी भरी रहीं। कुछ केंद्रों पर बिजली, पंखों की शिकायतें रहीं। सोमवार को पहली पाली में संपन्न हिंदी एवं तीसरी पाली में संपन्न कंप्यूटर के आसान प्रश्नपत्रों से परीक्षार्थी खुश दिखे। वहीं संस्कृत के पेपर से इनके पसीने छूट गए। ऐसे में अधिकांश परीक्षार्थी इधर उधर झांकते दिखाई दिए।
बताते चलें कि 4749 परीक्षार्थियों के लिए जिले के बारह विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इनमें दस राजकीय, एडिड एवं दो स्ववित्तपोषित विद्यालय शामिल थे। अंतिम दिन सोमवार को तीन पालियों की परीक्षा में हर पाली में 36 अनुपस्थित रहे। 4713 आवेदक परीक्षा में शामिल हुए।
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ये थे प्रश्न
हिंदी परीक्षा में प्रत्येक शब्द का उपसर्ग, व्यंजन, परशुराम की प्रतीक्षा के रचनाकार का नाम पूछा गया। पुष्प व बिजली के पर्यायवाची, आग बबूला मुहावरे का अर्थ एवं जीवन निर्वाह व वीणा वादिनी में प्रयुक्त समास का नाम पूछा गया। वहीं कंप्यूटर पेपर में वस्तुनिष्ठ एवं अतिलघु उत्तरीय प्रश्रों में डिजिटल कंप्यूटर, आईसीटी, ऑन लाइन संचार, विकीपीडिया, सर्वर, ई-ट्यूशन आदि की परिभाषा पूछी थी।
जबकि संस्कृत परीक्षा से चकराए परीक्षार्थी दीर्घ संधि, कबूतर, परवल, जामुन, कटहल, तोता, गिलहरी के नाम व इक्कीस को संस्कृत में परीक्षार्थी नहीं लिख सके। अनुवाद में परीक्षार्थी आगे पीछे ताकते दिखाई दिए।
सर्वाधिक परीक्षार्थियों की बैक संस्कृत विषय में आती है। इस बार भी पेपर से परीक्षार्थी परेशान हैं। विज्ञान व कला वर्ग के छात्र-छात्राएं संस्कृत के प्रति उदासीन रहते हैं।
डॉ राजीव यादव, पर्यवेक्षक एवं डायट प्रवक्ता
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भीषण गर्मी में शुरू हुई डीएलएड परीक्षाएं परीक्षार्थियों के लिए परेशानी भरी रहीं। कुछ केंद्रों पर बिजली, पंखों की शिकायतें रहीं। सोमवार को पहली पाली में संपन्न हिंदी एवं तीसरी पाली में संपन्न कंप्यूटर के आसान प्रश्नपत्रों से परीक्षार्थी खुश दिखे। वहीं संस्कृत के पेपर से इनके पसीने छूट गए। ऐसे में अधिकांश परीक्षार्थी इधर उधर झांकते दिखाई दिए।
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बताते चलें कि 4749 परीक्षार्थियों के लिए जिले के बारह विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इनमें दस राजकीय, एडिड एवं दो स्ववित्तपोषित विद्यालय शामिल थे। अंतिम दिन सोमवार को तीन पालियों की परीक्षा में हर पाली में 36 अनुपस्थित रहे। 4713 आवेदक परीक्षा में शामिल हुए।
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ये थे प्रश्न
हिंदी परीक्षा में प्रत्येक शब्द का उपसर्ग, व्यंजन, परशुराम की प्रतीक्षा के रचनाकार का नाम पूछा गया। पुष्प व बिजली के पर्यायवाची, आग बबूला मुहावरे का अर्थ एवं जीवन निर्वाह व वीणा वादिनी में प्रयुक्त समास का नाम पूछा गया। वहीं कंप्यूटर पेपर में वस्तुनिष्ठ एवं अतिलघु उत्तरीय प्रश्रों में डिजिटल कंप्यूटर, आईसीटी, ऑन लाइन संचार, विकीपीडिया, सर्वर, ई-ट्यूशन आदि की परिभाषा पूछी थी।
जबकि संस्कृत परीक्षा से चकराए परीक्षार्थी दीर्घ संधि, कबूतर, परवल, जामुन, कटहल, तोता, गिलहरी के नाम व इक्कीस को संस्कृत में परीक्षार्थी नहीं लिख सके। अनुवाद में परीक्षार्थी आगे पीछे ताकते दिखाई दिए।
सर्वाधिक परीक्षार्थियों की बैक संस्कृत विषय में आती है। इस बार भी पेपर से परीक्षार्थी परेशान हैं। विज्ञान व कला वर्ग के छात्र-छात्राएं संस्कृत के प्रति उदासीन रहते हैं।
डॉ राजीव यादव, पर्यवेक्षक एवं डायट प्रवक्ता