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नौनिहालों को ‘नकल की तालीम’ दे रहे शिक्षक

Mon, 18 Mar 2019 11:12 PM IST
Pavan kumar पवन कुमार
Updated Mon, 18 Mar 2019 11:12 PM IST
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नौनिहालों को ‘नकल की तालीम’ दे रहे शिक्षक
सामूहिक नकल करते परीक्षार्थी। - फोटो : demo pic
मैनपुरी। परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं सोमवार को शुरू हो गईं। अपनी गलती छिपाने के लिए शिक्षकों ने बच्चों को नकल करने की छूट दे दी। शिक्षक आने जाने वालों की निगरानी करते रहे और बच्चे किताब खोलकर उत्तर लिखते रहे। शिक्षकों की गलती यह कि उन्होंने वर्षभर बच्चों को पढ़ाया नहीं। अगर पढ़ाया होता तो नकल की नौबत ही क्यों आती।
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शहर से सटे प्राथमिक विद्यालय खरपरी में बच्चे किताब सामने रखकर परीक्षा दे रहे थे। परीक्षा की निगरानी की जगह शिक्षिका आने-जाने वालों पर नजर रखने के लिए कक्षा से बाहर खड़ी थीं। कक्षा की स्थिति देखकर लग ही नहीं रहा था कि यहां परीक्षा चल रही है।
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कुसमरा के प्राथमिक विद्यालय उजागरपुर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति मिली। यहां कुछ बच्चे किताब लेकर नकल कर रहे थे, तो कुछ बच्चे झुंड बनाकर एक उत्तर पुस्तिका से नकल कर रहे थे। ऐसा ही नजारा अन्य स्कूलों में भी देखने को मिला। छोटी उम्र में बच्चों को नकल की छूट देकर कहीं न कहीं शिक्षक उनका भविष्य चौपट कर रहे हैं।
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ऐसे कैसे होगा गुणवत्ता में सुधार
परिषदीय स्कूलों की गुणवत्ता सुधार के नाम पर हजारों रुपये खर्च कर प्रशिक्षण दिलाया गया। जिस प्रकार से परीक्षाओं में नकल देखने को मिल रही है, उससे नहीं लग रहा है कि परिषदीय स्कूलों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार हो रहा है।

बीएसए ने नहीं की कार्रवाई
परिषदीय स्कूलों की परीक्षाओं में नकल नई बात नहीं है। अर्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान भी जिले के परिषदीय स्कूलों में जमकर नकल हुई थी। अमर उजाला ने खबरें प्रकाशित कीं तो बीएसए विजय प्रताप सिंह ने शिक्षकों पर कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद बीएसए की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। शायद इसीलिए शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं।


परीक्षा में नकल कराना उचित नहीं है। कहीं नकल कराई गई है, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ धोखा है। खंड शिक्षाधिकारी और एबीआरसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे परीक्षाओं की निगरानी कराएं। जहां भी नकल हुई है वहां के शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांग कार्रवाई की जाएगी।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए।
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