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आग में सब खाक, जिंदगी चलाने को मदद की आस
Updated Fri, 20 Apr 2018 11:36 PM IST
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आग में सब खाक, जिंदगी चलाने को मदद की आस
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। पटियाली तहसील क्षेत्र के चार गांव आग में पूरी तरह से खाक हो गए हैं। लोगों के घर जलकर राख के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। अब जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए उन्हें मदद की आस है। लेकिन प्रशासन ने नुकसान कम आंका है, जिस कारण ग्रामीणों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। पीड़ितों ने डीएम से जल्द मदद की गुहार लगाई है।
क्षेत्र का रिकैरा गांव पूरी तरह उजड़ चुका है। अग्निकांड के दो दिन बाद भी गांव में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। समाजसेवी गांव में पीड़ितों को खाना, बिस्किट आदि सामग्री बांट रहे हैं। इससे उनका पेट तो भर रहा है, लेकिन जिंदगी चलाने की चुनौती उनके सामने खड़ी है। वहीं लोग अपने जले हुए सामान के ढेर को यही सोचकर बार-बार कुरेद रहे हैं कि शायद उन्हें कुछ सुरक्षित मिल जाए। कोई सिर छुपाने के लिए प्रशासन के टेंट का सहारा ले रहा है तो तिरपाल डालकर अपने परिवार को सुरक्षित करने में लगा है। ग्रामीणों के पास अब उतने ही गेहूं चावल हैं जो प्रशासन ने दिए हैं। इसके अलावा उनके हाथ में कुछ नहीं।
कब आएगी मदद की राशि
प्रशासन ने गांवों का दौरा कर नुकसान का आंकलन तो कर लिया है, लेकिन मदद भेजने में कितने दिन लगेंगे यह अभी कोई नहीं बता पा रहा है। इससे लोग बेचैन हैं। फिर से आशियाना बनाने के लिए घर के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी चिंतित हैं।
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कम मिलेगी मदद
नगला नियाजअली के नसीम कहते हैं कि प्रशासन द्वारा जो धनराशि दी जा रही है उससे घर नहीं तैयार हो सकता, क्योंकि घरों में सबकुछ जल कर राख हो गया है। न बिस्तर हैं और न कपड़े। रिकैरा के रामदास, धरम सिंह, रामौतार, मनोज का कहना है कि पूरा गांव आग से तबाह हो गया। अब कैसे घर गृहस्थी बस पाएगी समझ में नहीं आ रहा।
बच्चों के चेहरों से उड़ गई हंसी
दो दिन पहले जिन गांवों में बच्चों के हंसने की आवाजें गूंजती थीं, आज वहां सन्नाटा सा छाया है। अधिकारियों के वाहनों की आवाज कभी-कभी सुनाई देती है। बच्चे गुमसुम हैं, भूखे हैं। न स्कूल जा रहे हैं और न ही खेल रहे हैं। बच्चों के मुरझाए चेहरों को देखकर बड़े और भी विचलित हो रहे हैं।
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क्षेत्र का रिकैरा गांव पूरी तरह उजड़ चुका है। अग्निकांड के दो दिन बाद भी गांव में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। समाजसेवी गांव में पीड़ितों को खाना, बिस्किट आदि सामग्री बांट रहे हैं। इससे उनका पेट तो भर रहा है, लेकिन जिंदगी चलाने की चुनौती उनके सामने खड़ी है। वहीं लोग अपने जले हुए सामान के ढेर को यही सोचकर बार-बार कुरेद रहे हैं कि शायद उन्हें कुछ सुरक्षित मिल जाए। कोई सिर छुपाने के लिए प्रशासन के टेंट का सहारा ले रहा है तो तिरपाल डालकर अपने परिवार को सुरक्षित करने में लगा है। ग्रामीणों के पास अब उतने ही गेहूं चावल हैं जो प्रशासन ने दिए हैं। इसके अलावा उनके हाथ में कुछ नहीं।
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कब आएगी मदद की राशि
प्रशासन ने गांवों का दौरा कर नुकसान का आंकलन तो कर लिया है, लेकिन मदद भेजने में कितने दिन लगेंगे यह अभी कोई नहीं बता पा रहा है। इससे लोग बेचैन हैं। फिर से आशियाना बनाने के लिए घर के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी चिंतित हैं।
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कम मिलेगी मदद
नगला नियाजअली के नसीम कहते हैं कि प्रशासन द्वारा जो धनराशि दी जा रही है उससे घर नहीं तैयार हो सकता, क्योंकि घरों में सबकुछ जल कर राख हो गया है। न बिस्तर हैं और न कपड़े। रिकैरा के रामदास, धरम सिंह, रामौतार, मनोज का कहना है कि पूरा गांव आग से तबाह हो गया। अब कैसे घर गृहस्थी बस पाएगी समझ में नहीं आ रहा।
बच्चों के चेहरों से उड़ गई हंसी
दो दिन पहले जिन गांवों में बच्चों के हंसने की आवाजें गूंजती थीं, आज वहां सन्नाटा सा छाया है। अधिकारियों के वाहनों की आवाज कभी-कभी सुनाई देती है। बच्चे गुमसुम हैं, भूखे हैं। न स्कूल जा रहे हैं और न ही खेल रहे हैं। बच्चों के मुरझाए चेहरों को देखकर बड़े और भी विचलित हो रहे हैं।