{"_id":"5aafeb2c4f1c1bbf088b61db","slug":"151521478444-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुविधाएं बदहाल, रैकिंग में पिछड़ा जिला:","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुविधाएं बदहाल, रैकिंग में पिछड़ा जिला:
Updated Mon, 19 Mar 2018 10:58 PM IST
विज्ञापन
एटा
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जिले की स्वास्थ्य सेवा बदहाल हैं। जिले में मरीजों को दी जाने वाले स्वास्थ्य सुविधाओं और हालात को लेकर शासन ने चिंता जताई। हाल ही शासन की ओर से जारी की गई रैकिंग में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की सेहत बिगड़ गई है। दिसंबर 2017 तक एटा प्रदेश में चौथे पायदान पर काबिज था लेकिन मार्च 2018 में गिरकर 48वें पायदान पर आ गया है।
शासन की ओर से हर तिमाही में प्रत्येक जिले के अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई समेत सरकारी योजनाओं के हाल को लेकर रैकिंग की जाती है। दिसंबर 2017 तक जिले की स्थिति बेहतर थी और जिला प्रदेश में चौथे पायदान पर था। अब शासन ने मार्च 2018 की रैकिंग जारी की है। जिसमें जिला पिछड़ते हुए 48वें स्थान पर आ गया है। दरअसल, जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो एक जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत 38 सीएचसी-पीएचसी हैं। इनमें डाक्टरों के ज्यादातर पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति भी अटकी हुई है। जिला अस्पताल समेत तमाम अस्पतालों में साफ-सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। ऐसे में रैकिंग में जिले का पिछड़ना लाजिमी है।
जिला अस्पताल में डाक्टर कम
जिला अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों का अभाव है। यहां 27 पदों के सापेक्ष 15 डाक्टर हैं। इसके साथ ही पिछले कई महीनों से दवाओं की आपूर्ति भी नहीं हो रही है।
विज्ञापन
108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर
जिले में संचालित हो रहीं 38 पीएचसी और सीएचसी का आलम भी बुरा है। यहां 108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर काम कर रहे हैं। जनवरी में शासन ने नए 29 डाक्टरों की तैनाती की थी, जिनमें अब तक 13 की नियुक्ति हो सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं।
विभाग में तैनाती में खेल
स्वास्थ्य विभाग में तैनाती में खेल हुआ। विभाग के अधिकारियों ने अब तक तीन साल से अधिक समय से एक पटल पर जमे बाबुओं का स्थानांतरण नहीं किया है। विभाग के एनआरएचएम, लेखा, स्थापना, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के पटलों पर जमे बाबुओं का अब तक स्थानांतरण नहीं हुआ है। जबकि शासन ने तीन साल से अधिक समय से पटल संभाल रहे बाबुओं के स्थानांतरण के निर्देश दिए थे।
कहते हैं आंकड़े
-04 सीएचसी जिले में
-34 पीएचसी हैं जिले में
-108 पद हैं डाक्टरों के
-40 डाक्टरों की है तैनाती
-07 डाक्टर चाहिए एक सीएचसी पर
-02 डाक्टर तैनात हैं एक सीएचसी पर
-27 पद हैं जिला अस्पताल में चिकित्सकों के
-15 चिकि त्सकों की है तैनाती
-02 डाक्टर अन्य कार्यों से संबद्ध
-1500 मरीज औसतन रोज पहुंचते हैं जिला अस्पताल
नोट: वर्जन बाद में मिलेगा। सीएमओ मीटिंग में हैं।
विज्ञापन
शासन की ओर से हर तिमाही में प्रत्येक जिले के अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई समेत सरकारी योजनाओं के हाल को लेकर रैकिंग की जाती है। दिसंबर 2017 तक जिले की स्थिति बेहतर थी और जिला प्रदेश में चौथे पायदान पर था। अब शासन ने मार्च 2018 की रैकिंग जारी की है। जिसमें जिला पिछड़ते हुए 48वें स्थान पर आ गया है। दरअसल, जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो एक जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत 38 सीएचसी-पीएचसी हैं। इनमें डाक्टरों के ज्यादातर पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति भी अटकी हुई है। जिला अस्पताल समेत तमाम अस्पतालों में साफ-सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। ऐसे में रैकिंग में जिले का पिछड़ना लाजिमी है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में डाक्टर कम
जिला अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों का अभाव है। यहां 27 पदों के सापेक्ष 15 डाक्टर हैं। इसके साथ ही पिछले कई महीनों से दवाओं की आपूर्ति भी नहीं हो रही है।
विज्ञापन
108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर
जिले में संचालित हो रहीं 38 पीएचसी और सीएचसी का आलम भी बुरा है। यहां 108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर काम कर रहे हैं। जनवरी में शासन ने नए 29 डाक्टरों की तैनाती की थी, जिनमें अब तक 13 की नियुक्ति हो सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं।
विभाग में तैनाती में खेल
स्वास्थ्य विभाग में तैनाती में खेल हुआ। विभाग के अधिकारियों ने अब तक तीन साल से अधिक समय से एक पटल पर जमे बाबुओं का स्थानांतरण नहीं किया है। विभाग के एनआरएचएम, लेखा, स्थापना, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के पटलों पर जमे बाबुओं का अब तक स्थानांतरण नहीं हुआ है। जबकि शासन ने तीन साल से अधिक समय से पटल संभाल रहे बाबुओं के स्थानांतरण के निर्देश दिए थे।
कहते हैं आंकड़े
-04 सीएचसी जिले में
-34 पीएचसी हैं जिले में
-108 पद हैं डाक्टरों के
-40 डाक्टरों की है तैनाती
-07 डाक्टर चाहिए एक सीएचसी पर
-02 डाक्टर तैनात हैं एक सीएचसी पर
-27 पद हैं जिला अस्पताल में चिकित्सकों के
-15 चिकि त्सकों की है तैनाती
-02 डाक्टर अन्य कार्यों से संबद्ध
-1500 मरीज औसतन रोज पहुंचते हैं जिला अस्पताल
नोट: वर्जन बाद में मिलेगा। सीएमओ मीटिंग में हैं।