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UP: बिना मुआवजे खतौनी से काटे 150 किसानों के नाम, सीएम से मिलने पर अड़े; एडीए पर लगाए गंभीर आरोप
Sat, 25 Jul 2026 09:41 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 25 Jul 2026 09:41 AM IST
सार
आगरा के एत्मादपुर मदरा के 150 किसानों ने आरोप लगाया है कि बिना मुआवजा दिए उनकी जमीन के नाम खतौनी से काट दिए गए। किसानों ने एडीए पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से मिलने की मांग की है।
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा विकास प्राधिकरण ने सदर तहसील के गांव एत्मादपुर मदरा में 150 किसानों को बिना मुआवजा दिए उनकी कृषि भूमि की खतौनी से नाम काट दिए हैं। 15 साल बाद कागजों में अपनी ही जमीन से बेदखल करने से आक्रोशित किसान अब सीधे मुख्यमंत्री से मिलने की जिद पर अड़े हैं।
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हाईकोर्ट में मामले विचाराधीन होने के बावजूद की गई इस नियम-विरुद्ध कार्रवाई पर बवाल बढ़ता देख जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। शुक्रवार को एडीएम सिटी ने किसानों के साथ बैठक कर प्रकरण के समाधान के लिए 27 जुलाई तक का समय मांगा है।
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प्रभावित किसान नौबत सिंह का आरोप है कि एडीए ने वर्ष 2009-10 में गांव में 150 से अधिक किसानों की 124 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इसके करीब 13 साल बाद 21 सितंबर, 2023 को गुपचुप तरीके से निर्णय पारित कर दिया गया जो भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 25 का सीधा उल्लंघन है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो जमीन पर भौतिक कब्जा लिया गया और न ही मुआवजा बंटा। पीड़ित किसान श्रीकृष्ण और वीरेंद्र ने बताया कि खतौनी से नाम कटने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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प्रशासन ने मांगी मोहलत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को आगरा आ रहे हैं। रविवार तक रहेंगे। इधर, किसानों के उग्र तेवर देखते हुए शुक्रवार को एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान ने प्रभावित किसानों और उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। एडीएम सिटी ने आश्वासन दिया है और 27 जुलाई तक का समय मांगा है। बैठक में भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया, सोमबीर यादव, कुशलपाल फौजी सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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हाईकोर्ट में मामले विचाराधीन होने के बावजूद की गई इस नियम-विरुद्ध कार्रवाई पर बवाल बढ़ता देख जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। शुक्रवार को एडीएम सिटी ने किसानों के साथ बैठक कर प्रकरण के समाधान के लिए 27 जुलाई तक का समय मांगा है।
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प्रभावित किसान नौबत सिंह का आरोप है कि एडीए ने वर्ष 2009-10 में गांव में 150 से अधिक किसानों की 124 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इसके करीब 13 साल बाद 21 सितंबर, 2023 को गुपचुप तरीके से निर्णय पारित कर दिया गया जो भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 25 का सीधा उल्लंघन है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो जमीन पर भौतिक कब्जा लिया गया और न ही मुआवजा बंटा। पीड़ित किसान श्रीकृष्ण और वीरेंद्र ने बताया कि खतौनी से नाम कटने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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