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कांवड़ियों के जोश से शिवमय हुआ जिला
Updated Wed, 08 Aug 2018 11:38 PM IST
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कांवड़ियों के जोश से शिवमय हुआ जिला
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। भोले की भक्ति का यह जुनून और जोश ही है जो शिव भक्तों को गंगा में बाढ़ का प्रभाव भी नहीं रोक पा रहा है। गंगा घाटों पर इन समय ऐसी धूम है कि हर ओर बम भोले के जयकारे ही सुनाई दे रहे हैं। जोश खरोश के साथ कांवड़िय़े शिव की भक्ति में लीन होकर कांवड़ को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए गंतव्य तक ले जा रहे हैं। गुरुवार को श्रावण मास की शिवरात्रि के मौके पर कांवड़िय़े भगवान शिव का गंगा के जल से अभिषेक करेंगे।
श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, लेकिन श्रावण मास की शिवरात्रि को भी विशेष पूजा अर्चना करके जलाभिषेक होता है। लहरा घाट पर भी कांवडिय़ों की काफी भीड़ रही, लेकिन दूरस्थ इलाके कांवडिय़े मंगलवार को ही अपनी कांवड़े लेकर रवाना हो गए थे। बुधवार को भी लहरा से समीपवर्ती इलाकों के कांवडिय़ों की टोलियां शिवभक्ति का गायन करते हुए आगे बढ़ रहीं थीं। सायं के समय तक कांवडिय़ों की टोलियां लगातार निकलती रहीं। बुधवार को लहरा गंगाघाट से ज्यादा कछला गंगाघाट पर रौनक नजर आई। यहां का नजारा कुछ अलग ही नजर आ रहा था। कांवडिय़ों की टोलियों में बच्चे भी नजर आ रहे थे। केसरिया रंग के परिधान पहनकर कांवडिय़ों की टोलियां नाचती गाती चल रहीं थी। कांवडिय़ों की टोलियों के साथ नृत्य कलाकार भी चल रहे थे जो शिव महिमा के गीतों पर झूमते नजर आ रहे थे। सोरों, लहरा और कछला गंगाघाटों पर कांवड़ मेला में तमाम दुकानें साज सज्जा के सामान की सजी हुईं थीं। घंटे घडिय़ाल और शंख की गूंज भी सुनाई दे रही थी।
बच्चों में भी दिखा उत्साह
कासगंज। कांवड़ यात्रा में बच्चों में विशेष उत्साह नजर आ रहा था। बच्चे पूरी मस्ती के साथ कांवड़ यात्रा में साथ चल रहे थे। भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए बच्चे हर किसी को आकर्षित कर रहे थे। कांवडिय़ों की टोलियां शिव बारात की तरह नजर आ रहीं थीं।
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टोलियों में नजर आ रहा था तिरंगा
कासगंज। कांवडिय़ों की टोलियो में तिरंगा भी नजर आ रहा था। शिव भक्ति के साथ लोगों में देशभक्ति का जज्बा भी दिखाई दे रहा था। कांवडिय़ों के परिधान पर एक ओर भगवान शिव का चित्र दिखाई दे रहा था तो दूसरी ओर तिरंगा। कांवड़ के साजा सज्जा के सामान के साथ ही तिरंगा भी लोग कांवड़ में सजा रहे थे।
एटा। सावन की शिव तेरस गुरुवार को है। इस पवित्र दिन जलाभिषेक करने के लिए गंगा से जल लेकर शिव भक्त आने लगे हैं।
सावन की शिव तेरस को लेकर जिले के शिवालयों में साज-सज्जा का काम तेजी से चल रहा है। कैलाशगंज स्थित प्राचीन कैलाश मंदिर में साफ-सफाई और झालरों को लगाने का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा डाक बगलिया स्थित शिव मंदिर, शिकोहाबाद रोड स्थित शिव मंदिर में भी बुधवार को पर्व को लेकर तैयारियां चलती रहीं। मंदिर में उमडने वाली भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। कैलाश मंदिर में श्रद्धालुओं के आने जाने के रास्तों की बेरीकेटिंग की गई है। इसके साथ ही मंदिर पर पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। मंदिर के महंत धीरेंद्र झा ने बताया कि शिव तेरस के मौके पर दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंचेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
यह है सावन की शिव तेरस का महत्व
सावन शिवरात्रि को कांवड़ यात्रा भी कहा जाता है। कांवड़ यात्रा समुद्र के मंथन से संबंधित है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने जहर का सेवन किया, जिससे नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित हुए। त्रेतायुग में रावण ने शिव का ध्यान किया और वह कंवर का उपयोग करके गंगा के पवित्र जल को लाया और भगवान शिव पर अर्पित किया, इस प्रकार जहर की नकारात्मक ऊर्जा भगवान शिव से दूर हुई। ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार उपाध्याय बताते हैं कि सावन के पावन सोमवार और शिवरात्रि के त्योहार की महिमा ही अलग होती है। श्रावण महीने की शिवरात्रि के दिन जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं उनके कष्टों का निवारण होता है और मुरादें पूरी हो जाती हैं।
श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, लेकिन श्रावण मास की शिवरात्रि को भी विशेष पूजा अर्चना करके जलाभिषेक होता है। लहरा घाट पर भी कांवडिय़ों की काफी भीड़ रही, लेकिन दूरस्थ इलाके कांवडिय़े मंगलवार को ही अपनी कांवड़े लेकर रवाना हो गए थे। बुधवार को भी लहरा से समीपवर्ती इलाकों के कांवडिय़ों की टोलियां शिवभक्ति का गायन करते हुए आगे बढ़ रहीं थीं। सायं के समय तक कांवडिय़ों की टोलियां लगातार निकलती रहीं। बुधवार को लहरा गंगाघाट से ज्यादा कछला गंगाघाट पर रौनक नजर आई। यहां का नजारा कुछ अलग ही नजर आ रहा था। कांवडिय़ों की टोलियों में बच्चे भी नजर आ रहे थे। केसरिया रंग के परिधान पहनकर कांवडिय़ों की टोलियां नाचती गाती चल रहीं थी। कांवडिय़ों की टोलियों के साथ नृत्य कलाकार भी चल रहे थे जो शिव महिमा के गीतों पर झूमते नजर आ रहे थे। सोरों, लहरा और कछला गंगाघाटों पर कांवड़ मेला में तमाम दुकानें साज सज्जा के सामान की सजी हुईं थीं। घंटे घडिय़ाल और शंख की गूंज भी सुनाई दे रही थी।
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बच्चों में भी दिखा उत्साह
कासगंज। कांवड़ यात्रा में बच्चों में विशेष उत्साह नजर आ रहा था। बच्चे पूरी मस्ती के साथ कांवड़ यात्रा में साथ चल रहे थे। भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए बच्चे हर किसी को आकर्षित कर रहे थे। कांवडिय़ों की टोलियां शिव बारात की तरह नजर आ रहीं थीं।
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टोलियों में नजर आ रहा था तिरंगा
कासगंज। कांवडिय़ों की टोलियो में तिरंगा भी नजर आ रहा था। शिव भक्ति के साथ लोगों में देशभक्ति का जज्बा भी दिखाई दे रहा था। कांवडिय़ों के परिधान पर एक ओर भगवान शिव का चित्र दिखाई दे रहा था तो दूसरी ओर तिरंगा। कांवड़ के साजा सज्जा के सामान के साथ ही तिरंगा भी लोग कांवड़ में सजा रहे थे।
एटा। सावन की शिव तेरस गुरुवार को है। इस पवित्र दिन जलाभिषेक करने के लिए गंगा से जल लेकर शिव भक्त आने लगे हैं।
सावन की शिव तेरस को लेकर जिले के शिवालयों में साज-सज्जा का काम तेजी से चल रहा है। कैलाशगंज स्थित प्राचीन कैलाश मंदिर में साफ-सफाई और झालरों को लगाने का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा डाक बगलिया स्थित शिव मंदिर, शिकोहाबाद रोड स्थित शिव मंदिर में भी बुधवार को पर्व को लेकर तैयारियां चलती रहीं। मंदिर में उमडने वाली भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। कैलाश मंदिर में श्रद्धालुओं के आने जाने के रास्तों की बेरीकेटिंग की गई है। इसके साथ ही मंदिर पर पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। मंदिर के महंत धीरेंद्र झा ने बताया कि शिव तेरस के मौके पर दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंचेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
यह है सावन की शिव तेरस का महत्व
सावन शिवरात्रि को कांवड़ यात्रा भी कहा जाता है। कांवड़ यात्रा समुद्र के मंथन से संबंधित है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने जहर का सेवन किया, जिससे नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित हुए। त्रेतायुग में रावण ने शिव का ध्यान किया और वह कंवर का उपयोग करके गंगा के पवित्र जल को लाया और भगवान शिव पर अर्पित किया, इस प्रकार जहर की नकारात्मक ऊर्जा भगवान शिव से दूर हुई। ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार उपाध्याय बताते हैं कि सावन के पावन सोमवार और शिवरात्रि के त्योहार की महिमा ही अलग होती है। श्रावण महीने की शिवरात्रि के दिन जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं उनके कष्टों का निवारण होता है और मुरादें पूरी हो जाती हैं।