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निक्षय पोषण योजना में निजी अस्पताल लापरवाही
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कासगंज। निक्षय पोषण योजना में टीबी के मरीजों को प्रतिमाह 500 रुपये पहुंचाने में निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम संचालक लापरवाह बने हुए हैं। निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के आधार एवं एकाउंट संकलित न होने से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी तक 1176 मरीजों में से मात्र 215 के आधार और एकाउंट संकलित हो सके हैं।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश शासन ने स्टेट डिप्टी टीबी अधिकारी डा. ऋषि एवं डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डा. अमित पांडे को निक्षय पोषण योजना में आ रही बाधाओं को जानने के लिए भेजा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों के साथ बैठक की। सीएमओ डा. प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि 10 जनवरी 2018 को सभी रजिस्टर्ड क्लीनिक और अस्पताल से नोटिस जारी कर डाटा मांगा था।
जिला क्षय अधिकारी डा. एसपी सिंह ने सभी से टीबी मरीजों के खाता संख्या एवं आधार विभाग को भेजने के लिए कहा गया था। स्टेट डिप्टी अधिकारी एवं डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट ने रजिस्टर्ड क्लीनिक अस्पतालों द्वारा एक अप्रैल 2018 से भेजे गए रिकॉर्ड का मूल्यांकन किया। इसमें अधिकांश मरीजों के पते और मोबाइल नंबर आदि गलत पाए गए।
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वहीं उनके एकाउंट न होने से उनके खाते में योजना की राशि नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी टीबी मरीजों का डाटा और एकाउंट नंबर सही लिया जाए, जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। इस मौके पर जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र यादव, पीपीएम कोऑर्डिनेटर शाद मोहसिन, एचडीएलएस राजीव पचौरी, फार्मासिस्ट धर्मेंद्र उपाध्याय, डीटीडीसी हेमेंद्र कुमार सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर राजीव यादव, एसटीएस पंकज गुप्ता, शिवरतन, संतोष कुमार, दिलीप कुमार आदि मौजूद रहे।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश शासन ने स्टेट डिप्टी टीबी अधिकारी डा. ऋषि एवं डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डा. अमित पांडे को निक्षय पोषण योजना में आ रही बाधाओं को जानने के लिए भेजा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों के साथ बैठक की। सीएमओ डा. प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि 10 जनवरी 2018 को सभी रजिस्टर्ड क्लीनिक और अस्पताल से नोटिस जारी कर डाटा मांगा था।
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जिला क्षय अधिकारी डा. एसपी सिंह ने सभी से टीबी मरीजों के खाता संख्या एवं आधार विभाग को भेजने के लिए कहा गया था। स्टेट डिप्टी अधिकारी एवं डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट ने रजिस्टर्ड क्लीनिक अस्पतालों द्वारा एक अप्रैल 2018 से भेजे गए रिकॉर्ड का मूल्यांकन किया। इसमें अधिकांश मरीजों के पते और मोबाइल नंबर आदि गलत पाए गए।
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वहीं उनके एकाउंट न होने से उनके खाते में योजना की राशि नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी टीबी मरीजों का डाटा और एकाउंट नंबर सही लिया जाए, जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। इस मौके पर जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र यादव, पीपीएम कोऑर्डिनेटर शाद मोहसिन, एचडीएलएस राजीव पचौरी, फार्मासिस्ट धर्मेंद्र उपाध्याय, डीटीडीसी हेमेंद्र कुमार सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर राजीव यादव, एसटीएस पंकज गुप्ता, शिवरतन, संतोष कुमार, दिलीप कुमार आदि मौजूद रहे।