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बीमार अस्पताल को खुद चाहिए संजीवनी

Wed, 19 Dec 2018 10:36 PM IST
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Updated Wed, 19 Dec 2018 10:36 PM IST
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बीमार अस्पताल को खुद चाहिए संजीवनी
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एटा। ठंड लोगों के लिए आफत बनती जा रही है। सर्दी, जुकाम और खांसी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन जिले में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बेहतर सुविधा देने का डंका पीटने वाले स्वास्थ्य विभाग की पोल सर्दी ने खोल दी है। आलम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इलाज मयस्सर नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लोग इलाज के लिए जिला अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूूर हैं। जिले में सफेद हाथी बनकर रह गए स्वास्थ्य केंद्रों के हाल और इंतजाम पर नजर डालती रिपोर्ट....
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिदौरा
जिले के हर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मिरहची क्षेत्र के गांव पिदौरा में स्वास्थ्य केंद्र तो बनवा दिया, लेकिन इंतजाम अभी भी ठंडे पड़े हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य केंद्र पर किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बनी इमारत लोगों को मुंह चिढ़ा रही है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजा का रामपुर
राजा का रामपुर में साल 2012 में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल छह साल बाद भी सुधर नहीं सका है। आलम यह है कि स्वास्थ्य केंद्र पर न तो चिकित्सक हैं और न ही दवाइयां। बताया जाता है कि एक फार्मासिस्ट लोगों को इलाज करता है, लेकिन वह भी मनमानी उतारू है। मुख्यालय से 70 किमी दूर राजा का रामपुर के लोगों को इलाज के लिए एटा और अलीगंज की दौड़ लगानी पड़ती है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नयाबांस
मिरहची क्षेत्र के गांव नयाबांस में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां भी इमारत लोगों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गई है। यहां भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने से लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों के लिए बीमारियां मुसीबत बनती जा रही हैं।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों का अभाव
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाने से लोग जिला अस्पताल का रुख करते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं। जिला अस्पताल में 27 पदों के सापेेक्ष महज 10 चिकित्सकों की तैनाती है। जिनमें से दो से तीन चिकित्सक आए दिन अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में लोगों के लिए इलाज आफत बन रहा है।

जिले में चिकित्सकों का अभाव है। हमने भरपाई करने के लिए संविदा पर चिकित्सक तैनात कराए है, जिनको ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया है। अगर कहीं चिकित्सक नहीं पहुंच रहे हैं तो मामले की जानकारी की जाएगी।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ

-चिकित्सक नहीं आने पर शहर दवा लेने जाना पड़ता है। कई बार जिला अस्पताल में भी मरीज नहीं मिलते हैं।
राधेश्याम, ग्रामीण
- निजी चिकित्सकों के यहां दवा लेने पर मजबूर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक मिलते ही नहीं है।
रामौतार, ग्रामीण


संसाधनों का टोटा, स्टाफ की कमी से जूझ रहा पुलिस अस्पताल
एटा। संसाधनों का अभाव और स्टाफ की कमी से पुलिस लाइन का अस्पताल जूझ रहा है। चौबीस घंटे ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मी और उनके परिजनों के उपचार के नाम खिलवाड़ किया जा रहा है। पुलिस लाइन के अस्पताल में अतिक्रमण भी पूरी तरह से हाबी है।
रात और दिन ड्यूटी देकर अपने फर्ज के प्रति सजग रहने वाले पुलिस कर्मियों को चिकित्सा सुव1िधा के नाम पर जिले में ठेंगा दिखाया जा रहा है। पुलिस लाइन में पुलिस वालों के लिए बना अस्पताल आज के दौर में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्टाफ की कमी होने के साथ ही अस्पताल में मूलभूत संसाधनों का भी टोटा है। एक चिकित्सक की तैनात दो जगहों पर होने के कारण पुलिस कर्मी और उनके परिजनों को पुलिस लाइन अस्पताल से इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिसे लेकर पुलिस कर्मियों को निजी क्लीनिक या फिर जिला अस्पताल में इलाज के लिए भागना पड़ रहा है। अधिकारी इन सब बातों को जानने के बाद भी चुप्पी साधे हुए है।

एक कमरे में चल रहा अस्पताल
एटा। पुलिस लाइन में बना हास्पिटल देखने में काफी बड़ा है। जबकि हकीकत तो यह कि केवल एक कोठरी में पूरा अस्पताल सिमट गया है। अन्य कमरों में कबाड़ा भरा हुआ है। बैड भी अस्पताल में दिख नहीं रहे है। इस तरह से पुलिस लाइन के अस्पताल पर अतिक्रमण पूरी तरह से हाबी हो रहा है।

ठप हुई फिजियोथिरेपी सेवा
एटा। पुलिस लाइन में बने अस्पताल में तत्कालीन एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने डीआईजी के साथ मिलकर पुलिस कर्मियों के लिए फिजियोथैरेपी की सेवा शुरू कराई थी। कुछ दिन यह सुविधा चलने के बाद ठप हो गई है। ऐसे में पुलिस कर्मियों की समस्या और बढ़ती नजर आ रही है।

सफाई कर्मचारी का टोटा
एटा। चिकित्सक, फार्मासिस्ट तैनाती में बढ़ोत्तरी करना दूर की बात रही। पुलिस लाइन में बने अस्पताल में सफाई करने वाले कर्मचारी तक का अभाव है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से पुलिस कर्मियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

वर्जन
मेरी पुलिस लाइन और पीएसी के अस्पताल में तैनाती है। पुलिस लाइन में सुबह के समय जाता हूं, यहां जो भी मरीज पहुंचते हैं, उनको देखने के बाद पीएसी बटालियन अस्पताल में मरीज देखने चला जाता हूं।

डा. उत्सव जैन, चिकित्सक

पुलिस लाइन में स्पोर्ट्स के लिए मैदान तैयार किया जा रहा है। जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। इसलिए अस्पताल में सीमेंट आदि सामान रखवा दिया गया है। जिसे रोज हटा दिया जाता है।
चरनपाल, आरआई पुलिस लाइन
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