{"_id":"5b180a304f1c1bb51e8b46af","slug":"131528302128-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोद लेने के बाद गांव आना भूल गए सांसद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोद लेने के बाद गांव आना भूल गए सांसद
Updated Wed, 06 Jun 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
गोद लेने के बाद गांव आना भूल गए सांसद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा/जलेसर। न तो सुख और न ही दुख। समस्याएं भी हाशिए पर, लेकिन तमगा सांसद आदर्श गांव का। गांव को आदर्श बनाने का दावा करने वाले सांसद रामशंकर कठेरिया ही गांव को भूल बैठे। न तो गांव का विकास हो सका और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई हाल जानना गंवारा समझा। पढ़िए रिपोर्ट...
चार नवंबर को गोद लिया था गांव
केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद आगरा सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया ने चार नवंबर को जलेसर ब्लॉक के पिलखतरा गांव को गोद लिया था। उस दौरान संासद ने जो लंबे चौड़े वादे किए थे, मगर कुछ भी नहीं हो सका।
जलभराव से जूझ रहीं गलियां
गांव की गलियों में जगह जगह पानी भरा हुआ है। गांव में जगह जगह गंदगी का आलम है। जिसे स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी साफ नहीं करा पाए हैं। गांव में सिंचाई के लिए पिलखतरा, बत्तपुरा एवं पिलखतरा से अब्दुल हईपुर को जोडने वाले दोनों पुल जर्जर अवस्था में है। सांसद ने पेयजल व्यवस्था के लिए टंकी का निर्माण तो करा दिया लेकिन ठेकेदारों के गुणवत्ता पूर्ण कार्य न कराए जाने से जगह जगह पाइप लाइन लीक कर रही है। शिकायतों के बाद भी कार्यवाही न होने से समस्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
आदर्श गांव में स्वास्थ्य केंद्र बदहाल
गांव के विकास भारद्वाज, वीरेश का कहना है कि आदर्श गांव में होने के बाद गांव के स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही नियुक्त है। स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ तीन दिन ही चिकित्सक मिलते हैं, बाकी दिनों में ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आदर्श गांव में हुआ था घोटाला
आगरा सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया के आदर्श गांव पिलखतरा में शौचालय निर्माण में घोटाला हुआ था। गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए करीब 15 लाख रुपये ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के खाते में भेजे गए थे। सचिव और प्रधान ने मिलकर 145 परिवारों का चिन्हांकन करते हुए चेक काट दिए। जांच के दौरान पता लगा कि जिन परिवारों के नाम से चेक काटे गए हैं, उनको चेक मिले ही नहीं हैं। साथ ही गांव में 42 शौचालय अपूर्ण मिले। मामले में डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने प्रधान अनीता, पंचायत सचिव सतीश शर्मा को नोटिस जारी किया था, मगर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
तीन बार आए सांसद
गांव के महाराज सिंह, गुड्डी देवी के अनुसार चार साल मेें सांसद को महज तीन बार गांव की सुध आई। गांव में तीन बार बैठकों का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने सांसद को समस्याएं भी सुनाईं, लेकिन आज तक एक भी समस्या दूर नहीं हो सकी। वहीं गांव के सुख दुख में शामिल होने की सांसद को फुरसत तक नहीं मिली। इसके अलावा विधायकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने गांव के विकास पर ध्यान नहीं दिया।
दो वर्ष में तीन बार टेहू गए कठेरिया
आगरा/बरहन
गांव को गोद लेने के बाद सांसद रामशंकर कठेरिया महज तीन बार गांव में गए। पहली बार वे 28 जुलाई 2017 को पहुंचे थे। पहली बार गांव आने पर सांसद ने जिलाधिकारी सहित जिले के सभी विभागों के अधिकारियों के साथ चौपाल लगाई थी जिसमें कार्यों की समीक्षा गई थी।
नहीं बन पाए 815 शौचालय
गांव में कुल 1106 परिवार हैं। इनमें से 815 परिवारों का निजी शौचालय योजना के तहत हुआ था लेकिन अब जून 2018 तक शौचालय निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।
रोजगार दिलाने को नहीं हुए पंजीकरण
टेहू गांव की आबादी करीब 7000 है। कुल आबादी में करीब 308 जॉब कार्ड धारक हैं। गांव के बेरोजगार लोगों को रोजगर दिलाने के लिए पंजीकरण कराने को गया था। कहा गया था कि घर-घर जाकर पंजीकरण होगा लेकिन आज तक किसी का पंजीकरण नहीं किया गया।
खुले में शौच मुक्त नहीं हो पाया गांव
खुले में शौच से मुक्त करने के लिए तमाम कोशिशें हुई हैं लेकिन सफलता नहीं मिली है। एक तो पूरे गांव में शौचालय नहीं बन पाए हैं। जिन घरों में शौचालय बने हैं वहां भी लोग उनका प्रयोग नहीं करते हैं। ग्रामीणों की अभी तक मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। ..............
अवैध शराब बिक्री जारी
आदर्श गांव होने के नाते वहां से शराब का ठेका तो हटा दिया गया है लेकिन गांव में अवैध शराब की बिक्री बढ़ गई है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
आगरा फोर्ट एक्सप्रेस भी बंद हो गई ।
रेल मंत्रालय द्वारा चलाई गई आगरा फोर्ट-एटा पैसेंजर से ग्रामीणों को राहत मिली थी। लोग मजदूरी करने इसी ट्रेन से जाते थे और इसी से शाम को वापस आते थे लेकिन कुछ समय चलने के बाद इसे बंद कर दिया गया।
विज्ञापन
चार नवंबर को गोद लिया था गांव
केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद आगरा सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया ने चार नवंबर को जलेसर ब्लॉक के पिलखतरा गांव को गोद लिया था। उस दौरान संासद ने जो लंबे चौड़े वादे किए थे, मगर कुछ भी नहीं हो सका।
विज्ञापन
जलभराव से जूझ रहीं गलियां
गांव की गलियों में जगह जगह पानी भरा हुआ है। गांव में जगह जगह गंदगी का आलम है। जिसे स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी साफ नहीं करा पाए हैं। गांव में सिंचाई के लिए पिलखतरा, बत्तपुरा एवं पिलखतरा से अब्दुल हईपुर को जोडने वाले दोनों पुल जर्जर अवस्था में है। सांसद ने पेयजल व्यवस्था के लिए टंकी का निर्माण तो करा दिया लेकिन ठेकेदारों के गुणवत्ता पूर्ण कार्य न कराए जाने से जगह जगह पाइप लाइन लीक कर रही है। शिकायतों के बाद भी कार्यवाही न होने से समस्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
आदर्श गांव में स्वास्थ्य केंद्र बदहाल
गांव के विकास भारद्वाज, वीरेश का कहना है कि आदर्श गांव में होने के बाद गांव के स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही नियुक्त है। स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ तीन दिन ही चिकित्सक मिलते हैं, बाकी दिनों में ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आदर्श गांव में हुआ था घोटाला
आगरा सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया के आदर्श गांव पिलखतरा में शौचालय निर्माण में घोटाला हुआ था। गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए करीब 15 लाख रुपये ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के खाते में भेजे गए थे। सचिव और प्रधान ने मिलकर 145 परिवारों का चिन्हांकन करते हुए चेक काट दिए। जांच के दौरान पता लगा कि जिन परिवारों के नाम से चेक काटे गए हैं, उनको चेक मिले ही नहीं हैं। साथ ही गांव में 42 शौचालय अपूर्ण मिले। मामले में डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने प्रधान अनीता, पंचायत सचिव सतीश शर्मा को नोटिस जारी किया था, मगर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
तीन बार आए सांसद
गांव के महाराज सिंह, गुड्डी देवी के अनुसार चार साल मेें सांसद को महज तीन बार गांव की सुध आई। गांव में तीन बार बैठकों का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने सांसद को समस्याएं भी सुनाईं, लेकिन आज तक एक भी समस्या दूर नहीं हो सकी। वहीं गांव के सुख दुख में शामिल होने की सांसद को फुरसत तक नहीं मिली। इसके अलावा विधायकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने गांव के विकास पर ध्यान नहीं दिया।
दो वर्ष में तीन बार टेहू गए कठेरिया
आगरा/बरहन
गांव को गोद लेने के बाद सांसद रामशंकर कठेरिया महज तीन बार गांव में गए। पहली बार वे 28 जुलाई 2017 को पहुंचे थे। पहली बार गांव आने पर सांसद ने जिलाधिकारी सहित जिले के सभी विभागों के अधिकारियों के साथ चौपाल लगाई थी जिसमें कार्यों की समीक्षा गई थी।
नहीं बन पाए 815 शौचालय
गांव में कुल 1106 परिवार हैं। इनमें से 815 परिवारों का निजी शौचालय योजना के तहत हुआ था लेकिन अब जून 2018 तक शौचालय निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।
रोजगार दिलाने को नहीं हुए पंजीकरण
टेहू गांव की आबादी करीब 7000 है। कुल आबादी में करीब 308 जॉब कार्ड धारक हैं। गांव के बेरोजगार लोगों को रोजगर दिलाने के लिए पंजीकरण कराने को गया था। कहा गया था कि घर-घर जाकर पंजीकरण होगा लेकिन आज तक किसी का पंजीकरण नहीं किया गया।
खुले में शौच मुक्त नहीं हो पाया गांव
खुले में शौच से मुक्त करने के लिए तमाम कोशिशें हुई हैं लेकिन सफलता नहीं मिली है। एक तो पूरे गांव में शौचालय नहीं बन पाए हैं। जिन घरों में शौचालय बने हैं वहां भी लोग उनका प्रयोग नहीं करते हैं। ग्रामीणों की अभी तक मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। ..............
अवैध शराब बिक्री जारी
आदर्श गांव होने के नाते वहां से शराब का ठेका तो हटा दिया गया है लेकिन गांव में अवैध शराब की बिक्री बढ़ गई है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
आगरा फोर्ट एक्सप्रेस भी बंद हो गई ।
रेल मंत्रालय द्वारा चलाई गई आगरा फोर्ट-एटा पैसेंजर से ग्रामीणों को राहत मिली थी। लोग मजदूरी करने इसी ट्रेन से जाते थे और इसी से शाम को वापस आते थे लेकिन कुछ समय चलने के बाद इसे बंद कर दिया गया।