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पुलिस-प्रशासन अलर्ट, उपद्रव करने वाले 14 लोग जेल भेजे
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:12 AM IST
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फिरोजाबाद। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सोमवार को हुए उपद्रव के बाद दूसरे दिन मंगलवार को पुलिस फोर्स अलर्ट दिखाई दिया। दलित बहुल क्षेत्रों में फोर्स तैनात रहा। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी सुबह से पल-पल की खबर लेते रहे। पुलिस ने उपद्रवियों की गिरफ्तारी करने को सोमवार रात से ही दबिशें देना शुरू कर दिया था। इससे प्रदर्शनकारियों में दहशत दिखाई दी। रामगढ़ पुलिस ने उपद्रव करने वाले चार लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। उधर नारखी में भगदड़ के दौरान मृत सुरेशचंद्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया। नारखी थाने पर फोर्स तैनात रहा। मंगलवार को जिले में माहौल शांतिपूर्ण रहा।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सोमवार को दलित समाज सड़क पर उतर आया था। जुलूस निकालने के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारखी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के मध्य पथराव होने के साथ टूंडला में लाठीचार्ज हो गया था। पचोखरा में जबरन दुकानों को बंद कराने के साथ लूटपाट करने का आरोप लगाया था। थाना पचोखरा, नारखी एवं रामगढ़ में 27 नामजद सहित करीब सौ से अधिक अज्ञात के खिलाफ अभियोग दर्ज कराए गए थे। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए रात्रि में दबिशें भी दीं। मंगलवार को सुबह से पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा।
प्रमुख चौराहों पर फोर्स को तैनात कर दिया। ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। नगर मजिस्ट्रेट शीतला प्रसाद यादव, एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह, सीओ सिटी डा. अरुण कुमार सिंह के साथ सभी थानों का फोर्स सक्रिय हो गया था। इधर रामगढ़ एसएचओ भानु प्रताप सिंह ने कहा विरोध प्रदर्शन के दौरान नगला पीपरिया के समीप दुकानदार से मारपीट, लूटपाट करने के मामले में मुन्नालाल, रवि, बबलू एवं नंदू को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। वहीं पचोखरा पुलिस ने दस को जेल भेजा है।
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थाना नारखी धौंकल निवासी सुरेशचंद्र (55) पुत्र डालचंद्र के शव को सोमवार को रात में ही पैनल के माध्यम से पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया था। रात को ही परिवारीजन शव को गांव ले आए। मंगलवार को सुबह दस बजे सुरेशचंद्र के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। नारखी थाने पर सीओ टूंडला संजय वर्मा, एसएचओ नारखी संजय यादव, टूंडला मुनीशचंद्र, पचोखरा प्रवेश कुमार मौजूद रहे।
एसएचओ नारखी संजय यादव ने बताया सोमवार को पुलिस टीम के साथ हुई घटना में 16 नामजद व 50 अज्ञात के खिलाफ मारपीट, गालीगलौज, अभद्रता, सरकारी कार्य में वाधा, जानलेवा हमला व सेवन लॉ क्रिमिनल अमिटमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। एसएसपी डा.मनोज कुमार ने कहा कि सुरेशचंद्र की मौत पुलिस के लाठीचार्ज से नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सुरेशचंद्र की मौत बीती रात्रि (24 घंटे पहले) हुई है। मृतक के फेफड़ों में पश पड़ गया था। लीवर खराब हो जाने के कारण काम करना बंद कर दिया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेश की मौत 24 घंटे पहले बताई है। यानी सुरेश की मौत रविवार-सोमवार की रात को हो गई थी। पुलिस के अनुसार नारखी में ग्रामीणों द्वारा शुरू किए गए धरना से पहले ही सुरेश की मौत हो गई थी। जबकि पुलिस के इस तर्क को पूरा गांव सिरे से नकार रहा है। गांव की महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग बार-बार यही कह रहे हैं कि सुरेश की मौत पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़ में हुई। सुरेश की बुजुर्ग मां हरदेवी को आंखों से दिखाई नहीं देता है।
मंगलवार की सुबह बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान उनके आंसू नहीं रुक रहे थे। हरदेवी ने कहा कि उनका बेटा नौ बजे घर से शौच के लिए बगीची की तरफ जाने की कह कर गया था। उसके बाद लौट कर नहीं आया। गांव वालों ने बताया कि बगीची की तरफ जाने के दौरान भगदड़ मची थी इसी में वह गिर गया। बीमार तो वह पहले ही था। अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि सुरेश बीमार जरूर था लेकिन उसकी मौत रात को नहीं हुई। आंदोलन के दौरान ही हुई।
सुरेशचंद्र की मौत होने के बाद पत्नी मीना देवी और उसके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी बिलख रही थी कि आखिर अब इनका पालन-पोषण कौन करेगा। गांव की महिलाएं ढांढस बंधा रहीं थी। पत्नी मीना देवी ने कहा कि पति सुरेशचंद्र सुबह घर से शौच को गए थे। लेकिन उनकी मौत की खबर आई। मृतक सुरेशचंद्र की पुत्री हेमरत्ना (छह), हेमकांता (चार) का रो-रोकर बुरा हाल था। सुरेशचंद्र मोची का काम करता था।
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एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सोमवार को दलित समाज सड़क पर उतर आया था। जुलूस निकालने के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारखी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के मध्य पथराव होने के साथ टूंडला में लाठीचार्ज हो गया था। पचोखरा में जबरन दुकानों को बंद कराने के साथ लूटपाट करने का आरोप लगाया था। थाना पचोखरा, नारखी एवं रामगढ़ में 27 नामजद सहित करीब सौ से अधिक अज्ञात के खिलाफ अभियोग दर्ज कराए गए थे। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए रात्रि में दबिशें भी दीं। मंगलवार को सुबह से पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा।
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प्रमुख चौराहों पर फोर्स को तैनात कर दिया। ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। नगर मजिस्ट्रेट शीतला प्रसाद यादव, एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह, सीओ सिटी डा. अरुण कुमार सिंह के साथ सभी थानों का फोर्स सक्रिय हो गया था। इधर रामगढ़ एसएचओ भानु प्रताप सिंह ने कहा विरोध प्रदर्शन के दौरान नगला पीपरिया के समीप दुकानदार से मारपीट, लूटपाट करने के मामले में मुन्नालाल, रवि, बबलू एवं नंदू को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। वहीं पचोखरा पुलिस ने दस को जेल भेजा है।
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थाना नारखी धौंकल निवासी सुरेशचंद्र (55) पुत्र डालचंद्र के शव को सोमवार को रात में ही पैनल के माध्यम से पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया था। रात को ही परिवारीजन शव को गांव ले आए। मंगलवार को सुबह दस बजे सुरेशचंद्र के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। नारखी थाने पर सीओ टूंडला संजय वर्मा, एसएचओ नारखी संजय यादव, टूंडला मुनीशचंद्र, पचोखरा प्रवेश कुमार मौजूद रहे।
एसएचओ नारखी संजय यादव ने बताया सोमवार को पुलिस टीम के साथ हुई घटना में 16 नामजद व 50 अज्ञात के खिलाफ मारपीट, गालीगलौज, अभद्रता, सरकारी कार्य में वाधा, जानलेवा हमला व सेवन लॉ क्रिमिनल अमिटमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। एसएसपी डा.मनोज कुमार ने कहा कि सुरेशचंद्र की मौत पुलिस के लाठीचार्ज से नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सुरेशचंद्र की मौत बीती रात्रि (24 घंटे पहले) हुई है। मृतक के फेफड़ों में पश पड़ गया था। लीवर खराब हो जाने के कारण काम करना बंद कर दिया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेश की मौत 24 घंटे पहले बताई है। यानी सुरेश की मौत रविवार-सोमवार की रात को हो गई थी। पुलिस के अनुसार नारखी में ग्रामीणों द्वारा शुरू किए गए धरना से पहले ही सुरेश की मौत हो गई थी। जबकि पुलिस के इस तर्क को पूरा गांव सिरे से नकार रहा है। गांव की महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग बार-बार यही कह रहे हैं कि सुरेश की मौत पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़ में हुई। सुरेश की बुजुर्ग मां हरदेवी को आंखों से दिखाई नहीं देता है।
मंगलवार की सुबह बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान उनके आंसू नहीं रुक रहे थे। हरदेवी ने कहा कि उनका बेटा नौ बजे घर से शौच के लिए बगीची की तरफ जाने की कह कर गया था। उसके बाद लौट कर नहीं आया। गांव वालों ने बताया कि बगीची की तरफ जाने के दौरान भगदड़ मची थी इसी में वह गिर गया। बीमार तो वह पहले ही था। अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि सुरेश बीमार जरूर था लेकिन उसकी मौत रात को नहीं हुई। आंदोलन के दौरान ही हुई।
सुरेशचंद्र की मौत होने के बाद पत्नी मीना देवी और उसके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी बिलख रही थी कि आखिर अब इनका पालन-पोषण कौन करेगा। गांव की महिलाएं ढांढस बंधा रहीं थी। पत्नी मीना देवी ने कहा कि पति सुरेशचंद्र सुबह घर से शौच को गए थे। लेकिन उनकी मौत की खबर आई। मृतक सुरेशचंद्र की पुत्री हेमरत्ना (छह), हेमकांता (चार) का रो-रोकर बुरा हाल था। सुरेशचंद्र मोची का काम करता था।