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बाबूजी जा लालीये तौ हमें ही दै देऔ...
Updated Sat, 04 Aug 2018 09:11 PM IST
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जिला अस्पाल में नवजात बच्ची
- फोटो : डेमो
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मथुरा। बाबूजी हमाए कई सालन तै बच्चा नाए, जा लाली ए तौ हमें ही दै दो, चाहे तो कागजी कार्रवाई करवाए लो। शनिवार को यह गूंज दिनभर महिला अस्पताल में गूंजती रहीं। मामला विगत दिन जिला अस्पताल में पाई गई नवजात बालिका से जुड़ा है। करीब 60 लोग बालिका को गोद लेने के लिए यहां पहुंचे।
रविवार सुबह जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में पाई गई नवजात बालिका को गोद लेने के लिए शनिवार को दिन भर लोगों की भीड़ महिला अस्पताल में लगी रही। वर्षों से संतान प्राप्ति की चाह रखने वाले दंपती भी अस्पताल के मुख्य द्वार पर मुंह लटकाए देखे गए। हाथों में अखबार की कटिंग और मुंह पर मासूमियत, साफ छलक रही थी। इनमें मथुरा शहर के अलावा हाथरस, अलीगढ़, आगरा आदि शहरों के लोग भी शामिल थे। लोगों की सलाह पर वह डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय की ओर भी दौड़े।
हाथरस से आए दंपती ने नाम न छापने पर बताया कि उनकी शादी को करीब आठ वर्ष बीत गए लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त न हो सका। मथुरा के ही एक रिश्तेदार ने जब अखबारों में यह खबर पढ़ी तो उन्हें बताया। इसके बाद उनसे रहा न गया और वह इसे लेने के लिए यहां आ गई, पर चिकित्सक उन्हें इसे देने से मना कर रहे हैं। देर शाम तक नवजात बालिका को शिशु भेजे जाने की कार्रवाई जारी थी।
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शिशु सदन को मामले से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही उसे वहां भेजा जाएगा। शनिवार को नवजात को लेने के लिए दिनभर लोग अस्पताल आते रहे, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी है।
- डॉ. केके माथुर, बाल रोग विशेषज्ञ
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रविवार सुबह जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में पाई गई नवजात बालिका को गोद लेने के लिए शनिवार को दिन भर लोगों की भीड़ महिला अस्पताल में लगी रही। वर्षों से संतान प्राप्ति की चाह रखने वाले दंपती भी अस्पताल के मुख्य द्वार पर मुंह लटकाए देखे गए। हाथों में अखबार की कटिंग और मुंह पर मासूमियत, साफ छलक रही थी। इनमें मथुरा शहर के अलावा हाथरस, अलीगढ़, आगरा आदि शहरों के लोग भी शामिल थे। लोगों की सलाह पर वह डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय की ओर भी दौड़े।
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हाथरस से आए दंपती ने नाम न छापने पर बताया कि उनकी शादी को करीब आठ वर्ष बीत गए लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त न हो सका। मथुरा के ही एक रिश्तेदार ने जब अखबारों में यह खबर पढ़ी तो उन्हें बताया। इसके बाद उनसे रहा न गया और वह इसे लेने के लिए यहां आ गई, पर चिकित्सक उन्हें इसे देने से मना कर रहे हैं। देर शाम तक नवजात बालिका को शिशु भेजे जाने की कार्रवाई जारी थी।
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शिशु सदन को मामले से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही उसे वहां भेजा जाएगा। शनिवार को नवजात को लेने के लिए दिनभर लोग अस्पताल आते रहे, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी है।
- डॉ. केके माथुर, बाल रोग विशेषज्ञ