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15 से प्रतिबंधित होगी 50 माइक्रोन से पतली पॉलीथिन
Updated Wed, 11 Jul 2018 11:26 PM IST
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फिरोजाबाद। पॉलीथिन के प्रयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जुलाई से प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। सीएम के निर्देश पर नगर निगम के अफसर अभियान चलाकर पॉलीथिन की बिक्री पर रोक लगाएंगे।
सुहागनगरी में बड़ी मात्रा में पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ पॉलीथिन नाले-नालियों में जमा होने से उन्हे चोक हो जाते हैं। पॉलीथिन के तमाम दुष्परिणाम के बाद भी व्यापारी और आमजन पॉलीथिन का मोह नहीं त्याग पा रहे। पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने 15 जुलाई से सभी शहरों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने निकायों को आदेश दिए हैं कि 50 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन पूर्णतया प्रतिबंधित की जाए। उन्होंने पॉलीथिन के साथ पतली प्लास्टिक के गिलास एवं प्लेट पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
सुहागनगरी के पारंपगत कांच उद्योग के लिए पॉलीथिन अभिशाप बन गई है। वर्षों पूर्व दवाईयां, पेय पदार्थ के साथ शराब की पैकिंग बोतलों में होती थी, लेकिन प्लास्टिक की बोतलों में पैकिंग की अनुमति मिलना कांच उद्योग के लिए अभिशाप बन गया। उद्यमियों का कहना है कि प्लास्टिक का प्रतिदिन करीब 11 मीट्रिक टन उत्पादन होता है, जो अधिकांशत: नष्ट नहीं होता।
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पॉलीथिन का भारी मात्रा में प्रयोग होने से हार्ट अटैक, शुगर, कैंसर, मेमोरी लॉस जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। प्लास्टिक की बोतल में शराब पीने से कैंसर, गुर्दे फेल होना, लीवर खराब होने, नपुंसकता जैसी बीमारियां हो रही हैं। बच्चों की दूध की बोतल में खतरनाक रसायन होने से दुधमुंहे बच्चे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
पॉलीथिन का प्रयोग पर्यावरण को बिगाड़ रहा है। पॉलीथिन का प्रयोग से हजारों निरीह पशु काल का ग्रास बन चुके हैं। पॉलीथिन उपजाऊ जमीन को बंजर बना रही है। इससे देश में उत्पादन क्षमता घटती जा रही है। पॉलीथिन सीवर व्यवस्था को ध्वस्त कर रही है।
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सुहागनगरी में बड़ी मात्रा में पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ पॉलीथिन नाले-नालियों में जमा होने से उन्हे चोक हो जाते हैं। पॉलीथिन के तमाम दुष्परिणाम के बाद भी व्यापारी और आमजन पॉलीथिन का मोह नहीं त्याग पा रहे। पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने 15 जुलाई से सभी शहरों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने निकायों को आदेश दिए हैं कि 50 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन पूर्णतया प्रतिबंधित की जाए। उन्होंने पॉलीथिन के साथ पतली प्लास्टिक के गिलास एवं प्लेट पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
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सुहागनगरी के पारंपगत कांच उद्योग के लिए पॉलीथिन अभिशाप बन गई है। वर्षों पूर्व दवाईयां, पेय पदार्थ के साथ शराब की पैकिंग बोतलों में होती थी, लेकिन प्लास्टिक की बोतलों में पैकिंग की अनुमति मिलना कांच उद्योग के लिए अभिशाप बन गया। उद्यमियों का कहना है कि प्लास्टिक का प्रतिदिन करीब 11 मीट्रिक टन उत्पादन होता है, जो अधिकांशत: नष्ट नहीं होता।
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पॉलीथिन का भारी मात्रा में प्रयोग होने से हार्ट अटैक, शुगर, कैंसर, मेमोरी लॉस जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। प्लास्टिक की बोतल में शराब पीने से कैंसर, गुर्दे फेल होना, लीवर खराब होने, नपुंसकता जैसी बीमारियां हो रही हैं। बच्चों की दूध की बोतल में खतरनाक रसायन होने से दुधमुंहे बच्चे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
पॉलीथिन का प्रयोग पर्यावरण को बिगाड़ रहा है। पॉलीथिन का प्रयोग से हजारों निरीह पशु काल का ग्रास बन चुके हैं। पॉलीथिन उपजाऊ जमीन को बंजर बना रही है। इससे देश में उत्पादन क्षमता घटती जा रही है। पॉलीथिन सीवर व्यवस्था को ध्वस्त कर रही है।