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बंद खातों से वापस हो गई हजारों छात्रों की छात्रवृति
Updated Sun, 22 Apr 2018 08:23 PM IST
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छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति
- फोटो : डैमो
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मथुरा। बैंक खातों में केवाईसी पूरा न कराने पर हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति शुल्क का पैसा वापस चला गया। अब समाज कल्याण विभाग ने 30 अप्रैल तक खातों को अपडेट कराने और केवाईसी पूरा कराने का एक और मौका दिया है।
छात्रवृत्ति के लिए सामान्य वर्ग के 22 हजार से अधिक और प्रतिपूर्ति शुल्क के लिए 10 हजार से अधिक छात्रोें ने आवेदन किया था, वहीं पिछड़ा वर्ग के कक्षा नौ व 10 के 2546 और अन्य कक्षाओं के 25547 छात्रों ने छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति शुल्क के लिए स्कूलों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया था।
इसमें बड़े पैमाने पर छात्रों ने बंद पड़े बैंक खातों के नंबर दे दिए या फिर स्कूलोें द्वारा कराई गई ऑनलाइन फीडिंग में खाता नंबर गलत फीड कर दिए। ज्यादातर में नाम की वर्तनी गलत लिख दी गई। ज्यादातर में केवाईसी पूरा नहीं हैं। इसके चलते छात्रों की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति शुल्क अटक गए हैं।
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ज्यादातर की राशि वापस शासन को भेजी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी ने बताया कि बैंक खाता नंबर गलत होने पर ट्रांजेक्शन फेल्ड के एक हजार से अधिक केस सामने आए हैं। बैंक खाता नंबर आदि सही कराकर समाज कल्याण कार्यालय में सही नंबर दर्ज कराने को 30 अप्रैल तक अभियान चलाया जा रहा है।
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छात्रवृत्ति के लिए सामान्य वर्ग के 22 हजार से अधिक और प्रतिपूर्ति शुल्क के लिए 10 हजार से अधिक छात्रोें ने आवेदन किया था, वहीं पिछड़ा वर्ग के कक्षा नौ व 10 के 2546 और अन्य कक्षाओं के 25547 छात्रों ने छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति शुल्क के लिए स्कूलों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया था।
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इसमें बड़े पैमाने पर छात्रों ने बंद पड़े बैंक खातों के नंबर दे दिए या फिर स्कूलोें द्वारा कराई गई ऑनलाइन फीडिंग में खाता नंबर गलत फीड कर दिए। ज्यादातर में नाम की वर्तनी गलत लिख दी गई। ज्यादातर में केवाईसी पूरा नहीं हैं। इसके चलते छात्रों की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति शुल्क अटक गए हैं।
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ज्यादातर की राशि वापस शासन को भेजी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी ने बताया कि बैंक खाता नंबर गलत होने पर ट्रांजेक्शन फेल्ड के एक हजार से अधिक केस सामने आए हैं। बैंक खाता नंबर आदि सही कराकर समाज कल्याण कार्यालय में सही नंबर दर्ज कराने को 30 अप्रैल तक अभियान चलाया जा रहा है।