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बेवर में मतदाता सूची से महिला का नाम काटा
Updated Mon, 16 Oct 2017 11:29 PM IST
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मतदाता सूची
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। निकाय चुनाव के लिए वार्डों एवं अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी होते ही मतदाता सूची में खेल शुरू हो गए हैं। ऐसा ही एक मामला बेवर नगर पंचायत का सामने आया है। यहां पर एक महिला का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है।
जांच में अधिकारियों ने उसके पति को निकाय क्षेत्र का निवासी माना है, जबकि महिला को नहीं। महिला पूर्व में बेवर नगर पंचायत में चुनाव तक लड़ चुकी है। पीड़ित पक्ष ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
बेवर निवासी अनुराग गुप्ता की पत्नी शीतल गुप्ता का निकाय की मतदाता सूची से नाम पिछले दिनों काट दिया गया था। उन्होंने जब नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया तो लगभग एक पखवाड़ा पूर्व बीएलओ की रिपोर्ट पर तहसीदार एके गुप्ता ने उनकी पत्नी का आवेदन सही मानते हुए नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने की संस्तुति कर दी। इसके बाद निकाय अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी हो गया।
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अनुराग गुप्ता का आरोप है कि इसके बाद सत्ताधारी पक्ष के लोगों ने दबाव डलवाकर उनके आवेदन की दोबारा जांच कराने के आदेश कर दिए। इस बार जांच ईओ किशनी कल्पना बाजपेई और तहसीलदार एके गुप्ता ने की। इस बाद दोनों ने जो रिपोर्ट बनाई उसमें लिखा की अनुराग गुप्ता तो निकाय क्षेत्र के स्थाई निवासी हैं जबकि उनकी पत्नी शीतल गुप्ता स्थायी निवासी नहीं हैं इसलिए उनका नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़ सकता है।
इसके बाद से अनुराग गुप्ता कई अधिकारियों के यहां शिकायत लेकर गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। अब वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना रहे हैं। वहीं इस संबंध में डीएम प्रदीप कुमार का कहना है कि इस मामले की शिकायत मिली है जांच कराई जाएगी कि आखिर कहां गड़बड़ी हुई है।
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जांच में अधिकारियों ने उसके पति को निकाय क्षेत्र का निवासी माना है, जबकि महिला को नहीं। महिला पूर्व में बेवर नगर पंचायत में चुनाव तक लड़ चुकी है। पीड़ित पक्ष ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
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बेवर निवासी अनुराग गुप्ता की पत्नी शीतल गुप्ता का निकाय की मतदाता सूची से नाम पिछले दिनों काट दिया गया था। उन्होंने जब नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया तो लगभग एक पखवाड़ा पूर्व बीएलओ की रिपोर्ट पर तहसीदार एके गुप्ता ने उनकी पत्नी का आवेदन सही मानते हुए नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने की संस्तुति कर दी। इसके बाद निकाय अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी हो गया।
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अनुराग गुप्ता का आरोप है कि इसके बाद सत्ताधारी पक्ष के लोगों ने दबाव डलवाकर उनके आवेदन की दोबारा जांच कराने के आदेश कर दिए। इस बार जांच ईओ किशनी कल्पना बाजपेई और तहसीलदार एके गुप्ता ने की। इस बाद दोनों ने जो रिपोर्ट बनाई उसमें लिखा की अनुराग गुप्ता तो निकाय क्षेत्र के स्थाई निवासी हैं जबकि उनकी पत्नी शीतल गुप्ता स्थायी निवासी नहीं हैं इसलिए उनका नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़ सकता है।
इसके बाद से अनुराग गुप्ता कई अधिकारियों के यहां शिकायत लेकर गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। अब वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना रहे हैं। वहीं इस संबंध में डीएम प्रदीप कुमार का कहना है कि इस मामले की शिकायत मिली है जांच कराई जाएगी कि आखिर कहां गड़बड़ी हुई है।