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सूर्य कुंड पर सूर्य देव ने संतान प्राप्ति को किया था तप
Updated Wed, 23 Aug 2017 03:50 PM IST
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सोरों स्थित सूर्य कुंड।
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कासगंज। हरिपदी गंगा के उत्तर दिशा में सूर्य तीर्थ की स्थिति पाई जाती है। वराह पुराण के अनुसार यहां भगवान सूर्य ने पुत्र की कामना से तप किया। बाल स्वरूप भगवान नारायण ने सूर्य की तपस्या से खुश होकर एक पुत्र यम एवं की एक पुत्री यमी नामक जुड़वा संतान प्रदान की।
यहां सूर्य मंदिर एवं प्रतिमाओं को आक्रमणकारियों ने तोड़ डाला था, लेकिन उसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। यहां सूर्य कुंड सरोवर भी है। इस सूर्य तीर्थ में अनेक संत पुरुषों ने अपनी साधना की है। उत्तर भारत के वेद मरमज्ञ विद्वान पंडित दशरथ शास्त्री ने यहां साधन भी की है।
हरिपदी गंगा के उत्तर पूर्व में सोमतीर्थ नामक पवित्र स्थान है। वराह प्रमाण में वर्णित है कि यहां चंद्रमा ने कई हजार वर्षों तक अत्यंत कष्ट साध्य तपस्या की। यही कारण रहा कि इसे सोमतीर्थ के नाम से भी जाना गया है। तीर्थ महात्म के अनुसार जो व्यक्ति भक्ति पूर्वक इस तीर्थ में 8 दिनों तक उपवास एवं गंगा स्नान करता है उसे अभीष्ट फल प्राप्त होता है।
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बताया जाता है कि वैशाख मास में कृष्ण पक्ष की द्वादशी को अंधकार के बीच सोमतीर्थ का स्थान दिखाई देता है। बताया जाता है कि इस तीर्थ के प्रभाव से राजा सेामदत्त के वाणों से आहत श्रंगाली ने अपने प्राणों को त्यागकर कांङ्क्षत देश के राजा की पुत्री के रूप में जन्म लिया। फिर पुन: यहां आकर निवास किया और मोक्ष को प्राप्त किया।
सोमतीर्थ और सूर्य तीर्थ होने के प्रमाण पुराणों में वर्णित हैं। आज भी बड़ी संख्या में लोग इन पवित्र स्थानों में पहुंचकर पूजा, अर्चना, हवन आदि करके मनोवांछित फलों की कामना करते हैं। यहां पहुंचने वाले तीर्थयात्री बार बार यहां की भूमि को प्रमाण करते हैं और बार-बार आने की प्रभु से कामना करते हैं।
क्या कहते हैं तीर्थनगरी सोरों के लोग-
- सोरों सूकर क्षेत्र में सूर्य कुंड का पौराणिक एवं धार्मिक रूप से विशेष महत्व है। यह भगवान सूर्य की तपस्थली है। यहां साधना करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। आज भी लोग यहां जप और तप के लिए पहुंचते हैं और अभीष्ट फल प्राप्त करते हैं। इस नगर को तीर्थनगरी का दर्जा मिलना बेहद आवश्यक है- पंडित वंशीधर शास्त्री, सेवायत
- सोरों सूकर क्षेत्र आदि तीर्थ है। यहां पुत्र की कामना के लिए भगवान सूर्य ने कठोर तपस्या की। भगवान वराह ने प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र प्राप्ति का वर दिया। इस आदि तीर्थ उपेक्षा सरकारों के द्वारा की जा रही है, जो गलत है। सरकार इस पौराणिक धरोहरों के विकास के लिए तीर्थस्थल घोषित करे।
पंडित सुधांशु निर्भय देवज्ञ राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त
- तीर्थ नगरी के सूर्य कुंड में सूर्योदय के समय सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती हैं। ये किरणें दिव्य होती हैं। मान्यता है कि उस समय इसमें स्नान करने से बल, बुद्धि, आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है। इस ऐतिहासिक तीर्थगनगरी को तीर्थ स्थलों के नक्शे में शामिल करना आवश्यक है।
पंडित राम खिलावन शास्त्री, पूर्व प्राचार्य मेहता संस्कृत विद्यालय
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यहां सूर्य मंदिर एवं प्रतिमाओं को आक्रमणकारियों ने तोड़ डाला था, लेकिन उसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। यहां सूर्य कुंड सरोवर भी है। इस सूर्य तीर्थ में अनेक संत पुरुषों ने अपनी साधना की है। उत्तर भारत के वेद मरमज्ञ विद्वान पंडित दशरथ शास्त्री ने यहां साधन भी की है।
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हरिपदी गंगा के उत्तर पूर्व में सोमतीर्थ नामक पवित्र स्थान है। वराह प्रमाण में वर्णित है कि यहां चंद्रमा ने कई हजार वर्षों तक अत्यंत कष्ट साध्य तपस्या की। यही कारण रहा कि इसे सोमतीर्थ के नाम से भी जाना गया है। तीर्थ महात्म के अनुसार जो व्यक्ति भक्ति पूर्वक इस तीर्थ में 8 दिनों तक उपवास एवं गंगा स्नान करता है उसे अभीष्ट फल प्राप्त होता है।
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बताया जाता है कि वैशाख मास में कृष्ण पक्ष की द्वादशी को अंधकार के बीच सोमतीर्थ का स्थान दिखाई देता है। बताया जाता है कि इस तीर्थ के प्रभाव से राजा सेामदत्त के वाणों से आहत श्रंगाली ने अपने प्राणों को त्यागकर कांङ्क्षत देश के राजा की पुत्री के रूप में जन्म लिया। फिर पुन: यहां आकर निवास किया और मोक्ष को प्राप्त किया।
सोमतीर्थ और सूर्य तीर्थ होने के प्रमाण पुराणों में वर्णित हैं। आज भी बड़ी संख्या में लोग इन पवित्र स्थानों में पहुंचकर पूजा, अर्चना, हवन आदि करके मनोवांछित फलों की कामना करते हैं। यहां पहुंचने वाले तीर्थयात्री बार बार यहां की भूमि को प्रमाण करते हैं और बार-बार आने की प्रभु से कामना करते हैं।
क्या कहते हैं तीर्थनगरी सोरों के लोग-
- सोरों सूकर क्षेत्र में सूर्य कुंड का पौराणिक एवं धार्मिक रूप से विशेष महत्व है। यह भगवान सूर्य की तपस्थली है। यहां साधना करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। आज भी लोग यहां जप और तप के लिए पहुंचते हैं और अभीष्ट फल प्राप्त करते हैं। इस नगर को तीर्थनगरी का दर्जा मिलना बेहद आवश्यक है- पंडित वंशीधर शास्त्री, सेवायत
- सोरों सूकर क्षेत्र आदि तीर्थ है। यहां पुत्र की कामना के लिए भगवान सूर्य ने कठोर तपस्या की। भगवान वराह ने प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र प्राप्ति का वर दिया। इस आदि तीर्थ उपेक्षा सरकारों के द्वारा की जा रही है, जो गलत है। सरकार इस पौराणिक धरोहरों के विकास के लिए तीर्थस्थल घोषित करे।
पंडित सुधांशु निर्भय देवज्ञ राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त
- तीर्थ नगरी के सूर्य कुंड में सूर्योदय के समय सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती हैं। ये किरणें दिव्य होती हैं। मान्यता है कि उस समय इसमें स्नान करने से बल, बुद्धि, आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है। इस ऐतिहासिक तीर्थगनगरी को तीर्थ स्थलों के नक्शे में शामिल करना आवश्यक है।
पंडित राम खिलावन शास्त्री, पूर्व प्राचार्य मेहता संस्कृत विद्यालय