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फिर से खुली स्टांप घोटाले की फाइल

Mon, 31 Jul 2017 08:59 PM IST
Updated Mon, 31 Jul 2017 08:59 PM IST
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फिर से खुली स्टांप घोटाले की फाइल
आगरा। करोड़ों रुपये के स्टांप घोटाले की जांच फिर से शुरू हो गई है। मगर, इससे जुड़े गायब तमाम दस्तावेज अब तक नहीं मिले हैं। ये दस्तावेज तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राम आसरे और उदयीराम पर लगे गंभीर आरोपों से जुड़े थे। मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने इस घोटाले की फाइल फिर से खोल दी है। गायब दस्तावेजों को पूर्व में जांच से जुड़े संबंधित अधिकारियों के रिकार्ड से निकलवाया जा रहा है।
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तत्कालीन एडीएम राम आसरे और उदयीराम पर स्टांप घोटाले के आरोप लगे थे। इस पर शासन स्तर से संयुक्त विकास आयुक्त के नेतृत्व में एडीएम वित्त एवं राजस्व और अपर आयुक्त की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। इस टीम ने वर्ष 2016 में जांच के बाद पूर्व एडीएम राम आसरे और उदयीराम को दोषी माना था। उन्होंने इस जांच को तत्कालीन मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भिजवा दिया था। मामला दो वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ा होने के कारण शासन ने एक बार मंडलायुक्त से भी इसकी जांच करने को कहा। इसके लिए शासन ने फाइल मंडलायुक्त कार्यालय भिजवा दी। मगर, इसमें से दोनों पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों से संबंधित साक्ष्य वाले दस्तावेज गायब हो गए हैं। इनका कोई पता नहीं चल सका है। इधर, मंडलायुक्त ने पूरे मामले की जांच फिर से शुरू कर दी है। गायब दस्तावेज दोनों अधिकारियों पर आरोप सिद्ध करने के लिए काफी थे। इनमें कई पूर्व अधिकारियों की जांच रिपोर्टें भी थीं। सूत्रों की मानें तो अब इन दस्तावेजों को संबंधित अधिकारियों के विभागीय रिकॉर्ड में से इन्हें निकवाले की कवायद की जा रही है।
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पूर्व मंत्री ने भी कराई थी जांच
तत्कालीन स्टांप शुल्क एवं पंजीयन मंत्री अरिदमन सिंह के आदेश पर पूर्व एडीएम वित्त एवं राजस्व राम आसरे स्टांप शुल्क चोरी की जांच की गई थी। तब पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने बताया था कि पूर्व एमडीएम वित्त एवं राजस्व राम आसरे के खिलाफ आडिट जांच के मुताबिक 01 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2011 तक 777 और एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2012 तक 458 स्टांप वाद निर्णित किए गए। 216 मामलों में 7.44 करोड़ रुपये का करापवंचन पाया गया था। तत्कालीन सहायक महानिरीक्षक द्वारा 03 जुलाई 2013 को प्रस्तुत आडिट रिपोर्ट के मुताबिक 21 वादों में 4.97 करोड़ रुपये की स्टांप शुल्क की गड़बड़ी पकड़ी गई। इस तरह कुल 12.41 करोड़ रुपये की हेरफेर पाया गया था। इस हेरफेर की धनराशि 50 करोड़ तक होने की आशंका जताई गई थी।
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मामले की जांच की जा रही है। पुरानी रिपोर्टों का अध्ययन किया जा रहा है। दस्तावेज जिस कर्मचारी के स्तर से गायब हुए होंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-के. राममोहन राव, मंडलायुक्त
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