फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   मुआवजे को तरसे अन्नदाता, फसल बीमा से तोड़ा नाता

मुआवजे को तरसे अन्नदाता, फसल बीमा से तोड़ा नाता

Fri, 03 Aug 2018 10:57 PM IST
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:57 PM IST
विज्ञापन
मुआवजे को तरसे अन्नदाता, फसल बीमा से तोड़ा नाता
farmer shimla
एटा। वे मुआवजे का मरहम लगाने आए थे, लेकिन दर्द बढ़ाकर चले गए। न तो मुआवजा मिला और न ही मदद। बड़ी आस लगाकर अपनी उपज को बचाने के लिए पाई-पाई जोड़कर प्रीमियम भरा था। कुदरत के कहर ने उम्मीदों पर पानी फेरा, तो फसल बीमा की याद आई। सोचा कि प्रधानमंत्री की फसल बीमा से क्षतिपूर्ति हो जाएगी। मगर जब दावा किया, तो उनकी उम्मीदों को नियम कानून की बंदिशों में जकड़कर तोड़ दिया गया। आलम यह हुआ कि प्रीमियम भी गया और मुआवजा भी नहीं मिला। किसानों की सरकार होने का गुमान पाल बैठी सत्ता के दौर में अन्नदाता ही छला जा रहा है। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की हकीकत कुछ यही है। फसल की क्षतिपूर्ति का मरहम नहीं लगने से अन्नदाता सिर पकड़कर बैठा है और अब फसल बीमा के चंगुल से दूर भाग रहा है। पढ़िए रिपोर्ट...
विज्ञापन

तीन साल पहले शुरू हुई थी योजना
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन मई 2015 को कोलकाता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत किसानों की फसल का बीमा मामूली दर पर किया जाना था। जिसके बाद बारिश, आपदा से फसल नुकसान पर तय दर के हिसाब से क्षतिपूर्ति का भुगतान बीमा कंपनी को करना था।
विज्ञापन

जिले में 12151 किसान आए थे आगे
वर्ष 2017 में खरीफ फसल के दौरान जिले में 12515 किसानों ने बढ़-चढ़कर बीमा योजना का लाभ लिया। जब खरीफ में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की बारी आई तो किसानों के साथ बीमा कंपनी ने छलावा किया। दावा करने वाले किसानों में से महज 1267 को क्षतिपूर्ति दी गई। जिसमें भी अधिकांश को पूरी क्षतिपूर्ति नहीं मिल सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रबी की फसल में गिर गया ग्राफ
जिले में यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी मुंबई को फसल बीमा का जिम्मा सौंपा गया। खरीफ में किसानों के साथ छल हुआ, तो रबी 2017 में किसानों की संख्या घटकर 9277 रह गई। बीमा कंपनी की मनमानी से सरकारी योजना को पलीता लग गया।
कंपनी की अनदेखी से उठा विश्वास
सरकार की फसल बीमा योजना से किसानों का भरोसा बीमा कंपनी की अनदेखी से उठ गया। रबी की फसल के दौरान जिले में आए आंधी तूफान, कटाई के समय भारी बारिश होने से किसानों का खासा नुकसान हुआ। जिस पर बीमा कंपनी ने कोई ध्यान नहीं दिया और किसान फिर से हाथ धो बैठे। किसान प्रीमियम जमा करने के बाद भी लाभ नहीं मिलने से कंपनी को कोसते रह गए।
प्रचार-प्रसार का अभाव
जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रचार-प्रसार के अभाव में दम तोड़ती जा रही है। दो लाख किसानों वाले जिले में महज नौ हजार का फसल बीमा दावों की पोल खोल रहा है। जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार नहीं होने से 90 फीसदी किसान योजना से दूर हैं।

कहते हैं किसान
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ आज तक नहीं मिला। हर बार फसल बर्बाद हो रही है।
जय सिंह, इस्लामपुर पीली

बीमा का लाभ पाने के लिए कई बार विभाग गए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। आज तक कोई मदद न मिली।
रतनलाल, नगला खरगी

बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान होता है, लेकिन कोई भरपाई करने वाला नहीं है।
मोरध्वज, मिरहची

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी नहीं है। कोई बीमा करने के लिए आजतक नहीं आया।
विमल कुमार, मिरहची

किसानों को लगातार जागरुक किया जा रहा है। उन्हें फसल बीमा योजना के बारे में बताया जा रहा है। हमारी कोशिश यही है कि अधिक से अधिक किसानों को बीमा योजना का लाभ मिले। अगर कोई किसान बीमा को लेकर शिकायत करता है तो उसकी शिकायत का निस्तारण भी कराया जाता है।
विजय शंकर, उप कृषि निदेशक
रवि की फसल का आंकलन कराकर किसानों को मुुआवजा दिलाए जाने की तैयारी चल रही है। जल्द पात्र किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
सौरभ कुमार, जिला समन्वयक
ये हैं आंकड़े
215544 किसानों का पंजीकरण जिले में
12151 किसानों ने कराया खरीफ में बीमा
9277 किसानों ने कराया रबी में बीमा
1267 किसानों को ही मिल सका क्षतिपूर्ति का लाभ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed