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बेसहारा महिलाओं को फिर मिला अपनों का साथ

Mon, 05 Mar 2018 08:09 PM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 08:09 PM IST
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बेसहारा महिलाओं को फिर मिला अपनों का साथ
साथियों के गले लगती पार्वती। - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन (मथुरा)। अपनों से दूर आश्रय सदन में रह रहीं महिलाओं को एक बार फिर परिवार का साथ मिलने की उम्मीद जाग रही है। घर-परिवार छोड़कर सालों से वृंदावन के आश्रय सदन में रह रहीं दो महिलाओं को सोमवार को उनके परिवारीजन अपने साथ वापस घर ले गए।
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चैतन्य विहार महिला आश्रय सदन के प्रभारी संतोष मिश्रा के अनुसार आश्रय सदन में रह रहीं महिलाओं को परिवार के पास भेजने की पहल की जा रही है। इसके तहत जिन महिलाओं के परिवारीजन हैं, उनसे बातचीत कर महिलाओं को वापस घर भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास पूरी तरह सफल रहा है। इसके तहत सदन में रह रहीं उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी 85 वर्षीय पार्वती के पुत्र नारायण सिंह से संपर्क किया गया। नारायण सोमवार को अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वृंदावन आए और हंसी-खुशी अपनी मां को साथ ले गए।
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वहीं, त्रिपुरा में थाना कुमारघाट के गांव कोलाशहर निवासी 67 वर्षीय नीलिमा कौर के पुत्र अलख और रूपक से संपर्क किया गया। इस पर बेटों ने किसी कारणवश आने में असमर्थता जताई लेकिन फौरन ही अपने मित्र सुशीलदास को आश्रय सदन भेजा दिया। सुशीलदास वृंदावन आकर कागजी कार्रवाई करने के बाद नीलिमा कौर को अपने साथ त्रिपुरा ले गए। सदन प्रभारी संतोष मिश्रा ने बताया कि इस प्रयास के तहत उन महिलाओं को घर भेजने की दिशा में काम किया जा रहा है जो अपने घर-परिवार वापस जाना चाहती हैं। जो महिलाएं घर नहीं जाना चाहती हैं उन्हें आश्रय सदन में ही रखा जाएगा। आश्रम में इन दिनों 122 महिलाएं रह रहीं हैं।
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साथियों के गले लगकर रोईं महिलाएं वृंदावन (मथुरा)। आठ वर्ष से आश्रय सदन को ही अपना आश्रय मानकर रह रहीं पार्वती परिवार को पाकर खुश हैं लेकिन आठ वर्ष जिनके साथ दुख-सुख बांटा उनसे बिछुड़ने का गम भी वे छुपा नहीं पाईं। यही हाल नीलिमा कौर का भी दिखा। सात वर्ष से वृंदावन में रहीं नीलिमा के लिए ही आश्रय सदन घर और परिवार बन गया था। दोनों महिलाओं ने जाने से पूर्व सदन की महिलाओं और कर्मचारियों को गले लगाया और रोने लगीं। सदन ने दोनों को फूलमाला पहनाने के साथ नए कपड़े और मिठाई देकर भेजा।
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