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बिछंदपुर के बाद अब रेड गांव में भी पोलियो दवा का किया बहिष्कार
Updated Wed, 08 Aug 2018 11:27 PM IST
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बिछंदपुर के बाद अब रेड गांव में भी पोलियो दवा का किया बहिष्कार
- फोटो : अमर उजाला
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जैथरा। बिछंदपुर गांव के बाद अब रेड गांव के लोगों ने पोलियो की दवा का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों की जिद है कि जब तक उनके गांव में विकास कार्य नहीं कराए जाएंगे। तब तक वह अपने बच्चों को पोलियो की दवा नहीं पिलाएंगे।
दरअसल, बुधवार को डोर टू डोर पोलियो की दवा पिलाई जा रही थी। इसकी जानकारी गांव रेड के लोगों को हुई तो उन्होंने दवा पिला रही टीम को महिलाओं ने रोक दिया। टीम के सदस्यों ने महिलाओं को काफी समझाया। मगर रेड के महिला पुरुष थे कि वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इससे पहले बिछंदपुर में डोर टू डोर दवा पिलाई जा रही थी। वहां भी महिलाओं ने बच्चों को दवा नहीं पिलाने दी। इसकी जानकारी अलीगंज स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी राजेश शर्मा को हुई तो वह गांव में पहुंचे। इससे पहले दोनों गांव में युवकों ने हाथों में तख्ती लेकर नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक उनके गांव में विकास कार्य नहीं होंगे। तब तक वह पोलियो की दवा बच्चों को नहीं पीने देंगे। श्री शर्मा ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण थे कि वह अपनी जिद के आगे किसी की सुनने को तैयार नहीं हो रहे थे। ग्रामीणों ने डोर टू डोर अभियान को भी सफल नहीं होने दिया।
- महिलाओं से हुई नोक-झोंक
पोलियो की दवा पिला रही टीम ने जब बच्चों को पकड़-पकड़ कर दवा पिलाने की कोशिश की तो महिलाओं ने विरोध किया। गांव की कई महिलाओं की टीम से नोक-झोंक हुई। गांव की महिला इसकी आक्रोशित थी कि वह हाथापाई करने के लिए भी मन बना चुकी थी। मगर गर्म माहौल देखते हुए टीम चुपचाप लौट आई।
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दरअसल, बुधवार को डोर टू डोर पोलियो की दवा पिलाई जा रही थी। इसकी जानकारी गांव रेड के लोगों को हुई तो उन्होंने दवा पिला रही टीम को महिलाओं ने रोक दिया। टीम के सदस्यों ने महिलाओं को काफी समझाया। मगर रेड के महिला पुरुष थे कि वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इससे पहले बिछंदपुर में डोर टू डोर दवा पिलाई जा रही थी। वहां भी महिलाओं ने बच्चों को दवा नहीं पिलाने दी। इसकी जानकारी अलीगंज स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी राजेश शर्मा को हुई तो वह गांव में पहुंचे। इससे पहले दोनों गांव में युवकों ने हाथों में तख्ती लेकर नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक उनके गांव में विकास कार्य नहीं होंगे। तब तक वह पोलियो की दवा बच्चों को नहीं पीने देंगे। श्री शर्मा ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण थे कि वह अपनी जिद के आगे किसी की सुनने को तैयार नहीं हो रहे थे। ग्रामीणों ने डोर टू डोर अभियान को भी सफल नहीं होने दिया।
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- महिलाओं से हुई नोक-झोंक
पोलियो की दवा पिला रही टीम ने जब बच्चों को पकड़-पकड़ कर दवा पिलाने की कोशिश की तो महिलाओं ने विरोध किया। गांव की कई महिलाओं की टीम से नोक-झोंक हुई। गांव की महिला इसकी आक्रोशित थी कि वह हाथापाई करने के लिए भी मन बना चुकी थी। मगर गर्म माहौल देखते हुए टीम चुपचाप लौट आई।
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