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नंदी ने गो पालक को पटक-पटक कर मार डाला
Updated Sun, 06 Aug 2017 12:19 AM IST
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गोपालक को मारने वाला नंदी।
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन (मथुरा)। मथुरा मार्ग गांव धौरेरा स्थित हासानंद गोशाला के गो पालक को नंदी ने पटककर मार डाला। चीख सुनकर अन्य गोपालक जैसे-तैसे उसे नंदी से बचाकर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। गोपालक की मौत के बाद गोशाला पहुंचे ग्रामीणों ने प्रबंधन से मुआवजे ही मांग करते हुए व्यवस्थाएं सही न होने का आरोप लगाया।
मूलरूप से गांव धौरेरा निवासी हरी सिंह 62 वर्ष लगभग 25 वर्षों से हासानंद गोशाला में गोपालक के रूप में कार्य करते थे। हरीसिंह परिवार के साथ ही गोशाला में ही रहते थे। रोज की तरह शनिवार की सुबह 10:30 बजे हरी सिंह गायों को चारा डालने के लिए गोशाला पहुंचे। इसी बीच नंदी वहां आ गया। नंदी ने हरीसिंह को पीछे पछाड़ मारकर गिरा दिया। हरीसिंह ने बचने का प्रयास किया, लेकिन नंदी ने हरीसिंह पर सिर और सीगों से लगातार कई बार किए। हरीसिंह पास की दीवार से टकराते रहे। चीख सुनकर अन्य गोपालक मौके पर पहुंचे और जैसे तैसे नंदी को कब्जे में किया। लोग हरीसिंह को सौ सैया संयुक्त जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हरीसिंह की मौत की खबर लगते ही गांव धौरेरा के ग्रामीण गोशाला में एकत्रित हो गए। लोगों ने प्रबंधन पर गोशाला में व्यवस्थाएं न होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने की मांग की।
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सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। गोशाला प्रबंधक विष्णु की सूचना पर हासानंद गोचर भूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके शर्मा, उपाध्यक्ष ललित अरोड़ा और सचिव सुनील शर्मा भी पहुंच गए। ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके शर्मा के अनुसार मृतक के पांच बेटियां और दो बेटे हैं। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं हैं। ट्रस्ट की ओर से हरीसिंह के परिवार को मुआवजा राशि दी जाएगी।
400 गायों के लिए हैं मात्र 5 कर्मचारी
गांव प्रधान चंद्रपाल बघेल ने कहा कि गोशाला में 400 से अधिक गोवंश की देखरेख के लिए मात्र 5 कर्मचारी हैं। कोई अनुभवी प्रबंधक और चिकित्सक भी यहां नहीं है। ऐसे में गोपालकों का जीवन खतरे में है।
महामना मदन मोहन मालवीय ने की थी स्थापना
ब्रज में गौवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा सन् 1935 में मथुरा-वृंदावन मार्ग पर गांव धौरेरा स्थित हासानंद गोचर भूमि की स्थापना कर एक हजार एकड़ भूमि को गौचारण के लिए दान दी।
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मूलरूप से गांव धौरेरा निवासी हरी सिंह 62 वर्ष लगभग 25 वर्षों से हासानंद गोशाला में गोपालक के रूप में कार्य करते थे। हरीसिंह परिवार के साथ ही गोशाला में ही रहते थे। रोज की तरह शनिवार की सुबह 10:30 बजे हरी सिंह गायों को चारा डालने के लिए गोशाला पहुंचे। इसी बीच नंदी वहां आ गया। नंदी ने हरीसिंह को पीछे पछाड़ मारकर गिरा दिया। हरीसिंह ने बचने का प्रयास किया, लेकिन नंदी ने हरीसिंह पर सिर और सीगों से लगातार कई बार किए। हरीसिंह पास की दीवार से टकराते रहे। चीख सुनकर अन्य गोपालक मौके पर पहुंचे और जैसे तैसे नंदी को कब्जे में किया। लोग हरीसिंह को सौ सैया संयुक्त जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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हरीसिंह की मौत की खबर लगते ही गांव धौरेरा के ग्रामीण गोशाला में एकत्रित हो गए। लोगों ने प्रबंधन पर गोशाला में व्यवस्थाएं न होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने की मांग की।
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सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। गोशाला प्रबंधक विष्णु की सूचना पर हासानंद गोचर भूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके शर्मा, उपाध्यक्ष ललित अरोड़ा और सचिव सुनील शर्मा भी पहुंच गए। ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके शर्मा के अनुसार मृतक के पांच बेटियां और दो बेटे हैं। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं हैं। ट्रस्ट की ओर से हरीसिंह के परिवार को मुआवजा राशि दी जाएगी।
400 गायों के लिए हैं मात्र 5 कर्मचारी
गांव प्रधान चंद्रपाल बघेल ने कहा कि गोशाला में 400 से अधिक गोवंश की देखरेख के लिए मात्र 5 कर्मचारी हैं। कोई अनुभवी प्रबंधक और चिकित्सक भी यहां नहीं है। ऐसे में गोपालकों का जीवन खतरे में है।
महामना मदन मोहन मालवीय ने की थी स्थापना
ब्रज में गौवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा सन् 1935 में मथुरा-वृंदावन मार्ग पर गांव धौरेरा स्थित हासानंद गोचर भूमि की स्थापना कर एक हजार एकड़ भूमि को गौचारण के लिए दान दी।