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हाईस्कूल के 13 हजार छात्रों के भविष्य पर संकट
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मैनपुरी। कॉलेजों की लापरवाही से एक बार फिर हाईस्कूल के 13 हजार परीक्षार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है। बोर्ड को परीक्षार्थियों का डाटा न भेजे जाने के चलते इन कॉलेजों की नामावलियां रोक दी हैं। ऐसे में इन छात्र-छात्राओं को परीक्षा से भी वंचित किया जा सकता है।
जिले में इस बार 70 हजार छात्र-छात्राओं ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में प्रतिभाग करने के लिए अपना पंजीकरण कराया है। इनमें से हाईस्कूल के 13 हजार छात्रों के बोर्ड परीक्षा में बैठने पर सवालिया निशान लग गया है।
बेलगाम 136 कॉलेजों ने हाईस्कूल के परीक्षार्थियों का डाटा ही बोर्ड को नहीं भेजा। जब बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। बोर्ड ने वित्तविहीन कॉलेजों की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे सभी कॉलेजों के छात्रों की नामावली रोकने की बात कही है। इससे वित्तविहीन कॉलेज संचालकों में खलबली मच गई है। सबसे बड़ी परेशानी तो उन छात्रों के सामने हैं, जिनका डाटा नहीं दिया गया है। अगर नामावली जारी नहीं की गई तो बोर्ड से प्रवेश पत्र भी रोक दिए जाएंगे। ऐसे में 13 हजार छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा से बाहर हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो इन छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाएगा।
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पहले भी सामने आई है कॉलेजों की लापरवाही
ये कोई पहली बार नहीं है जब कॉलेजों ने डाटा भेजने में लापरवाही की है। पिछले सालों में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। बाद में जिला विद्यालय निरीक्षक की संस्तुति पर बोर्ड द्वारा छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए प्रवेश पत्र जारी कर दिए जाते हैं। इसके चलते कॉलेज संचालकों के हौसले बुलंद रहते हैं। उन्हें पता है कि अगर छात्रों का भविष्य संकट में आएगा तो बोर्ड उन्हें राहत दे ही देगा।
कॉलेज संचालकों को स्पष्ट करना होगा कारण
अब अगर कॉलेज संचालक हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं का डाटा भेजते हैं तो उन्हें इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक के पत्र की आवश्यकता होगी। इसमें ये बताना होगा कि आखिर किन कारणों में ये डाटा जमा नहीं कराया गया। अगर बोर्ड को बताया गया कारण सही नहीं लगता है तो कॉलेज के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कॉलेजों की लापरवाही से छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाता है। समय से सभी कॉलेजों को डाटा भेजना चाहिए था। इस बारे में बोर्ड को पत्र लिखा गया है। इसके लिए हल निकाला जाएगा।
सर्वेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक, मैनपुरी।
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जिले में इस बार 70 हजार छात्र-छात्राओं ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में प्रतिभाग करने के लिए अपना पंजीकरण कराया है। इनमें से हाईस्कूल के 13 हजार छात्रों के बोर्ड परीक्षा में बैठने पर सवालिया निशान लग गया है।
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बेलगाम 136 कॉलेजों ने हाईस्कूल के परीक्षार्थियों का डाटा ही बोर्ड को नहीं भेजा। जब बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। बोर्ड ने वित्तविहीन कॉलेजों की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे सभी कॉलेजों के छात्रों की नामावली रोकने की बात कही है। इससे वित्तविहीन कॉलेज संचालकों में खलबली मच गई है। सबसे बड़ी परेशानी तो उन छात्रों के सामने हैं, जिनका डाटा नहीं दिया गया है। अगर नामावली जारी नहीं की गई तो बोर्ड से प्रवेश पत्र भी रोक दिए जाएंगे। ऐसे में 13 हजार छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा से बाहर हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो इन छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाएगा।
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पहले भी सामने आई है कॉलेजों की लापरवाही
ये कोई पहली बार नहीं है जब कॉलेजों ने डाटा भेजने में लापरवाही की है। पिछले सालों में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। बाद में जिला विद्यालय निरीक्षक की संस्तुति पर बोर्ड द्वारा छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए प्रवेश पत्र जारी कर दिए जाते हैं। इसके चलते कॉलेज संचालकों के हौसले बुलंद रहते हैं। उन्हें पता है कि अगर छात्रों का भविष्य संकट में आएगा तो बोर्ड उन्हें राहत दे ही देगा।
कॉलेज संचालकों को स्पष्ट करना होगा कारण
अब अगर कॉलेज संचालक हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं का डाटा भेजते हैं तो उन्हें इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक के पत्र की आवश्यकता होगी। इसमें ये बताना होगा कि आखिर किन कारणों में ये डाटा जमा नहीं कराया गया। अगर बोर्ड को बताया गया कारण सही नहीं लगता है तो कॉलेज के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कॉलेजों की लापरवाही से छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाता है। समय से सभी कॉलेजों को डाटा भेजना चाहिए था। इस बारे में बोर्ड को पत्र लिखा गया है। इसके लिए हल निकाला जाएगा।
सर्वेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक, मैनपुरी।