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जांच में खुलासा, फर्जी कंपनी हैं ज्यादातर दवाइयां
Updated Wed, 12 Sep 2018 10:48 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेंमो
कासगंज।
शहर में बिना लाइसेंस के दवाईयों के गोरखधंधे के मामले की प्रारंभिक जांच पड़ताल में कई जानकारियां सामने आईं हैं। पूरे नेटवर्क के साथ दवाओं का कारोबार किया जा रहा था। औषधि विभाग के आकलन के अनुरूप बरामद हुई दवाईयों की कीमत 60 लाख रुपये होने का अनुमान है। कारोबारियों को औषधि विभाग ने नोटिस जारी करके दवाओं के क्रय विक्रय के बिल भी मांगे हैं। स्पष्टीकरण न देने की स्थिति में न्यायालय में परिवाद दाखिल होगा।
मंगलवार को कोतवाली पुलिस ने सूचना के आधार पर मोहल्ला नवाब मनिहारिन चौक में एक घर के बाहर बनी दुकान से दवाओं के गोरखधंधे का राजफाश किया। औषधि निरीक्षक हेमेंद्र चौधरी ने बताया कि 10 दवाईयों के सैंपल नकली दवा होने की आशंका देखते हुए लिए हैं। जिनकी प्रयोगशाला में जांच होगी। 58 प्रकार की औषधियां और बरामद हुई जिनका मूल्य लगभग 60 लाख रुपये है। कारोबारी कोई बिल नहीं दिखा पाए। उन्होंने बताया कि कुछ औषधियां ऐसी पाई गईं हैं जिनकी निर्माता कंपनी अस्तित्व में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़ा मामला है लगातार इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। अभी और तथ्य सामने आ सकते हैं।
औषधि विभाग के सहायक आयुक्त राकेश कुमार राजपूत ने विस्तृत जांच पड़ताल के संबंध में अलीगढ़ एवं कासगंज के औषधि निरीक्षक हेमेंद्र कुमार चौधरी, एटा के औषधि निरीक्षक आशुतोष चौबे एवं हाथरस के औषधि निरीक्षक दीपक कुमार की टीम को पूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कर अपवंचन की भी आशंका
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कासगंज। दवाओं के गोरखधंधे में जीएसटी के कर चोरी की औषधि विभाग को आशंका है। जीएसटी विभाग भी मामले में जांच पड़ताल कर सकता है।
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शहर में बिना लाइसेंस के दवाईयों के गोरखधंधे के मामले की प्रारंभिक जांच पड़ताल में कई जानकारियां सामने आईं हैं। पूरे नेटवर्क के साथ दवाओं का कारोबार किया जा रहा था। औषधि विभाग के आकलन के अनुरूप बरामद हुई दवाईयों की कीमत 60 लाख रुपये होने का अनुमान है। कारोबारियों को औषधि विभाग ने नोटिस जारी करके दवाओं के क्रय विक्रय के बिल भी मांगे हैं। स्पष्टीकरण न देने की स्थिति में न्यायालय में परिवाद दाखिल होगा।
मंगलवार को कोतवाली पुलिस ने सूचना के आधार पर मोहल्ला नवाब मनिहारिन चौक में एक घर के बाहर बनी दुकान से दवाओं के गोरखधंधे का राजफाश किया। औषधि निरीक्षक हेमेंद्र चौधरी ने बताया कि 10 दवाईयों के सैंपल नकली दवा होने की आशंका देखते हुए लिए हैं। जिनकी प्रयोगशाला में जांच होगी। 58 प्रकार की औषधियां और बरामद हुई जिनका मूल्य लगभग 60 लाख रुपये है। कारोबारी कोई बिल नहीं दिखा पाए। उन्होंने बताया कि कुछ औषधियां ऐसी पाई गईं हैं जिनकी निर्माता कंपनी अस्तित्व में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़ा मामला है लगातार इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। अभी और तथ्य सामने आ सकते हैं।
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औषधि विभाग के सहायक आयुक्त राकेश कुमार राजपूत ने विस्तृत जांच पड़ताल के संबंध में अलीगढ़ एवं कासगंज के औषधि निरीक्षक हेमेंद्र कुमार चौधरी, एटा के औषधि निरीक्षक आशुतोष चौबे एवं हाथरस के औषधि निरीक्षक दीपक कुमार की टीम को पूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कर अपवंचन की भी आशंका
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कासगंज। दवाओं के गोरखधंधे में जीएसटी के कर चोरी की औषधि विभाग को आशंका है। जीएसटी विभाग भी मामले में जांच पड़ताल कर सकता है।