{"_id":"5b4b87934f1c1b39748b4e9c","slug":"101531676563-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारात चढ़ते ही झूमे घराती-बाराती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारात चढ़ते ही झूमे घराती-बाराती
Updated Sun, 15 Jul 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कासगंज। निजामपुर गांव में दुल्हन बनी शीतल के घर रविवार सुबही से विवाह की तैयारियां तेज हो गई थीं। सुबह करीब 10 बजे दुल्हन के हाथों में उसकी सहेलियां मेहंदी लगा रहीं थी। वहीं घर के पास एक छप्पर के नीचे दावत के खाने की तैयारी चल रही थीं।
कुतबपुर रोड पर बारात के लिए जनमासा तैयार किया जा चुका था। निजामपुर तिराहे पर बारात के स्वागत के लिए तोरणद्वार सजाया गया था। जनमासा, गांव की गलियों में सफाई कर्मी सफाई कार्य में जुटे थे। शीतल के घर लगातार नाते रिश्तेदारों के आने जाने का सिलसिला जारी था। दोपहर 11 से 12 बजे के बीच काफी रिश्तेदार घर में आ चुके थे।
महिलाएं घर के आंगन में ढोलक की थाप पर मंगल गीत गा रहीं थीं। दोपहर में शीतल के मामा के परिवार के लोग पहुंचे तो महिलाओं ने मंगल गायन करते हुए भात के गीत गाए और भातई परिवार का स्वागत किय।
विज्ञापन
बारात के आने का समय दोपहर तीन बजे निर्धारित था। इससे पहले हलवाइयों ने बारातियों के स्वागत के लिए पूरी तैयार कर ली थी। गांव के जनमासे पर बैंडबाजे भी सजकर तैयार थे और बग्गी भी तैयार थी। एक घोड़े की बग्गी को फूलों से सजाया गया। शाम चार बजे तक सब तैयारियां पूरी हो चुकीं थी। अब बस बारात के आने का इंतजार था। बारात तीन घंटे विलंब से पहुंची। बार-बार शीतल का भाई बीटू बरात की लोकेशन ले रहा था।
वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी बारात को लेकर बार बार फोन पर हाथरस पुलिस से जानकारी ले रहे थे। शाम छह बजे बारात शुरू हुई। बारात चढने का इंतजार खत्म होते ही लोगों में उत्साह नजर आने लगा। बारात नाचते गाते दुल्हन के घर तक जा पहुंची। सवा सात बजे दुल्हन के घर महिलाओं ने बरात की अगवानी की और मंगल गीत गाए। इसके बाद वैवाहिक रस्में शुरू हुईं। जनमासे में नाश्ता और भोज का कार्यक्रम चला। गांव में बारात शांतिपूर्वक निकलने से सभी लोग बेहद उत्साहित थे। वैवाहिक कार्यक्रमों के बीच रात्रि 10 बजे वर और वधू की जयमाला हुई और वैवाहिक कार्यक्रम हुए।
कुतबपुर रोड पर बारात के लिए जनमासा तैयार किया जा चुका था। निजामपुर तिराहे पर बारात के स्वागत के लिए तोरणद्वार सजाया गया था। जनमासा, गांव की गलियों में सफाई कर्मी सफाई कार्य में जुटे थे। शीतल के घर लगातार नाते रिश्तेदारों के आने जाने का सिलसिला जारी था। दोपहर 11 से 12 बजे के बीच काफी रिश्तेदार घर में आ चुके थे।
विज्ञापन
महिलाएं घर के आंगन में ढोलक की थाप पर मंगल गीत गा रहीं थीं। दोपहर में शीतल के मामा के परिवार के लोग पहुंचे तो महिलाओं ने मंगल गायन करते हुए भात के गीत गाए और भातई परिवार का स्वागत किय।
विज्ञापन
बारात के आने का समय दोपहर तीन बजे निर्धारित था। इससे पहले हलवाइयों ने बारातियों के स्वागत के लिए पूरी तैयार कर ली थी। गांव के जनमासे पर बैंडबाजे भी सजकर तैयार थे और बग्गी भी तैयार थी। एक घोड़े की बग्गी को फूलों से सजाया गया। शाम चार बजे तक सब तैयारियां पूरी हो चुकीं थी। अब बस बारात के आने का इंतजार था। बारात तीन घंटे विलंब से पहुंची। बार-बार शीतल का भाई बीटू बरात की लोकेशन ले रहा था।
वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी बारात को लेकर बार बार फोन पर हाथरस पुलिस से जानकारी ले रहे थे। शाम छह बजे बारात शुरू हुई। बारात चढने का इंतजार खत्म होते ही लोगों में उत्साह नजर आने लगा। बारात नाचते गाते दुल्हन के घर तक जा पहुंची। सवा सात बजे दुल्हन के घर महिलाओं ने बरात की अगवानी की और मंगल गीत गाए। इसके बाद वैवाहिक रस्में शुरू हुईं। जनमासे में नाश्ता और भोज का कार्यक्रम चला। गांव में बारात शांतिपूर्वक निकलने से सभी लोग बेहद उत्साहित थे। वैवाहिक कार्यक्रमों के बीच रात्रि 10 बजे वर और वधू की जयमाला हुई और वैवाहिक कार्यक्रम हुए।