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सरकार! स्कूलों की मनमानी पर कब लगाओगे लगाम

Thu, 29 Mar 2018 11:27 PM IST
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:27 PM IST
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सरकार! स्कूलों की मनमानी पर कब लगाओगे लगाम
BOOKS
अमर उजाला ब्यूरो
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एटा। शैक्षिक सत्र शुरू होते ही प्रवेश और पढ़ाई को मारामारी शुरू हो गई है। अभिभावक नौनिहालों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराने को दौड़ रहे हैं। वहीं स्कूलों की मनमानी भी जोरों पर है। जिले के तमाम प्राइवेट विद्यालयों ने फीस में इजाफा करते हुए अभिभावकों की कमर तोड़ दी है। वहीं प्रवेश कराने के नाम पर अभिभावकों को तय दुकानों से ड्रेस और किताबें खरीदने का पंपलेट पकड़ा दिया। बच्चों के भविष्य की मजबूरी में अभिभावक दुकानों पर किताबें और कोर्स लेने के लिए पहुंच रहे हैं। जहां लंबा-चौड़ा बिल देख उनके पसीने छूट रहे हैं। स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार के अफसर फेल नजर आ रहे हैं।
दरअसल, पिछले साल उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने निजी स्कूलों की मनमानी को देखते हुए स्कूलों में होने वाली पाठ्य पुस्तकों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे, मगर जिले में निर्देशों की हवा निकल गई है। नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही स्कूलों में कमीशन का खेल शुरू हो गया है। आलम यह है कि स्कूलों ने पुस्तक विक्रेताओं से संपर्क कर कोर्स और ड्रेसों का जिम्मा सौंप दिया है। स्कूलों में हर अभिभावक और विद्यार्थी को तय दुकानों से कोर्स और ड्रेसों की खरीद करने के लिए कहा गया है। साथ ही हर स्कूल ने नए शैक्षिक सत्र में करीब 15 फीसद की शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। इससे अभिभावक खासे परेशान हैं। वहीं अफसर निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने में नाकाम नजर आ रहे हैं।
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ड्रेस पांच सौ और कोर्स चार हजार मेें
विद्यालय की तय दुकानों पर मनमाने तरीके से अभिभावकों को लूटा जा रहा है। कई दुकानों पर स्कूलों की ड्रेस पांच सौ रुपये से शुरू होकर सात सौ रुपये तक हैं। जबकि छोटी कक्षाओं का कोर्स चार हजार रुपये तक मिल रहा है।
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अभिभावक कहते हैं
निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है। बढ़ती महंगाई के बीच बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल साबित हो रहा है। इस पर शिकंजा कसने की जरूरत है।

राखी शर्मा, अभिभावक
बच्चों के कोर्स और ड्रेस में अब तक आठ हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई महंगी होती जा रही है। इससे दिक्कत बढ़ रही है।
मेघा गुप्ता, अभिभावक
निजी स्कूलों में हर साल फीस बढ़ा दी जाती है। इस पर लगाम लगाने की जरूरत है। सरकार को शिक्षा गुणवत्ता के साथ इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
डा. साक्षी भारद्वाज, अभिभावक
निजी स्कूलों में पढ़ाई कराना बहुत आसान नहीं रह गया है। स्कूलों द्वारा की जा रही फीस वृद्धि से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस पर लगाम लगाई जाए।
सुजीत देव वार्ष्णेय, अभिभावक
एनसीईआरटी की पुस्तकों पर महंगाई की मार
गणित, विज्ञान सहित कई विषयों की पुस्तकें नहीं आई हैं बाजार में
कासगंज।
नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। जिले में अंग्रेजी माध्यम से संचालित कई विद्यालय ऐसे हैं जिनमें एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें संचालित होती है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में मात्र दो दिन का समय ही शेष रह गया है, लेकिन बाजार में अभी सभी विषयों की पुस्तकें नहीं आई है। कक्षा 6 से 10 तक के लिए अभी गणित एवं विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय की पाठ्यपुस्तक बाजार में नहीं आई हैं। बाजार में पुस्तकों की कीमतों में वृद्धि करके भेजा गया है। 10 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाई गई है। जब अभिभावक बाजार से पाठ्यसामग्री खरीदने पहुंचते हैं तो उनको गणित, विज्ञान विषयों की पुस्तकें नहीं दी जाती। अभिभावक गोविंद का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का काफी खर्च रहता है। एनसीईआरटी लगातार अपनी पाठ्यसामग्री महंगी करती जा रही है। महत्वपूर्ण विषयों की पाठ्य सामग्री बाजार में नहीं भेजी गई है, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ेगा। पाठ्य़सामग्री कारोबारी ओमप्रकाश बंसल ने बताया कि एनसीईआरटी ने कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की है। जिन विषयों की पुस्तकें नहीं आई हैं उनके जल्द ही बाजार में आने की उम्मीद है।
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