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घोटालों के जिम्मेदारों को बचाने की हो रही तैयारी
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:17 PM IST
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- फोटो : google
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एटा। जिला पंचायतराज विभाग में घोटालों के जिम्मेदारों को बचाने की तैयारी की जा रही है। गांव छितौनी में हुए शौचालय निर्माण में घपले पर कार्रवाई होने की जगह मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। अब डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को जांच देते हुए रिपोर्ट मांगी है। जबकि पहले खुद डीपीआरओ ने ही गबन की पुष्टि की थी। ऐसे में साफ है कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए प्रक्रिया को लंबा खींचा जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 2015 में शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत छितौनी में 16 इंदिरा आवासों का निर्माण कराया गया था। शासन की ओर से आवासों में 16 शौचालयों के निर्माण के लिए 19,2000 रुपये ग्राम निधि के खाते में भेजे गए। प्रधान प्रेम किशोर और सचिव संजय शर्मा ने सांठगांठ करके खाते से अप्रैल 2016 में 1,92,000 रुपये निकाल लिए, लेकिन कोई शौचालय नहीं बनवाया गया। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने जांच में आठ शौचालयों का निर्माण गांव विरामपुर पाया, जबकि छितौनी में कोई शौचालय नहीं बना।
मामले में प्रधान और पंचायत सचिव को नोटिस जारी किए गए। दो रिमाइंडर के बाद भी प्रधान और सचिव नहीं पहुंचे। इसके बाद डीएम अमित किशोर के पास फाइल कार्रवाई की संस्तुति करते हुए भेजी गई। डीएम ने प्रधान और सचिव को नोटिस देकर तलब किया, मगर काफी दिनों तक कोई उपस्थित नहीं हो सका। इसके बाद सीडीओ ने प्रधान को तलब किया। जहां प्रधान ने पहुंचकर अपने बयान दिए। प्रधान के बयान देने के बाद ही जांच प्रक्रिया नया मोड़ लेने लगी।
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इसके बाद डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को फिर से जांच के लिए गांव में भेजा और दोबारा जांच शुरू कर दी गई। बताया जाता है कि राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। वहीं प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में गबन सिद्ध हो चुका है। प्रशासन दोषियों को बचाने के लिए जांच को लंबा खींच रहा है। वहीं अब तक पंचायत सचिव के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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दरअसल, वर्ष 2015 में शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत छितौनी में 16 इंदिरा आवासों का निर्माण कराया गया था। शासन की ओर से आवासों में 16 शौचालयों के निर्माण के लिए 19,2000 रुपये ग्राम निधि के खाते में भेजे गए। प्रधान प्रेम किशोर और सचिव संजय शर्मा ने सांठगांठ करके खाते से अप्रैल 2016 में 1,92,000 रुपये निकाल लिए, लेकिन कोई शौचालय नहीं बनवाया गया। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने जांच में आठ शौचालयों का निर्माण गांव विरामपुर पाया, जबकि छितौनी में कोई शौचालय नहीं बना।
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मामले में प्रधान और पंचायत सचिव को नोटिस जारी किए गए। दो रिमाइंडर के बाद भी प्रधान और सचिव नहीं पहुंचे। इसके बाद डीएम अमित किशोर के पास फाइल कार्रवाई की संस्तुति करते हुए भेजी गई। डीएम ने प्रधान और सचिव को नोटिस देकर तलब किया, मगर काफी दिनों तक कोई उपस्थित नहीं हो सका। इसके बाद सीडीओ ने प्रधान को तलब किया। जहां प्रधान ने पहुंचकर अपने बयान दिए। प्रधान के बयान देने के बाद ही जांच प्रक्रिया नया मोड़ लेने लगी।
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इसके बाद डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को फिर से जांच के लिए गांव में भेजा और दोबारा जांच शुरू कर दी गई। बताया जाता है कि राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। वहीं प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में गबन सिद्ध हो चुका है। प्रशासन दोषियों को बचाने के लिए जांच को लंबा खींच रहा है। वहीं अब तक पंचायत सचिव के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।