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कैसा श्राद्ध... जब जीते जी भटकें बागवां
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:02 PM IST
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आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिला
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एटा। पितृ पक्ष में हम अपने बुजुर्गों को याद करके उनकी आत्म शांति के लिए श्राद्ध करते हैं। जिनका स्वर्गवास हो चुका है, उनके लिए क्षमा मांगते हैं। ताकि वे संसार भ्रमण से मुक्त होकर नया जन्म ले सकें। लेकिन जिले में कुछ ऐसे भी परिवारीजन हैं, जो पितृ पक्ष में श्राद्ध करते हैं, लेकिन अपने जिंदा मां-बाप को वृद्धाश्रम मेें छोड़ आए हैं। जिन मां-बाप ने पैदा करने से लेकर लायक बनाने तक तमाम कष्ट झेले लेकिन बेटों को उनसे मिलने तक की फुरसत नहीं है। बुजुर्गों से अपनों की दूरी का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। चकाचाैंध भरी आजादी में रिश्तों का दायरा अगर यूं ही बढ़ता रहा, तो नई पीढ़ी पितृ पक्ष की परंपरा को ही भुला डालेगी। पढ़िए रिपोर्ट...
पितृपक्ष में मां को भुला बैठे अपने
हाथ में झड़ी, शिथिल होता शरीर और आंखों में निराशा। जैथरा क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 70 वर्षीय महादेवी दो दिन पहले ही वृद्धाश्रम पहुंची हैं। पितृपक्ष में जहां बुजुर्गों को सम्मान दिया जाता है, मगर महादेवी के अपनों ने इन दिनों में ही मां को वृद्धाश्रम का रास्ता दिखा दिया। महादेवी कहती हैं कि घर में देखरेख करने वाला कोई नहीं है। इसलिए यहां चली आई।
कायम सिंह को रहता है अपनों का इंतजार
गांव पहोर निवासी कायम सिंह को भी अपनों का हर पल इंतजार सताता है। घर में कोई पूछता नहीं था, तो वृद्धाश्रम चले आए। 65 वर्षीय कायम सिंह का यहां मन तो लग जाता है, लेकिन निगाहें आश्रम के गेट पर ही टिकी रहती हैं। कायम सिंह कहते हैं कि अपनों की याद बहुत सताती है।
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परिजन आते हैं, मगर लेकर नहीं जाते
वृद्धाश्रम में रहने वाले गोकुल चंद्र के परिवारीजन उनसे मिलने तो आते हैं, लेकिन उनकी आस कोई पूरी नहीं करता। पिछले दिनों बेटे के निधन की खबर मिली, तो पिता गोकुल चंद्र दौड़कर गांव पहुंच गए। कुछ दिन गांव में बिताने के बाद वृद्धाश्रम लौट आए, मगर किसी ने रोका तक नहीं। बच्चों की याद तो सताती है।
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लोगों की सुनी, तो चले आए
फगनौल निवासी महेंद्र प्रसाद भी ढाई महीने से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। घर से थोड़ा परेशान हुए, तो लोगों ने वृद्धाश्रम की सलाह दी। पिछले दिनों जब संस्था के लोग सर्वे करने पहुंचे, तो उनकी पीड़ा सुनकर वृद्धाश्रम चले आए।
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वृद्धाश्रम में पूरी व्यवस्था
जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा जेल रोड पर वृद्धाश्रम का संचालन किया जाता है। श्याम ग्रामोद्योग संस्था अलीगढ़ आश्रम में पूरी व्यवस्था करती है। वार्डन शिवानी बताती हैं कि वृद्धाश्रम में 21 वृद्ध रहते हैं।
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पितृ पक्ष में नहीं आई अपनों की याद
शिवानी बताती हैं कि पितृ पक्ष में कई परिवारीजन वृद्धों की सुध लेने तक नहीं आए। अगर कोई आता भी है, तो बस 20-25 मिनट में मिलकर चला जाता है।
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इनका कहना है
जो लोग जीवित मां-बाप का ख्याल नहीं रखते और मरे पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, ऐसे लोगों को भारी दोष और पाप लगता है। ऐसे लोगों का कभी कल्याण नहीं हो सकता।
पंडित अरुण उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य
वृद्धाश्रम में वृद्धों को पूरी व्यवस्था दी जाती है। यहां एक अच्छा माहौल विकसित किया गया है। कोशिश यह भी की जाती है कि वृद्धों और उनके परिवारीजनों की काउंसलिंग की जाए और उनको परिवार में ही रहने के लिए प्रेरित किया जाए।
शिव कुमार, समाज कल्याण अधिकारी
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पितृपक्ष में मां को भुला बैठे अपने
हाथ में झड़ी, शिथिल होता शरीर और आंखों में निराशा। जैथरा क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 70 वर्षीय महादेवी दो दिन पहले ही वृद्धाश्रम पहुंची हैं। पितृपक्ष में जहां बुजुर्गों को सम्मान दिया जाता है, मगर महादेवी के अपनों ने इन दिनों में ही मां को वृद्धाश्रम का रास्ता दिखा दिया। महादेवी कहती हैं कि घर में देखरेख करने वाला कोई नहीं है। इसलिए यहां चली आई।
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कायम सिंह को रहता है अपनों का इंतजार
गांव पहोर निवासी कायम सिंह को भी अपनों का हर पल इंतजार सताता है। घर में कोई पूछता नहीं था, तो वृद्धाश्रम चले आए। 65 वर्षीय कायम सिंह का यहां मन तो लग जाता है, लेकिन निगाहें आश्रम के गेट पर ही टिकी रहती हैं। कायम सिंह कहते हैं कि अपनों की याद बहुत सताती है।
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परिजन आते हैं, मगर लेकर नहीं जाते
वृद्धाश्रम में रहने वाले गोकुल चंद्र के परिवारीजन उनसे मिलने तो आते हैं, लेकिन उनकी आस कोई पूरी नहीं करता। पिछले दिनों बेटे के निधन की खबर मिली, तो पिता गोकुल चंद्र दौड़कर गांव पहुंच गए। कुछ दिन गांव में बिताने के बाद वृद्धाश्रम लौट आए, मगर किसी ने रोका तक नहीं। बच्चों की याद तो सताती है।
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लोगों की सुनी, तो चले आए
फगनौल निवासी महेंद्र प्रसाद भी ढाई महीने से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। घर से थोड़ा परेशान हुए, तो लोगों ने वृद्धाश्रम की सलाह दी। पिछले दिनों जब संस्था के लोग सर्वे करने पहुंचे, तो उनकी पीड़ा सुनकर वृद्धाश्रम चले आए।
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वृद्धाश्रम में पूरी व्यवस्था
जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा जेल रोड पर वृद्धाश्रम का संचालन किया जाता है। श्याम ग्रामोद्योग संस्था अलीगढ़ आश्रम में पूरी व्यवस्था करती है। वार्डन शिवानी बताती हैं कि वृद्धाश्रम में 21 वृद्ध रहते हैं।
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पितृ पक्ष में नहीं आई अपनों की याद
शिवानी बताती हैं कि पितृ पक्ष में कई परिवारीजन वृद्धों की सुध लेने तक नहीं आए। अगर कोई आता भी है, तो बस 20-25 मिनट में मिलकर चला जाता है।
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इनका कहना है
जो लोग जीवित मां-बाप का ख्याल नहीं रखते और मरे पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, ऐसे लोगों को भारी दोष और पाप लगता है। ऐसे लोगों का कभी कल्याण नहीं हो सकता।
पंडित अरुण उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य
वृद्धाश्रम में वृद्धों को पूरी व्यवस्था दी जाती है। यहां एक अच्छा माहौल विकसित किया गया है। कोशिश यह भी की जाती है कि वृद्धों और उनके परिवारीजनों की काउंसलिंग की जाए और उनको परिवार में ही रहने के लिए प्रेरित किया जाए।
शिव कुमार, समाज कल्याण अधिकारी