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बुखार-खांसी की दवाओं की बढ़ी किल्लत
Updated Tue, 18 Jul 2017 10:10 PM IST
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आगरा। जीएसटी में पंजीकरण की देरी से सामान्य बीमारियों की दवाओं की भी किल्लत बढ़ गई है। अधिकांश फुटकर दवा विक्रेताओं ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया। इससे थोक विक्रेता उनको दवाएं देने में हिचक रहे हैं।
हालत ये है कि थोक दवा विक्रेताओं की लगभग 80 फीसदी का पंजीकरण हो गया है। फुटकर दवा विक्रेताआें का औसत अभी 20 फीसदी के पास ही है। इससे दूरस्थ और शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोरों पर बुखार-खांसी की कई दवाएं बमुश्किल मिल रही हैं।
इनमें सिर दर्द, पेट दर्द, अनाज में रखे जाने वाली दवाएं, कुत्ता-बंदर काटने की वैक्सीन, घाव सुखाने वाली, खुजली, प्रोटीन, ताकत बढ़ाने वाली दवाओं की कमी चल रही है। ट्रांसयमुना कॉलोनी निवासी एक युवक ने बताया कि बुखार-जुकाम की जो दवा चाहिए थी, वह कई दुकानों पर नहीं मिली। विक्रेेता ने उसके बदले अन्य कंपनी की दवा दे दी।
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इन दवाओं की ज्यादा किल्लत
डिस्प्रिन, रॉबीकाइंड डीसीआर, पार्कटिगडी, फीनेक्स प्लस, रेबीपुर इंजेक्शन, सिफोप्रोक्स-250-500 एमजी, पेंटेड चार लाख-दो लाख, कॉरेक्स सीरप, फेंसीड्रिल, रिंगगार्ड आइनटमेंट, जेरोलेक पाउडर, हनीटस टेबलेट, नैक्सिम-40, एकोरा डी, थ्रैप्टिन बिस्किट, विक्स एक्शन-500 हैं।
आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा ने बताया कि जीएसटी में पंजीकरण न कराए जाने से फुटकर दुकानों पर कई दवाओं की किल्लत बढ़ गई है। बुखार-खांसी जैसी दवाओं की भी मारामारी है।
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हालत ये है कि थोक दवा विक्रेताओं की लगभग 80 फीसदी का पंजीकरण हो गया है। फुटकर दवा विक्रेताआें का औसत अभी 20 फीसदी के पास ही है। इससे दूरस्थ और शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोरों पर बुखार-खांसी की कई दवाएं बमुश्किल मिल रही हैं।
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इनमें सिर दर्द, पेट दर्द, अनाज में रखे जाने वाली दवाएं, कुत्ता-बंदर काटने की वैक्सीन, घाव सुखाने वाली, खुजली, प्रोटीन, ताकत बढ़ाने वाली दवाओं की कमी चल रही है। ट्रांसयमुना कॉलोनी निवासी एक युवक ने बताया कि बुखार-जुकाम की जो दवा चाहिए थी, वह कई दुकानों पर नहीं मिली। विक्रेेता ने उसके बदले अन्य कंपनी की दवा दे दी।
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इन दवाओं की ज्यादा किल्लत
डिस्प्रिन, रॉबीकाइंड डीसीआर, पार्कटिगडी, फीनेक्स प्लस, रेबीपुर इंजेक्शन, सिफोप्रोक्स-250-500 एमजी, पेंटेड चार लाख-दो लाख, कॉरेक्स सीरप, फेंसीड्रिल, रिंगगार्ड आइनटमेंट, जेरोलेक पाउडर, हनीटस टेबलेट, नैक्सिम-40, एकोरा डी, थ्रैप्टिन बिस्किट, विक्स एक्शन-500 हैं।
आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा ने बताया कि जीएसटी में पंजीकरण न कराए जाने से फुटकर दुकानों पर कई दवाओं की किल्लत बढ़ गई है। बुखार-खांसी जैसी दवाओं की भी मारामारी है।