{"_id":"57378a484f1c1b7d7c919c80","slug":"1000-power-of-atorny-fake","type":"story","status":"publish","title_hn":"1000 पॉवर ऑफ अटार्नी फर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1000 पॉवर ऑफ अटार्नी फर्जी
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 15 May 2016 01:57 AM IST
विज्ञापन
पनामा पेपर
- फोटो : Desk
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में जांच कमेटी ने दो दिन में करीब 2,000 फाइलों का परीक्षण किया है। हैरत की बात यह है कि इनमें से लगभग 1000 फाइलों में गड़बड़ी पाई गई है। 50 फीसदी फाइलें फर्जी पाए जाने पर टीम ने अभी दो और दिन दस्तावेजों की जांच करने का फैसला लिया है।
गौरतलब है कि सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में पिछले चार वर्ष से पॉवर ऑफ अटार्नी का खेल चल रहा है। रक्त संबंधों को दरकिनार कर पैसे के बल पर खुलेआम पॉवर ऑफ अटार्नी बांटी जा रही हैं। इसकी शिकायत 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस खेल में भूमाफिया के शामिल होने के बाद करोड़ों रुपये की जमीन इधर से उधर हो गई। सूत्रों का कहना है कि सबसे अधिक फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी सब रजिस्ट्रार तृतीय के कार्यालय से हुई हैं। यह वही अधिकारी हैं, जिनका रिश्वत लेते हुए वीडियो शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ था। प्रति पावर आफ अटार्नी के लिए 15 हजार रुपये तक वसूल किए जाते थे।
लखनऊ से प्रमुख सचिव स्टांप पंजीयन एवं निबंधन के ओएसडी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में जांच करने आई समिति ने शुक्रवार और शनिवार को करीब 2,000 फाइलों का परीक्षण किया है। लगभग 1,000 फाइलों में गड़बड़ी मिली है।
विज्ञापन
अखिलेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अभी और भी फाइलों की जांच के निर्देश मिले हैं। जांच अभी कम से कम तीन दिन और चलेगी। उसके बाद शासन को रिपोर्ट को भेजी जाएगी। लेकिन यह तय कि यहां बड़ा खेल हुआ है।
रिकवर नहीं हुआ नौ माह का डाटा
सब रजिस्ट्रार तृतीय के यहां से दो वषाें के बैनामों का डाटा रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। अभी नौ माह का डाटा नहीं मिला है। शुक्रवार को रिश्वत का वीडियो वायरल होने के बाद तमाम सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि जो डाटा गायब हुआ है, उसमें भी बड़ा खेल हुआ है।
रिश्वतकांड की जांच, लिए गए बयान
आगरा। सब रजिस्ट्रार तृतीय मानवेंद्र शास्त्री पर लगे रिश्वत के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। जिलाधिकारी पंकज कुमार ने एआईजी स्टांप वीके पांडे, एडीएम वित्त राजकुमार और शासन की ओर से प्रमुख सचिव के ओएसडी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। वीके पांडे ने बताया कि इस मामले में संबंधित पक्षों के बयान लिए गए हैं। जांच दो दिन में पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में पिछले चार वर्ष से पॉवर ऑफ अटार्नी का खेल चल रहा है। रक्त संबंधों को दरकिनार कर पैसे के बल पर खुलेआम पॉवर ऑफ अटार्नी बांटी जा रही हैं। इसकी शिकायत 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस खेल में भूमाफिया के शामिल होने के बाद करोड़ों रुपये की जमीन इधर से उधर हो गई। सूत्रों का कहना है कि सबसे अधिक फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी सब रजिस्ट्रार तृतीय के कार्यालय से हुई हैं। यह वही अधिकारी हैं, जिनका रिश्वत लेते हुए वीडियो शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ था। प्रति पावर आफ अटार्नी के लिए 15 हजार रुपये तक वसूल किए जाते थे।
विज्ञापन
लखनऊ से प्रमुख सचिव स्टांप पंजीयन एवं निबंधन के ओएसडी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में जांच करने आई समिति ने शुक्रवार और शनिवार को करीब 2,000 फाइलों का परीक्षण किया है। लगभग 1,000 फाइलों में गड़बड़ी मिली है।
विज्ञापन
अखिलेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अभी और भी फाइलों की जांच के निर्देश मिले हैं। जांच अभी कम से कम तीन दिन और चलेगी। उसके बाद शासन को रिपोर्ट को भेजी जाएगी। लेकिन यह तय कि यहां बड़ा खेल हुआ है।
रिकवर नहीं हुआ नौ माह का डाटा
सब रजिस्ट्रार तृतीय के यहां से दो वषाें के बैनामों का डाटा रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। अभी नौ माह का डाटा नहीं मिला है। शुक्रवार को रिश्वत का वीडियो वायरल होने के बाद तमाम सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि जो डाटा गायब हुआ है, उसमें भी बड़ा खेल हुआ है।
रिश्वतकांड की जांच, लिए गए बयान
आगरा। सब रजिस्ट्रार तृतीय मानवेंद्र शास्त्री पर लगे रिश्वत के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। जिलाधिकारी पंकज कुमार ने एआईजी स्टांप वीके पांडे, एडीएम वित्त राजकुमार और शासन की ओर से प्रमुख सचिव के ओएसडी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। वीके पांडे ने बताया कि इस मामले में संबंधित पक्षों के बयान लिए गए हैं। जांच दो दिन में पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।