लोक गायन में ऊना, पाश्चात्य में फाइन आर्ट शिमला ने मारी बाजी
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राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में प्रदेश विश्वविद्यालय युवा महोत्सव भाग-2 की लोक गायन प्रतिस्पर्धा में ऊना, पाश्चात्य गायन में फाइन आर्ट कॉलेज शिमला ने बाजी मारी। चार दिवसीय युवा महोत्सव का शनिवार को समापन हुआ।
निदेशक उच्च शिक्षा अमरजीत शर्मा मुख्यातिथि थे। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया। प्राचार्य प्रो सुनील के मेहता ने चार दिवसीय आयोजन की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
शास्त्रीय गायन में फाइन आर्ट शिमला पहले, ऊना कॉलेज और पीजी सेंटर शिमला दूसरे, भटोली, जोगिंद्रनगर और आरकेएमवी शिमला संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।
तबला वादन में सुंदरनगर प्रथम, भटोली और ठियोग द्वितीय, सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी, फाइन आर्ट शिमला और जोगिंद्रनगर तृतीय, सितार वादन में फाइन आर्ट शिमला पहले, संजौली, पीजी सेंटर शिमला और संस्कृत कॉलेज सुंदरनगर दूसरे, रामपुर, धर्मशाला और आरकेएमवी
शिमला तीसरे, भारतीय समूहगान में पीजी सेंटर शिमला प्रथम, ऊना, द्रंग (नारला), धर्मशाला और अर्की द्वितीय, सोलन, जोगिंद्रनगर, आरकेएमवी शिमला और संजौली महाविद्यालय तृतीय रहा।
पाश्चात्य एकल गायन में इन्होंने मारी बाजी
गीत गजल में भटोली प्रथम, ऊना, बिलासपुर, फाइन आर्ट शिमला, नालागढ़ द्वितीय, पीजी सेंटर शिमला, अर्की, कोटशेरा, धर्मशाला और आरकेएमवी शिमला तृतीय। लोक गायन में ऊना प्रथम, अंब, संजौली, धर्मशाला और जोगिंद्रनगर द्वितीय, पीजी सेंटर शिमला, कुल्लू, रामपुर और द्रंग (नारला) तृतीय।
पाश्चात्य समूहगान में पीजी सेंटर शिमला प्रथम, फाइन आर्ट शिमला, ऊना, चुवाड़ी और जोगिंद्रनगर द्वितीय, आरकेएमवी शिमला, रामपुर, अर्की, धर्मशाला और नगरोटा बगवां तृतीय।
पाश्चात्य एकल गायन में फाइन आर्ट शिमला पहले, कोटशेरा, धर्मशाला, राजगढ़ और पीजी सेंटर शिमला दूसरे, कुल्लू, नालागढ़, सोलन और हमीरपुर कॉलेज संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में डॉ ऊषा बगाती, डॉ जगमोहन, डॉ अशोक कुमार शर्मा, डॉ जिया लाल ठाकुर ने बतौर निर्णायक भूमिका अदा की।
युवा महोत्सव भाग-2 के आयोजक सचिव डॉ सतीश ठाकुर और संयुक्त सचिव डॉ हेमंत शर्मा ने बताया कि चार दिवसीय युवा महोत्सव भाग-2 में प्रदेश से करीब 50 महाविद्यालय के 800 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कंशी और खंजरी बजाने तक सिमटे संगीत के विद्यार्थी
हिमाचल के महाविद्यालयों में वाद्य संगीत के विद्यार्थी केवल कंशी और खंजरी बजाने तक ही सिमट कर रह गए हैं। संगीत के विद्यार्थी हारमोनियम, तबला, ढोलक सहित अन्य मुख्य वाद्य यंत्र बजाने से पिछड़ रहे हैं।
प्रदेश विश्वविद्यालय के राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में हुए युवा महोत्सव भाग-2 में फोक आर्केस्ट्रा में मुख्य वाद्य यंत्रों से वाद्य संगीत के विद्यार्थी खासे दूर दिखे।
संगीत में हारमोनियम, तबला, ढोलक सहित अन्य मुख्य वाद्य यंत्रों को बजाने के लिए लगभग सभी महाविद्यालय बाहरी लोगों को किराए पर लेकर आए। इसके अलावा युवा महोत्सव में फोक आर्केस्ट्रा में खंजरी, कांशी, ढमरु, कांसे की थाली और मटका बजाने तक ही सीमित रह गए
। युवा महोत्सव भाग दो में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में वाद्य यंत्र बजाने के लिए बाहरी लोगों को किराए पर लाने में छूट होती है। ऐसे में फोक आर्केस्ट्रा में भाग लेने वाले 13 महाविद्यालयों ने मुख्य वाद्य यंत्रों पर किराए के लोगों लाए। अन्य प्रतिस्पर्धाओं में भी हारमोनियम और तबले पर बाहरी लोगों ने ही थाप दी।