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Mallikarjuna Jyotirlinga: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में एक साथ विराजित हैं भगवान शिव और माता पार्वती

Wed, 25 Dec 2024 06:32 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 25 Dec 2024 06:32 AM IST
सार

Mallikarjuna Jyotirlinga: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इसे भगवान शिव और देवी पार्वती का स्थायी निवास स्थान माना गया है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहां शिव और शक्ति, दोनों की पूजा की जाती है।

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Mallikarjuna Jyotirlinga Location Darshan History Significance and Katha Full Details in Hindi
Mallikarjuna Jyotirlinga: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित है, जो नल्लामला पर्वतमाला का एक हिस्सा है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mallikarjuna Jyotirlinga: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका स्थान अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती के करुणामय और वात्सल्य रूप का प्रतीक है।
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का स्थान
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित है, जो नल्लामला पर्वतमाला का एक हिस्सा है। यह स्थान कृष्णा नदी के तट पर स्थित है और प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। श्रीशैलम का यह मंदिर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और इसकी प्राकृतिक सुंदरता भक्तों को आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करती है। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी विशेष माना जाता है।
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पुराणों में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इसे भगवान शिव और देवी पार्वती का स्थायी निवास स्थान माना गया है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहां शिव और शक्ति, दोनों की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा करने से भक्तों के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान साधना, ध्यान और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा
शिव पुराण के अनुसार, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के विवाह को लेकर एक प्रसंग हुआ। जब गणेश जी का विवाह पहले कर दिया गया, तो भगवान कार्तिकेय इस निर्णय से नाराज होकर दक्षिण की ओर चले गए और श्रीशैल पर्वत पर निवास करने लगे। पुत्र के वियोग से दुखी होकर भगवान शिव और माता पार्वती भी वहां पहुंच गए। भगवान शिव ने स्वयं को मल्लिकार्जुन (मल्लिका अर्थात पार्वती और अर्जुन अर्थात शिव) के रूप में प्रकट किया। इस कथा के कारण यह ज्योतिर्लिंग शिव और पार्वती के वात्सल्य और परिवारिक प्रेम का प्रतीक बन गया।


दर्शन करने का लाभ
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन का महत्व बहुत अधिक है। यहां भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से भक्तों को उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। माना जाता है कि यहां के दर्शन से व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के दुख, रोग और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से यहां भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पूजा विधि
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पूजा करते समय श्रद्धालु गंगाजल, दूध, शहद और पंचामृत से अभिषेक करते हैं। शिवलिंग पर त्रिदली बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन और भस्म चढ़ाई जाती है। 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में दीप जलाकर आरती की जाती है और भगवान को फल, मिष्ठान्न और नारियल का भोग अर्पित किया जाता है।

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