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युग हत्याकांड: परिजनों को अब मासूम की अस्थियों का इंतजार

Fri, 07 Sep 2018 12:35 PM IST
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 07 Sep 2018 12:35 PM IST
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Yug murder case verdict parents waiting for mortal remains

युग हत्याकांड में तीनों दोषियों को अदालत से ‘सजा ए मौत’ मिलने के बाद अब परिजनों को बच्चे की अस्थियों का इंतजार है। युग की दादी अपने पोते के अवशेष हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित करना चाहती हैं ताकि मासूम की आत्मा को शांति मिल सके। पिछले दो सालों से युग की अस्थियां पुलिस के मालखाने में बतौर सबूत बंद हैं। 22 अगस्त 2016 को पुलिस ने भराड़ी के पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया था।

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अदालत के फैसले के बाद वीरवार को ‘अमर उजाला’ की टीम युग के घर पहुंची। दादी चंद्रलेखा (68) युग की तस्वीर गोद में लिए टकटकी लगाए अपने पोते को निहार रही थी। आंखों में आंसू लिए वह बोलीं, ‘कोर्ट से हमें इंसाफ मिल गया है।
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पोते के हत्यारों को मौत की सजा के बाद अब मेरी एक ही इच्छा है कि उसकी अस्थियों को खुद हरिद्वार ले जा कर गंगा में प्रवाहित करूं। पोता तो अब वापस नहीं आ सकता, वो जहां भी है उसकी आत्मा की शांति के लिए हर रोज भगवान से प्रार्थना करती हूं। 

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वैज्ञानिक सबूत बनी युग की अस्थियां

Yug murder case verdict parents waiting for mortal remains

युग के पिता विनोद कुमार और मां पिंकी ने कहा कि दो साल 15 दिन बीत चुके हैं, अभी तक हमें बच्चे की अस्थियां नहीं मिली हैं। विनोद कुमार ने कहा कि कोर्ट के फैसले से हम संतुष्ट हैं। न्यायपालिका पर हमारा विश्वास और बढ़ा है। इस लड़ाई में सरकार, पुलिस विभाग, सीआईडी, शिमला शहर और प्रदेश भर के लोगों ने हमारा सहयोग किया।

विशेषतौर पर सीआईडी के इनवेस्टिगेशन आफिसर अनिल और राजेश, जिला न्यायवादी रणदीप परमार उनके सहयोगी लोकेंद्र और जितेंद्र, व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष भाई इंद्रजीत सिंह ने हमारा भरपूर सहयोग दिया।

22 अगस्त 2016 को भराड़ी टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ था। इसके बाद अवशेषों को आईजीएमसी भेजा गया जहां डॉक्टरों ने इसे इंसानी बच्चे का कंकाल होने की पुष्टि की। इसके बाद युग के माता-पिता के डीएनए से मिलान हो गया।

न्यायालय में वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर यह साबित कर दिया गया कि टैंक से मिला कंकाल युग का ही था। युग के अवशेषों को बतौर सबूत मालखाने में जमा करवा दिया। जिला न्यायवादी रणदीप परमार ने बताया कि युग के परिजन अवशेष हासिल करने के लिए न्यायालय को पत्र लिख सकते हैं। न्यायालय के आदेशों पर पुलिस परिजनों को युग के अवशेष सौंप सकती है।

फैसले के बाद सही से खाना भी नहीं खा पाई युग की मां पिंकी

Yug murder case verdict parents waiting for mortal remains

युग के हत्यारों को फांसी की सजा के बाद रिश्तेदार सांत्वना देने घर पहुंच रहे हैं। पड़ोस में रहने वाली महिलाओं का तो यहां तक कहना था कि युग के हत्यारों को रिज पर फांसी देनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की सोचे भी नहीं।

युग की मां पिंकी बेहद भावुक दिखी। फैसले के बावजूदरात को पिंकी सही से खाना तक नहीं खा पाई। रसोई घर में काम करते हुए भी युग की याद में खोई रही। पिता विनोद कुमार सुबह दुकान पर बैठे तो आसपास के दुकानदार भी सांत्वना देने दुकान पर पहुंचे और कोर्ट के फैसले को सही बताया।

विनोद कुमार के चचेरे भाई राम किशोर लखनऊ से शिमला पहुंचे। राम किशोर ने बताया कि हम तो यही चाहते हैं कि उच्च न्यायालय अब इस मामले की सुनवाई न कर इसे तुरंत खारिज कर दे। युग के पिता विनोद की बहन और भांजा कार्तिक भी घर पर आए और गमगीन दिखे।

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