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विधानसभा सत्र: सीएम बोले- नर्सों की आउटसोर्स भर्ती नहीं होगी, पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर नियमित होंगे

Wed, 26 Aug 2026 05:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 26 Aug 2026 05:25 PM IST
सार

प्रदेश में स्टाफ नर्सों की भर्ती अब आउटसोर्स आधार पर नहीं होगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह एलान किया। 

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CM Sukhu states that outsourced nurses will not be regularized, but part-time multi-task workers will be
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : आईपीआर विभाग

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में स्टाफ नर्सों की भर्ती अब आउटसोर्स आधार पर नहीं होगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य विभाग से आउटसोर्स भर्तियों को कम करने की शुरुआत कर रही है। अब स्टाफ नर्सों की भर्ती राज्य चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित कर की जाएगी। लिखित परीक्षा में मेरिट के आधार पर ही अभ्यर्थियों का चयन होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों में किसी तरह की सिफारिश नहीं चलेगी। न मुख्यमंत्री की सिफारिश मानी जाएगी और न पूर्व मुख्यमंत्री या विधानसभा अध्यक्ष की। जो अभ्यर्थी मेरिट में आएगा, उसे ही नौकरी मिलेगी।

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 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद वर्तमान भर्ती नियमों के तहत भरे जाएंगे: सीएम
 मुख्यमंत्री ने कहा कि पैरा मेडिकल स्टाफ के पद वर्तमान भर्ती नियमों के तहत भरे जाएंगे। भविष्य में इन पदों की भर्ती व्यवस्था में भी बदलाव पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के तहत नियुक्त पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्करों को नियमित किया जाएगा। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति कंपनियों के माध्यम से होती है और कर्मचारी के काम से असंतुष्ट होने पर कंपनी उसे हटा सकती है। हालांकि, बिना वजह वेतन काटने की शिकायत पर सरकार संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करेगी। प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल से आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं ली जाती रही हैं। 

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कोविड काल में हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा नाैकरी देने की प्रक्रिया शुरू: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन को नोडल एजेंसी बनाया है। यह टेंडर निकालकर आगे कंपनियों को काम आवंटित करते हैं। नाइलेट के माध्यम से भी आउटसोर्स आधार पर कर्मचारी रखे जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड काल में हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों में से कई को दोबारा नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि कोई कर्मचारी अभी नियुक्ति से रह गया है तो उसे भी रखने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अस्पताल में स्वीकृत पदों से कम आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही। बुधवार को विधानसभा में विधायक दीपराज के मूल और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर, रणधीर शर्मा, राकेश जमवाल और हंसराज ने आउटसाेर्स भर्तियों का मामला उठाया।

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कांग्रेस नेताओं को बनाया ठेकेदारा, यह जांच का विषय: जयराम
 नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने आउटसोर्स आधार भर्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, कांग्रेस के पदाधिकारी हैं, उन्हें आउटसोर्स भर्तियों के लिए ठेकेदार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नई आउटसोर्स एजेंसियों के पंजीकरण का मामला आने वाले समय में यह जांच का सबसे बड़ा विषय बनेगा।

 नेता विपक्ष जयराम ठाकुर पर सीएम ने कसा तंज
 नेता विपक्ष जयराम ठाकुर पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको सिराज के ठेकेदार से परेशानी है। मैं ठेकेदार से कहूंगा कि कुछ आदमी आपके भी लगाएं और आपको परेशान ना करे। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कंपनियों को एंपेनलमेंट के नियम पूर्व सरकार के समय के ही चल रहे हैं और इसमें कोई ज्यादा बदलाव नहीं किया है।

शिलाई से 700 लोगों को आउटसोर्स से लगाने का पूछा सच:  दीपराज
- भाजपा विधायक दीपराज ने अपने पूरक सवाल में आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने, शिलाई में करीब 700 लोगों को आउटसोर्स माध्यम से लगाए जाने और करसोग में जलवाहक लगाने के लिए 500 रुपये शुल्क लिए जाने का मुद्दा उठाया। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में सेवाओं को आउटसोर्स किया जाता है, सरकार की नीति में व्यक्तियों को सीधे आउटसोर्स माध्यम से नियुक्त करने की प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा कि शिलाई में 700 लोगों को लगाए जाने की बात यदि तथ्यों पर आधारित है तो विधायक इसे सदन के पटल पर रखें। विधायक हंसराज ने कहा कि सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने की बात कर रही है, लेकिन इसकी नीति नहीं बना सकती। विधायक राकेश जमवाल ने सुंदरनगर में ऑक्सीजन प्लांट को दोबारा चलाने से जुड़ा सवाल पूछा।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव: चार महीने से तत्तापानी-सलापड़ सड़क बंद, वैकल्पिक मार्ग पर तुरंत बस चलाने की मांग
भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत तत्तापानी-सलापड़ सड़क के बाली-कैंची के पास चार महीने से बंद पड़े हिस्से का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से मुख्य सड़क की जल्द बहाली के साथ तब तक चनीकर-हाड़ाबोई वैकल्पिक मार्ग पर नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग की। जमवाल ने कहा कि 28 जुलाई को संयुक्त फिटनेस समिति ने वैकल्पिक मार्ग को बसों और बड़े वाहनों के लिए उपयुक्त घोषित कर दिया था, बावजूद इसके बस सेवा शुरू नहीं हुई। कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों, मरीजों और हजारों स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बिना किसी औपचारिकता के तत्काल बस सेवा शुरू करने के आदेश जारी करने की मांग की। साथ ही भूस्खलन प्रभावित मुख्य सड़क के स्थायी समाधान और बाईपास निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया। जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मामले की रिपोर्ट मांग कर जल्द समस्या को दूर किया जाएगा। 

प्रश्नकाल में गतिरोध पैदा नहीं करने की राठौर ने उठाई मांग
 कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने प्रश्नकाल के दौरान गतिरोध पैदा न करने की मांग उठाई। उन्होंने सत्ता और विपक्ष के सदस्यों से आग्रह किया कि प्रश्नकाल के दौरान अनावश्यक बात न की जाए। इससे कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने से रह जाते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि आधा घंटा एक सवाल में लग रहा है। जब सप्लीमेंटरी सवाल अधिक होंगे तो जवाब भी उतने विस्तार से आएंगे। ऐसे में सभी सदस्यों को संक्षेप में अपनी बात रखनी चाहिए। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने भी एक ही प्रश्न में काफी समय लगने का मामला उठाया। 

भाजपा के हर गुट के सवाल का देना पड़ता है जवाब:  मुख्यमंत्री
 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्नकाल में अधिक समय लगने का एक बड़ा कारण भाजपा के गुट भी हैं। उन्हें हर गुट के सवाल का जवाब देना पड़ता है। भाजपा का हर गुट अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। चुनाव नजदीक आते ही भाजपा में दबाव बढ़ रहा है। 

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